Chaitra Navratri: नवरात्रि के चौथे दिन इस तरह करें मां कुष्मांडा की पूजा, जानें सही विधि और जरूरी सामग्री

Navratri Special: नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा को समर्पित होता है, जिन्हें सृष्टि की आदिशक्ति माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और सही भोग अर्पित करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. अगर आप भी मां कुष्मांडा की कृपा पाना चाहते हैं, तो जानें उनकी सही पूजा विधि, मंत्र और प्रिय भोग.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 21 Mar, 2026 | 10:30 PM

Chaitra Navratri Day 4: चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा को समर्पित होता है. मान्यता है कि मां कुष्मांडा ने अपनी एक मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है. गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी के अनुसार, नवरात्रि के इस दिन उनकी विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

मां कुष्मांडा का दिव्य स्वरूप

ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी के अनुसार, मां कुष्मांडा का रूप अत्यंत शांत, सौम्य और तेजस्वी माना जाता है. उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं. वे सिंह पर सवार रहती हैं और उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुष्मांडा सूर्य मंडल के मध्य में निवास करती हैं और समस्त सृष्टि का संचालन करती हैं. मां कुष्मांडा की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से रोग, शोक और कष्ट दूर होते हैं.

ऐसा माना जाता है कि उनकी कृपा से आयु बढ़ती है, यश की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. नवरात्रि के चौथे दिन उनकी आराधना करने से मानसिक शांति और ऊर्जा भी मिलती है.

पूजा के लिए जरूरी सामग्री

मां कुष्मांडा की पूजा के लिए कुछ खास सामग्री का उपयोग किया जाता है. इसमें कलावा, कुमकुम, अक्षत, घी, धूप, चंदन, तिल, पीले फूल, पीले वस्त्र और पीले रंग की मिठाइयां शामिल हैं. पीला रंग मां को विशेष प्रिय माना जाता है, इसलिए इस दिन पीले रंग का अधिक महत्व होता है.

मां कुष्मांडा की पूजा विधि

  • नवरात्रि के चौथे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ और संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें.
  • सबसे पहले घर में स्थापित कलश की पूजा करें, उसके बाद मां कुष्मांडा का ध्यान करें.
  • पूजा शुरू करते समय हाथ में फूल लेकर देवी को प्रणाम करें और उनके मंत्र का जाप करें.
  • इसके बाद पंचामृत से स्नान कराएं और घी का दीपक जलाएं.
  • देवी को लाल फूल अर्पित करें, कुमकुम और चंदन का तिलक लगाएं.
  • फिर फल और मिठाई का भोग लगाकर ‘ॐ कुष्माण्डायै नमः’ मंत्र का जाप करें.
  • अंत में आरती करके क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद सभी में बांट दें.

मां कुष्मांडा को क्या भोग लगाएं

मां कुष्मांडा को पीले रंग की मिठाइयां बेहद प्रिय होती हैं. इस दिन केसर पेठा, केसरिया हलवा, मालपुआ, बताशे और दही का भोग लगाया जाता है. व्रत रखने वाले लोग सिंघाड़े के आटे या आलू से बने हलवे का प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं. इससे मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं.

नवरात्रि का चौथा दिन भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. मां कुष्मांडा की पूजा से जीवन में खुशहाली, शांति और समृद्धि आती है. अगर इस दिन सच्चे मन से पूजा की जाए, तो मां अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं.

 

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 21 Mar, 2026 | 10:30 PM
ज्ञान का सम्मान क्विज

किस फसल को सफेद सोना कहा जाता है?

सवाल का दीजिए सही जवाब और जीतिए ₹1000 का इनाम! 🏆
पिछले Quiz का सही जवाब
गेहूं को फसलों का राजा कहा जाता है.
विजेताओं के नाम
नसीम अंसारी, देवघर, झारखंड.
रमेश साहू, रायपुर, छत्तीसगढ़

लेटेस्ट न्यूज़