बारिश के इंतजार में गुजरात के किसान, सौराष्ट्र के 9 जिलों में सूखे जैसे हालात.. खरीफ बुवाई प्रभावित

गुजरात में कमजोर मॉनसून के कारण अब तक 83 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है. सौराष्ट्र के कई जिलों में हालात गंभीर बने हुए हैं. कपास और मूंगफली की सीमित बुवाई के बीच किसानों को फसल नुकसान का खतरा सताने लगा है, जबकि मुआवजा भुगतान लगातार बढ़ रहा है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 17 Jun, 2026 | 12:45 PM

Gujarat Agriculture News: पानी के अभाव में गुजरात के किसान समय पर फसल की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं. कमजोर मॉनसून की वजह से राज्य में औसत से काफी कम बारिश हुई है. राज्य में अब तक 83 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है. सौराष्ट्र क्षेत्र में हालात और भी गंभीर हैं, जहां नौ जिलों में बारिश की कमी 100 फीसदी तक पहुंच गई है. इससे साफ है कि इस बार मॉनसून की शुरुआत काफी असमान और कमजोर रही है. इसके बावजूद राज्य के कुछ हिस्सों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो गई है.

अब तक किसानों ने करीब 4.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की है, जो सामान्य खरीफ क्षेत्र का लगभग 5 फीसदी है. इसमें मुख्य रूप से कपास और मूंगफली की खेती की गई है. हालांकि अगर बारिश में और देरी होती है तो पहले से बोई गई फसलों को नमी  की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

मुआवजे पर कुल 22,733 करोड़ रुपये हुए खर्च

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कमजोर मॉनसून की शुरुआत गुजरात की कृषि पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर को भी दिखाती है. सरकार के मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2016 से 2026 के बीच राज्य में फसल नुकसान के मुआवजे के रूप में कुल 22,733 करोड़ रुपये की राशि दी गई है. यह नुकसान मुख्य रूप से बेमौसम बारिश, भारी वर्षा और चक्रवात जैसी मौसमी घटनाओं के कारण हुआ है. पिछले वर्षों में राहत राशि में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है. FY16 में यह 279 करोड़ रुपये थी, जो FY21 में बढ़कर 2,906 करोड़ रुपये पहुंच गई.

वहीं FY26 में यह राशि रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर 10,337 करोड़ रुपये हो गई, जो दर्शाता है कि हाल के वर्षों में मौसम से जुड़ी घटनाओं के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है. यह पैटर्न दिखाता है कि अब मौसम की मार अलग-अलग घटनाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि हर फसल चक्र में बार-बार होने वाली समस्या बन गई हैं. इससे किसानों पर जोखिम बढ़ रहा है और राज्य पर आर्थिक दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है.

कपास और मूंगफली की खेती

किसान खासकर मॉनसून की शुरुआत और बारिश के समय पर निर्भर रहते हैं. अगर बारिश में थोड़ी भी देरी होती है तो कपास और मूंगफली जैसी फसलों के अंकुरण और उत्पादन पर असर पड़ सकता है. अब तक गुजरात में किसानों ने 2.39 लाख हेक्टेयर में कपास और 1.36 लाख हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई की है. ये दोनों राज्य की प्रमुख खरीफ फसलें हैं.

1.36 करोड़ किसानों को फसल नुकसान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में गुजरात के करीब 1.36 करोड़ किसानों को फसल नुकसान के लिए सहायता दी गई है. यह संख्या अलग-अलग सालों के कुल लाभार्थियों को मिलाकर है, जिसमें कई किसान कई बार भी शामिल हैं. इस अवधि में (FY16 से FY26 तक) कुल 22,733 करोड़ रुपये की राहत राशि दी गई, जिसमें से करीब 46 फीसदी यानी बड़ा हिस्सा सिर्फ FY26 में ही वितरित किया गया. इससे साफ है कि हाल के सालों में फसल नुकसान की गंभीरता पहले से ज्यादा बढ़ गई है. राहत राशि में से 15,829 करोड़ रुपये राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के जरिए दिए गए, जबकि 6,904 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने अपने बजट से किसानों की मदद के लिए खर्च किए.

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Published: 17 Jun, 2026 | 12:44 PM

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