गेहूं पर भावांतर लागू करने की मांग पर किसान लामबंद, समर्थन में उतरी कांग्रेस

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि अब सरकार मध्य प्रदेश के कुल गेहूं उत्पादन का सिर्फ 30 फीसदी से 35 फीसदी ही खरीदने की बात कर रही है, जिससे किसानों को बाकी 65 फीसदी गेहूं खुले बाजार में कम दामों पर बेचना पड़ेगा. उन्होंने मांग की कि ऐसे में सरकार को ‘भावांतर’ की राशि देनी चाहिए.

नोएडा | Updated On: 9 May, 2026 | 04:23 PM

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी किसानों के समर्थन में आ गई है. कांग्रेस ने किसानों के मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसानों के साथ मिलकर मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे-3 को जाम कर दिया. वहीं, प्रदर्शन के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि सरकार मध्य प्रदेश के कुल गेहूं उत्पादन का सिर्फ 30 फीसदी से 35 फीसदी ही खरीदने की बात कर रही है, जिससे किसानों को बाकी 65 फीसदी गेहूं खुले बाजार में कम दामों पर बेचना पड़ेगा. उन्होंने मांग की कि ऐसे में सरकार को ‘भावांतर’ की राशि देनी चाहिए.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश के 97 फीसदी से ज्यादा किसान कर्ज के बोझ में दबे हुए हैं. उन्होंने कहा कि हर साल किसान खाद और बीज की कमी और परेशानी से जूझते हैं.  उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 15 सालों में किसानों की जमीन परियोजनाओं के लिए ली गई, लेकिन भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार चार गुना मुआवजा नहीं दिया गया.

क्या है गेहूं का MSP

जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा ने गेहूं के लिए 2700 रुपये प्रति क्विंटल, धान के लिए 3100 रुपये और सोयाबीन के लिए 6000 रुपये देने का वादा किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार से इन मुद्दों पर सवाल किया जाता है, तो वे पिछली कांग्रेस सरकारों की बात करने लगते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मोहन यादव सरकार ने 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया है और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों की आय  आठ गुना बढ़ने का दावा करते हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि किसान परेशान हैं.

100 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य

कांग्रेस ने मांग की है कि भावांतर योजना के तहत किसानों को MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और बाजार कीमत के बीच का अंतर दिया जाना चाहिए. वर्तमान में राज्य में गेहूं की खरीद MSP 2625 रुपये प्रति क्विंटल पर हो रही है, जिसमें 2585 रुपये केंद्र सरकार देती है और 40 रुपये राज्य सरकार बोनस के रूप में जोड़ती है. मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद MSME मंत्री चैतन्य कश्यप ने कहा था कि इस साल सरकार 100 लाख टन गेहूं की खरीद करेगी, जो पिछले साल से 20 लाख टन ज्यादा है. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक 41 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जिस पर लगभग 6520 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.

हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस पर किया पलटवार

वहीं, राज्य भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस के नेशनल हाईवे जाम को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इस तरह का सड़क जाम केवल राजनीतिक फायदे के लिए किया गया है और इससे आम जनता को परेशान होना पड़ता है, यहां तक कि एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाएं भी प्रभावित होती हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को किसानों के मुद्दों पर आंदोलन करने का नैतिक अधिकार नहीं है. उनके अनुसार, मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पूरी गंभीरता से किसानों से गेहूं की पूरी फसल खरीद रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने झूठे कर्ज माफी के वादों से किसानों को डिफॉल्टर बना दिया था. खंडेलवाल ने कांग्रेस से यह भी सवाल किया कि 2003-04 में गेहूं का समर्थन मूल्य कितना था और क्या दिग्विजय सिंह की सरकार ने उस समय किसानों से उसी दर पर खरीद की थी.

Published: 9 May, 2026 | 03:37 PM

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