मॉनसून ने बढ़ाई चिंता! 12 राज्यों में 20 फीसदी से ज्यादा बारिश की कमी, धान-मक्का की खेती पिछड़ी

Monsoon Rainfall Deficit: अगस्त में कई इलाकों में अच्छी बारिश के बावजूद देश में मॉनसून की कुल कमी बढ़कर करीब 14 फीसदी हो गई है. इसका असर खरीफ बुवाई पर पड़ा है. धान का रकबा 3 फीसदी से ज्यादा और मक्का की बुवाई 4 फीसदी से अधिक घट गई है.

नोएडा | Published: 30 Aug, 2026 | 08:45 AM

Monsoon Deficit: देश के कई हिस्सों में अगस्त के दौरान अच्छी बारिश हुई, लेकिन इससे इस साल मॉनसून की कुल कमी पूरी नहीं हो सकी. जून से अब तक देश में बारिश सामान्य से करीब 14 फीसदी कम रही है. जुलाई के अंत में यह कमी करीब 13 फीसदी थी, जो अगस्त के अंत तक बढ़कर लगभग 14 फीसदी हो गई. इसकी बड़ी वजह बिहार, आंध्र प्रदेश, पंजाब और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में कम बारिश रही. बारिश की इस असमान स्थिति का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी दिखाई दे रहा है.

खासकर धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में कम है. इससे आगे चलकर खेती के साथ-साथ एथनॉल उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ी

इस साल सभी खरीफ फसलों को मिलाकर बुवाई का रकबा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 2 फीसदी कम है. जुलाई के अंत में यह अंतर लगभग 3 फीसदी था. यानी अगस्त में कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन बुवाई पिछले साल के स्तर तक नहीं पहुंच पाई. बारिश का सही समय पर और समान रूप से नहीं होना इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है. जुलाई और अगस्त दोनों महीनों में कई क्षेत्रों में बारिश कभी ज्यादा तो कभी काफी कम हुई. इससे किसानों के लिए फसल लगाने का समय तय करना मुश्किल रहा.

धान की खेती में 3 फीसदी से ज्यादा कमी

धान खरीफ सीजन की सबसे अहम फसलों में से एक है. इस बार इसका बुवाई क्षेत्र पिछले साल की तुलना में 3 फीसदी से ज्यादा कम बताया गया है. मॉनसून की कमजोर और असमान बारिश का सीधा असर धान की खेती पर पड़ा है. धान की बुवाई में कमी का असर आगे चलकर उत्पादन पर भी पड़ सकता है. हालांकि अंतिम उत्पादन कितना रहेगा, यह आने वाले दिनों में बारिश और फसल की स्थिति पर काफी निर्भर करेगा.

मक्का की बुवाई भी घटी, एथनॉल पर असर की चिंता

मक्का का रकबा भी पिछले साल के मुकाबले 4 फीसदी से ज्यादा कम है. मक्का देश में एथनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल में शामिल है. ऐसे में अगर मक्का की उपलब्धता कम रहती है तो एथनॉल उद्योग को दूसरे स्रोतों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है. इससे गन्ने को एथनॉल उत्पादन के लिए ज्यादा इस्तेमाल करने का दबाव बढ़ सकता है.

12 राज्यों में 20 फीसदी से ज्यादा बारिश की कमी

देश में बारिश की स्थिति हर जगह एक जैसी नहीं रही. 12 राज्यों में 1 जून से अब तक बारिश सामान्य से 20 फीसदी से भी ज्यादा कम रही है. बिहार, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर के मेघालय, मणिपुर तथा अरुणाचल प्रदेश में स्थिति और गंभीर रही. इन राज्यों में इस अवधि की कुल बारिश में 40 फीसदी से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है.

दक्षिण भारत में भी कमजोर रहा मॉनसून

दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय हिस्से में भी बारिश की कमी चिंता बढ़ा रही है. यहां अब तक संचयी बारिश सामान्य से 23 फीसदी से अधिक कम रही है. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल के कई हिस्सों में मॉनसून सीजन का बड़ा हिस्सा सूखा रहा. मौसम विभाग ने अगले सप्ताह भी प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने का अनुमान जताया है. इससे इन क्षेत्रों में बारिश की कमी जल्द पूरी होने की संभावना कम दिखाई दे रही है.

पूर्वी भारत में अगले कुछ दिन बारिश के आसार

हालांकि पूर्वी भारत के लिए आने वाले कुछ दिन राहत दे सकते हैं. मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. गंगीय पश्चिम बंगाल में रविवार, झारखंड में सोमवार और ओडिशा में 1 सितंबर तक भारी बारिश की संभावना है. इससे पूर्वी राज्यों में बारिश की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है, लेकिन पूरे देश के स्तर पर मॉनसून की कमी पर इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है.

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