Soybean Meal: पोल्ट्री उद्योग ने उत्पादन में 25 फीसदी कटौती करने का फैसला किया है. उद्योग का कहना है कि सोयाबीन मील की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और जुलाई से अक्टूबर के बीच मांग में आने वाली मौसमी गिरावट के कारण यह कदम उठाना पड़ा है. माना जा रहा है कि उत्पादन घटने से आने वाले समय में चिकन और अंडों की कीमतों पर असर पड़ सकता है. पोल्ट्री उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि पिछले एक महीने में सोयाबीन मील की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी हुई है. इससे मुर्गीपालन में इस्तेमाल होने वाले चारे की लागत काफी बढ़ गई है और देशभर के पोल्ट्री उत्पादकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन (AIPBA) के चेयरमैन बहादुर अली की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में फैसला लिया गया, जिसमें सोयाबीन मील की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण पोल्ट्री सेक्टर के सामने आए गंभीर संकट पर चर्चा हुई. AIPBA का कहना है कि उत्पादन लागत में तेज बढ़ोतरी और सावन, नवरात्रि व दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के दौरान चिकन की मांग में पारंपरिक गिरावट को देखते हुए उद्योग ने तत्काल प्रभाव से पोल्ट्री उत्पादन में 25 प्रतिशत कटौती करने का फैसला किया है. उद्योग का मानना है कि इससे बढ़ती लागत के असर को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा.
कीमतों में 40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी
साथ ही बैठक में बताया गया कि पिछले एक महीने में सोयाबीन मील की कीमतों में 40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. इससे मुर्गी चारे की लागत काफी बढ़ गई है और पूरे देश में पोल्ट्री उत्पादकों पर भारी दबाव पड़ गया है. पोल्ट्री उद्योग ने बढ़ती उत्पादन लागत और आने वाले महीनों में चिकन की खपत कम होने की आशंका को देखते हुए उत्पादन में 25 प्रतिशत की तुरंत कटौती करने का फैसला लिया है. इसके साथ ही देशभर में पैरेंट ब्रीडर स्टॉक्स की कटाई (culling) शुरू कर दी गई है. पहले जो ब्रीडर पक्षी करीब 140 रुपये प्रति पक्षी बिकते थे, अब उन्हें लगभग 65 रुपये प्रति पक्षी के भाव पर बेचा जा रहा है, ताकि अतिरिक्त स्टॉक को कम किया जा सके.
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इस वजह से बढ़ीं सोयाबीन की कीमतें
उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा है कि सोयाबीन की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण जमाखोरी और सट्टेबाजी है, जबकि देश में इसकी घरेलू उत्पादन क्षमता जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. उन्होंने यह भी बताया कि जब NAFED के पास मौजूद सोयाबीन स्टॉक की बिक्री हो रही थी, तब कुछ स्टॉकिस्टों के एक छोटे समूह ने कथित तौर पर सट्टेबाजी के जरिए कीमतों को बढ़ा दिया. इस मुद्दे को अब केंद्र सरकार के सामने उठाया जाएगा, ताकि इस पर कार्रवाई की जा सके.
सोयाबीन मील के आयात की अनुमति देने की मांग
पोल्ट्री उद्योग संगठनों ने एक बार फिर सरकार से मांग की है कि चारे की कीमतों को स्थिर करने के लिए जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) सोयाबीन मील के आयात की अनुमति दी जाए. उद्योग का कहना है कि अगर समय पर जरूरी कदम, खासकर GM सोयाबीन मील के आयात की अनुमति दी जाती है, तो पोल्ट्री किसानों को राहत मिलेगी और पूरे सेक्टर में स्थिरता बनी रहेगी.