सरसों और आलू के बाद मार्च में लगाएं ये फसलें, कम समय में होगी अच्छी कमाई

मार्च का महीना जायद सीजन की फसलों की बुवाई के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. इस समय मौसम गर्मियों की ओर बढ़ रहा होता है और मिट्टी में नमी भी बनी रहती है. ऐसे में कई सब्जी और फल वाली फसलें कम समय में तैयार होकर अच्छा उत्पादन देती हैं.

नई दिल्ली | Published: 5 Mar, 2026 | 11:55 AM

देश के कई हिस्सों में इस समय सरसों और आलू जैसी रबी फसलों की कटाई का काम लगभग पूरा होने लगता है. इसके बाद कई किसानों के खेत कुछ समय के लिए खाली रह जाते हैं. अगर किसान सही योजना बनाएं तो यही खाली खेत अतिरिक्त कमाई का अच्छा जरिया बन सकता है.

मार्च का महीना जायद सीजन की फसलों की बुवाई के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. इस समय मौसम गर्मियों की ओर बढ़ रहा होता है और मिट्टी में नमी भी बनी रहती है. ऐसे में कई सब्जी और फल वाली फसलें कम समय में तैयार होकर अच्छा उत्पादन देती हैं.

सरकारी वेबसाइट ppqs.gov.in के अनुसार, यदि किसान इस समय खीरा, ककड़ी, भिंडी, तरबूज, लौकी, करेला, तोरई और लोबिया जैसी फसलों की खेती करें तो कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. गर्मियों में इन सब्जियों और फलों की मांग ज्यादा रहती है, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है.

खीरा और ककड़ी से जल्दी मिलती है आमदनी

मार्च का मौसम खीरा और ककड़ी की खेती के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. आलू या सरसों की कटाई के बाद खेत में मौजूद नमी इनके बीजों के अंकुरण में मदद करती है. अगर किसान इन्हें मेड़ों पर बोते हैं तो पौधे तेजी से बढ़ते हैं और लगभग 45 से 50 दिनों में फल देना शुरू कर देते हैं. गर्मियों में खीरा और ककड़ी की मांग काफी बढ़ जाती है, इसलिए किसान इन्हें बेचकर अच्छी आमदनी कर सकते हैं.

लौकी और कद्दू भी हैं फायदेमंद विकल्प

लौकी और कद्दू भी जायद सीजन की भरोसेमंद फसलें मानी जाती हैं. इनकी खेती के लिए खेत की अच्छी जुताई करके उसमें गोबर की खाद डालना जरूरी होता है. मार्च के मध्य तक इनकी बुवाई कर देने से पौधे अच्छी तरह विकसित होते हैं और उत्पादन भी ज्यादा मिलता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान हाइब्रिड बीजों का उपयोग करें तो उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं.

भिंडी की खेती से मिल सकता है अच्छा लाभ

भिंडी ऐसी सब्जी है जिसकी बाजार में सालभर मांग रहती है. मार्च में इसकी बुवाई करने से पौधे जल्दी बढ़ते हैं और फल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है. इसकी खेती करते समय बीजों को कतारों में और उचित दूरी पर बोना जरूरी होता है. लगभग 60 दिनों में यह फसल तैयार हो जाती है. नियमित सिंचाई और समय पर कीट नियंत्रण करने से किसान अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

करेला और तोरई के लिए मचान तकनीक बेहतर

करेला और तोरई की खेती में मचान विधि काफी कारगर मानी जाती है. इस तकनीक में पौधों को सहारा देने के लिए ऊपर जाली या तार का ढांचा बनाया जाता है. इससे पौधे जमीन से ऊपर रहते हैं और फल खराब होने का खतरा कम हो जाता है. मार्च में बोई गई यह फसल गर्मियों में लगातार उत्पादन देती है, जिससे किसानों को लंबे समय तक आय मिलती रहती है.

तरबूज और खरबूजा बन सकते हैं नकदी फसल

अगर खेत की मिट्टी रेतीली या दोमट है तो किसान तरबूज और खरबूजे की खेती कर सकते हैं. गर्मियों में इन फलों की मांग काफी ज्यादा रहती है. सही समय पर सिंचाई, उन्नत किस्म के बीज और पौधों की देखभाल से इनकी पैदावार अच्छी होती है. कई किसान इन फसलों की खेती से एक ही सीजन में अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं.

लोबिया से मिट्टी भी मजबूत और कमाई भी

लोबिया की खेती किसानों के लिए दोहरा फायदा देती है. यह फसल न सिर्फ बाजार में अच्छी कीमत दिलाती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है. लोबिया कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ जाती है और जल्दी तैयार हो जाती है. इसलिए जायद सीजन में इसे एक बेहतर विकल्प माना जाता है.

पालक और मूली से भी मिल सकता है फायदा

मार्च में गर्मी सहने वाली पालक और मूली की किस्मों की खेती करके किसान ऑफ-सीजन का फायदा उठा सकते हैं. जब बाजार में इनकी उपलब्धता कम होती है तब इनकी कीमत बढ़ जाती है. कम समय में तैयार होने वाली ये फसलें किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का अच्छा जरिया बन सकती हैं.

सही तकनीक से बढ़ेगा मुनाफा

अगर किसान सही समय पर बुवाई, उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक और उचित सिंचाई तकनीक अपनाएं तो जायद सीजन की खेती से अच्छा लाभ कमा सकते हैं. खाली खेत को खाली छोड़ने की बजाय इन फसलों की खेती करने से किसानों की आय बढ़ सकती है और खेती ज्यादा लाभदायक बन सकती है.

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