केला, आम और मखाना से बदलेगी किस्मत, 100 करोड़ की योजना को मिली मंजूरी

बागवानी क्षेत्र में नई योजना से किसानों को बड़ा फायदा मिलने जा रहा है. हजारों किसानों को आधुनिक खेती, बेहतर भंडारण और बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा. इस पहल से फसलों की गुणवत्ता बढ़ेगी और आय में सुधार होगा. किसानों को तकनीक और सुविधाओं के जरिए नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

नोएडा | Updated On: 27 Jun, 2026 | 07:02 PM

Horticulture Cluster: बागवानी क्षेत्र से जुड़े बिहार के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) ने दरभंगा और मधुबनी जिलों को शामिल करते हुए मिथिला मल्टी-कमोडिटी हॉर्टिकल्चर क्लस्टर को मंजूरी दे दी है. करीब 100 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य केला, आम, लीची और मखाना जैसी प्रमुख फसलों का उत्पादन बढ़ाना, आधुनिक कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराना और किसानों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है. ये योजना क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (CDP) 2021 के तहत लागू की जाएगी.

किसानों को सीधा लाभ और क्षेत्र का विस्तार

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार, इस परियोजना के तहत करीब 15,100 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास किया जाएगा, जिससे लगभग 19,200 किसानों को सीधा लाभ मिलेगा. योजना में केला और आम मुख्य फसलें होंगी, जबकि लीची और मखाना को भी शामिल किया गया है. सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती से लेकर प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है. इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा, बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और कृषि क्षेत्र में नई रोजगार संभावनाएं भी बढ़ेंगी. यह योजना किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी क्षेत्र को नई मजबूती देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.

98.80 करोड़ रुपये का निवेश और आधुनिक सुविधाएं

इस परियोजना पर कुल 98.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसमें 38.40 करोड़ रुपये उत्पादन बढ़ाने और प्री-प्रोडक्शन गतिविधियों पर लगाए जाएंगे. वहीं 42.50 करोड़ रुपये पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन और वैल्यू एडिशन पर खर्च होंगे. इसके अलावा 17.90 करोड़ रुपये लॉजिस्टिक्स, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर उपयोग  किए जाएंगे. किसानों को हाई-टेक नर्सरी, टिश्यू कल्चर लैब, प्लांट हेल्थ क्लिनिक, ड्रिप सिंचाई, हाई डेंसिटी प्लांटिंग, 26 इंटीग्रेटेड पैक हाउस, 4,500 मीट्रिक टन क्षमता का कोल्ड स्टोरेज, राइपनिंग चैंबर, रीफर वाहन और डिजिटल मार्केटिंग जैसी सुविधाएं दी जाएंगी.

ब्रांडिंग, रोजगार और आगे की प्रक्रिया

इस परियोजना के तहत बिहार के बागवानी उत्पादों  को नॉर्थ बिहार फ्रूट बास्केट ब्रांड नाम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दी जाएगी. इससे आम, केला, लीची और मखाना जैसे उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी. इस योजना से छोटे किसान, महिला स्वयं सहायता समूह, युवा उद्यमी और FPO को सबसे अधिक लाभ मिलेगा. इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है. अब बिहार हॉर्टिकल्चर मिशन और NHB के बीच MoA होगा और इसके बाद RFP प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा.

Published: 27 Jun, 2026 | 10:00 PM

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