कम उत्पादन की चिंता के बीच कपास किसानों को रोगों का खतरा, कॉटन संस्थान की एडवाइजरी जारी

Cotton Crops Diseases : अल नीनो की वजह से कम बारिश ने कपास की बुवाई घटा दी है. अब फसल पर कई तरह के रोगों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है. केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान ने किसानों को फसल सुरक्षा के लिए सलाह जारी की है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 28 Aug, 2026 | 08:26 PM

कपास की खेती करने वाले किसान अल नीनो स्थितियों से उपज सूखे के हालातों से जूझ रहे हैं. ऐसे में उन्हें कम उत्पादन और सिंचाई खर्च बढ़ने की चिंता सता रही है. अब कपास फसल पर कई तरह के रोगों के फैलने का खतरा मंडराने लगा है. केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान ने झुलसा रोग, कॉटन लीफ कर्ल वायरस और बॉल रॉट का खतरा बताया है. संस्थान ने कपास किसानों को फसल सुरक्षा के उपाय भी बताए हैं.

खरीफ सीजन की बुवाई अब लगभग पूरी होने वाली है और कपास की खेती का कुल रकबा बढ़ने की बजाय पिछले साल की तुलना में करीब 20 हजार हेक्टेयर घट गया है. 27 अगस्त तक देश में कपास की बुवाई 108.45 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है. पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 108.73 लाख हेक्टेयर था. यानी इस बार रकबे में गिरावट आई है. महाराष्ट्र और राजस्थान में कपास का रकबा घटा है, लेकिन तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश में क्षेत्र बढ़ा है.

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कपास की बुवाई

महाराष्ट्र देश में सबसे ज्यादा कपास उगाने वाला राज्य है, यहां 21 अगस्त तक कपास की बुवाई 38.22 लाख हेक्टेयर में हुई है. पिछले साल इसी समय यह क्षेत्र 38.37 लाख हेक्टेयर था, यानी यहां मामूली गिरावट आई है. राजस्थान में रकबे में ज्यादा कमी देखने को मिली है. इस बार राज्य में 5.38 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 6.44 लाख हेक्टेयर था, यानी करीब 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

सितंबर की बारिश फसल और किसानों दोनों के लिए जरूरी

रकबा घटने के साथ ही अल नीनो की वजह से कम बारिश के चलते फसल की ग्रोथ की रफ्तार धीमी देखी गई है. वहीं, सूखा स्थितियों के चलते किसानों पर सिंचाई के रूप में खर्च बढ़ गया है. ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि सितंबर में अच्छी बारिश होना फसल और किसान दोनों के लिए बहुत जरूरी है. किसानों के लिए सितंबर की बारिश काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले दिनों का मौसम फसल की पैदावार तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा.

कपास अनुसंधान संस्थान ने कई रोगों को प्रकोप की चेतावनी दी

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (ICAR-CICR) ने अपनी सलाह में कहा है कि इस समय कपास की फसल में इस समय बैक्टीरियल ब्लाइट (झुलसा), कॉटन लीफ कर्ल वायरस भी प्रमुख समस्या के रूप में देखा जा रहा है. इसके साथ ही बारिश और अधिक नमी वाले मौसम में बॉल रॉट (टिंडे की सड़न) का खतरा बढ़ रहा है. संस्थान के अनुसार उत्तरी कपास क्षेत्र में हाल की परिस्थितियों में बॉल रॉट और अन्य रोगों की समस्या पर विशेष निगरानी की सलाह दी गई है.

किसान इन उपायों को अपनाकर बचाएं फसल

केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (ICAR-CICR) ने किसानों को इन बीमारियों से फसल बचाने के उपाय बताए हैं. बचाव के लिए किसानों को खेत में जलभराव नहीं होने देना, संक्रमित पत्तियों और पौधों की नियमित निगरानी करना तथा खेत और आसपास के क्षेत्र को खरपतवार से मुक्त रखना चाहिए. रोग की शुरुआत दिखाई देते ही कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग की सलाह से ही अनुशंसित फफूंदनाशी/जीवाणुनाशी का प्रयोग करें और दवा की मात्रा लेबल के अनुसार रखें. ICAR ने कपास में रोग प्रबंधन के लिए प्रतिरोधी/सहनशील किस्मों, बीज उपचार और ट्राइकोडर्मा जैसे जैव-एजेंटों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है.

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