कर्नाटक में सुपारी का रकबा बढ़ा, लेकिन घट गई पैदावार.. सरकारी आंकड़ों में चौंकाने वाला खुलासा

कर्नाटक में पिछले पांच वर्षों में सुपारी की खेती का रकबा बढ़ा है, लेकिन पैदावार और उत्पादन में गिरावट आई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में खेती का क्षेत्रफल 32 फीसदी बढ़ा, जबकि प्रति हेक्टेयर उत्पादन 37 फीसदी घट गया. जानिए किन जिलों में गिरावट सबसे ज्यादा रही और केंद्र सरकार सुपारी फसल बचाने के लिए क्या कदम उठा रही है.

नोएडा | Updated On: 5 Aug, 2026 | 12:33 PM

कर्नाटक में पिछले पांच वर्षों के दौरान सुपारी की खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसकी पैदावार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. लोकसभा में केंद्र सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में राज्य में 6.03 लाख हेक्टेयर में सुपारी की खेती होती थी, जो 2025-26 (दूसरे अग्रिम अनुमान) में बढ़कर 7.99 लाख हेक्टेयर हो गई. यानी करीब 32 प्रतिशत रकबा बढ़ा. हालांकि, इसी अवधि में प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 2.24 टन से घटकर 1.42 टन रह गया, जो करीब 37 प्रतिशत की गिरावट है. पैदावार घटने का असर कुल उत्पादन पर भी पड़ा है.

साल 2021-22 में कर्नाटक में 13.5 लाख टन सुपारी का उत्पादन  हुआ था, जो अगले साल घटकर 10.2 लाख टन रह गया. बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और 2025-26 के अनुमान के अनुसार उत्पादन 11.3 लाख टन तक पहुंचा, लेकिन यह अब भी पांच साल पहले के स्तर से करीब 16 प्रतिशत कम है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में कहा कि सुपारी की पैदावार घटने के बावजूद कर्नाटक देश का सबसे बड़ा सुपारी उत्पादक राज्य बना हुआ है. पिछले पांच वर्षों में देश के कुल सुपारी रकबे का करीब 71.56 फीसदी और कुल उत्पादन का 75.47 फीसदी हिस्सा अकेले कर्नाटक का रहा.

पैदावार में गिरावट का रुझान साफ दिख रहा है

जिला स्तर के आंकड़ों से भी पैदावार में गिरावट  का रुझान साफ दिखता है. राज्य के सबसे बड़े सुपारी उत्पादक जिले शिवमोग्गा में 2021-22 के 1.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 1.35 लाख हेक्टेयर में खेती हुई. लेकिन इस दौरान प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2.13 टन से घटकर 1.11 टन रह गया. इसका असर कुल उत्पादन पर भी पड़ा, जो 2.38 लाख टन से घटकर 1.50 लाख टन के आसपास रह गया, जबकि खेती का रकबा बढ़ा था.

सुपारी उत्पादक जिलों में भी खेती का रकबा बढ़ा

खास बात यह है कि कर्नाटक के प्रमुख सुपारी उत्पादक जिलों में भी खेती का रकबा बढ़ा है, लेकिन पैदावार और कुल उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है. दक्षिण कन्नड़ जिले में सुपारी का रकबा 1.02 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.08 लाख हेक्टेयर हो गया, लेकिन प्रति हेक्टेयर पैदावार 2.70 टन से घटकर 1.31 टन रह गई. इससे उत्पादन 2.75 लाख टन से घटकर 1.41 लाख टन हो गया. उडुपी जिले में भी प्रति हेक्टेयर उत्पादन 3.12 टन से घटकर 1.50 टन रह गया. यहां कुल उत्पादन 72,430 टन से घटकर 39,859 टन हो गया, जबकि खेती का रकबा थोड़ा बढ़ा. वहीं उत्तर कन्नड़ जिले में रकबा 32,698 हेक्टेयर से बढ़कर 39,354 हेक्टेयर हुआ, लेकिन पैदावार 2.90 टन से घटकर 1.50 टन प्रति हेक्टेयर रह गई. इसके कारण उत्पादन 94,823 टन से घटकर 59,031 टन पर आ गया.

सुपारी उत्पादन में गिरावट का एक जैसा असर नहीं दिखा

कर्नाटक के सभी जिलों में सुपारी उत्पादन में गिरावट का एक जैसा असर नहीं दिखा. चिक्कमगलुरु जिले में हालिया अनुमान के अनुसार उत्पादन बढ़ा है, जबकि पैदावार में ज्यादा बदलाव नहीं आया. वहीं हावेरी और हासन जैसे जिलों में पिछले पांच वर्षों के दौरान खेती का रकबा  और उत्पादन दोनों बढ़े हैं. लोकसभा में दिए गए जवाब में सुपारी की पैदावार घटने के स्पष्ट कारण नहीं बताए गए हैं. हालांकि, केंद्र सरकार सुपारी फसल को बचाने के लिए कई योजनाएं चला रही है. इसके तहत लीफ स्पॉट रोग, फल सड़न रोग और जड़ कीट नियंत्रण, नई बौनी संकर किस्मों को बढ़ावा देने, मिश्रित खेती और मौसम आधारित रोग पूर्वानुमान जैसे कार्यक्रम शामिल हैं.

 

Published: 5 Aug, 2026 | 12:31 PM

Topics: