यूरिया की कीमत बढ़ी, लेकिन किसान की जेब खाली नहीं! जानें Economic Survey 2026 में क्या बदलाव दिखे
Economic Survey 2026: सरकारी आर्थिक सर्वे में 2026 में उर्वरक और कृषि सुधार पर जोर दिया गया है. सर्वे के मुताबिक, यूरिया की कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी और किसानों के बैंक खातों में सीधे लाभ देने से फसल और मिट्टी का संतुलन बेहतर होगा. किसानों को संतुलित उर्वरक इस्तेमाल करने का फायदा मिलेगा. साथ ही, रबी की बुवाई अच्छी रही है और ग्रामीण आमदनी बढ़ेगी.
Economic Survey 2026: हाल ही में संसद में पेश हुए आर्थिक सर्वे 2026 में कृषि क्षेत्र के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव और आंकड़े सामने आए हैं. इसमें खास तौर पर यूरिया की अधिक खपत पर चिंता जताई गई है और इसे कंट्रोल करने के लिए नया तरीका सुझाया गया है.
यूरिया की कीमत और डायरेक्ट ट्रांसफर
सर्वे के मुताबिक यूरिया के दाम में हल्की बढ़ोतरी करने का सुझाव दिया गया है. इसके साथ ही किसानों के बैंक अकाउंट में प्रति एकड़ डायरेक्ट ट्रांसफर की योजना भी होगी. इसका मतलब ये है कि किसान की खरीदने की क्षमता वैसे ही बनी रहेगी, लेकिन यूरिया की सापेक्ष कीमत उसकी सही खेती लागत के करीब आएगी. इससे किसानों का व्यवहार प्राकृतिक रूप से बदल जाएगा और मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन भी बना रहेगा.
अधिक उत्पादन और कम नुकसान
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अगर कोई किसान पहले से ही यूरिया का सही इस्तेमाल करता है, तो उसे पूरा लाभ मिलेगा. वहीं, जो किसान ज्यादा यूरिया इस्तेमाल करता है, उसे संतुलित खाद, मिट्टी परीक्षण, नैनो यूरिया, लिक्विड फर्टिलाइजर और जैविक खाद अपनाने का प्रोत्साहन मिलेगा. इसका सीधा फायदा मिट्टी और फसल दोनों को होगा.
भारत की डिजिटल कृषि में सुधार
सर्वे में कहा गया कि भारत की डिजिटल कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर इस तरह के सुधार को संभव बनाती है. किरायेदार किसानों के लिए भी ये बदलाव समय के साथ धीरे-धीरे लागू होंगे. पायलट प्रोजेक्ट से पहले कुछ ऐसे जिले शामिल किए जा सकते हैं जहाँ किरायेदारी ज्यादा है.
कृषि की धीमी वृद्धि और कारण
सर्वे में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की वृद्धि दर इस वित्त वर्ष में 3.1% रहने का अनुमान है, जो लंबी अवधि के औसत 4.5% से कम है. इसकी वजह हैं छोटे खेत, सीमित बाजार और भंडारण, गुणवत्ता वाले इनपुट का कम मिलना, निवेश में कमी और असमान विस्तार सेवाएं.
फसल और सहायक गतिविधियों का प्रदर्शन
फसल के लिए जो जमीन इस्तेमाल हो रही है, उसका बढ़ना लगातार नहीं हुआ, यानी कभी बढ़ा तो कभी कम हुआ. लेकिन पशुपालन और मछली पालन जैसी सहायक कामकाज में हर साल करीब 5-6% का लगातार बढ़ाव हुआ. इसका मतलब ये है कि कुल कृषि विकास, अस्थिर फसल उत्पादन और स्थिर सहायक गतिविधियों के मिलेजुले असर से बनता है.
रबी बुवाई और ग्रामीण आय
रबी फसल की बुवाई इस बार अच्छी हुई है. इसका कारण ये है कि जलाशयों में पानी भर गया, मिट्टी में नमी पर्याप्त थी और किसान के पास बीज और उर्वरक जैसी चीजें उपलब्ध थीं. इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और साल के दूसरे हिस्से में चीजों की मांग भी मजबूत रहेगी.
पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में सुधार
सर्वे में RO-PDS यानी रूट ऑप्टिमाइजेशन का भी जिक्र है. IIT दिल्ली और UN WFP के सहयोग से बनाए गए एल्गोरिदम से गोदाम और राशन दुकानों के बीच सबसे सही रास्ता चुना जाता है. इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत कम हुई और वितरण की गति बढ़ी. एक साल में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसका परीक्षण किया गया, जिससे सालाना लगभग ₹250 करोड़ की बचत हुई.
आर्थिक सर्वे 2026 में किसानों के लिए साफ संदेश है, यूरिया के सही इस्तेमाल, संतुलित खाद और डिजिटल उपाय अपनाने से ना केवल मिट्टी और फसल सुरक्षित रहेंगे बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी. साथ ही कृषि क्षेत्र में छोटे सुधार और तकनीकी अपनाने से लंबी अवधि में स्थिर विकास सुनिश्चित होगा.