गेहूं-धान छोड़ पपीते की खेती में किसानों की एंट्री, रेड लेडी किस्म से 6 महीने में मोटी कमाई!
किसान अब पारंपरिक फसलों को छोड़कर पपीते की एक खास किस्म की खेती की ओर बढ़ रहे हैं. कम समय में तैयार होने वाली इस फसल से अच्छा उत्पादन और बेहतर दाम मिल रहा है. कम लागत और जल्दी कमाई की वजह से यह खेती किसानों के लिए फायदेमंद विकल्प बनती जा रही है.
Papaya Farming: खेती अब सिर्फ परंपरा नहीं, कमाई का स्मार्ट तरीका बनती जा रही है. पहले किसान गेहूं-धान तक सीमित रहते थे, लेकिन अब सोच बदल रही है. कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलें किसानों को आकर्षित कर रही हैं. इन्हीं में पपीते की रेड लेडी किस्म (Red Lady Variety) तेजी से किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है, जो कम लागत में अच्छी कमाई का मौका दे रही है.
पारंपरिक खेती से हटकर नई राह पर किसान
आज के समय में किसान सिर्फ पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहना चाहते. मौसम में बदलाव, बढ़ती लागत और कम मुनाफे के कारण अब वे ऐसी फसलें चुन रहे हैं, जो जल्दी तैयार हों और अच्छा दाम दें. इसी वजह से अब किसान बागवानी वाली फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. पपीता ऐसी ही एक फसल है, जिसकी मांग बाजार में पूरे साल बनी रहती है. इससे किसानों को अपनी आय बढ़ाने का अच्छा मौका मिल रहा है.
‘रेड लेडी’ किस्म क्यों बन रही है पहली पसंद
NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, पपीते की रेड लेडी और पूसा नन्हा किस्म इन दिनों काफी लोकप्रिय हो रही हैं. इनमें भी रेड लेडी किस्म को किसान ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें फल ज्यादा लगते हैं और बेकार मेल पौधे कम निकलते हैं. इससे उत्पादन बढ़ता है और मेहनत भी कम लगती है. हालांकि, इसमें कीटों का खतरा थोड़ा ज्यादा रहता है, लेकिन अगर किसान समय पर देखभाल करें और दवाइयों का सही इस्तेमाल करें, तो अच्छी पैदावार आसानी से मिल सकती है.
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कम जगह में ज्यादा पौधे, जल्दी शुरू होती कमाई
पपीते की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कम जमीन में भी अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है. एक कट्ठा जमीन में करीब 40 पौधे लगाए जा सकते हैं. इसके लिए जरूरी है कि खेत में पानी की निकासी अच्छी हो, ताकि पौधों की जड़ें खराब न हों. रोपाई से पहले गड्ढे तैयार करने से पौधों का विकास तेजी से होता है. खर्च की बात करें तो एक पौधा ज्यादा महंगा नहीं होता, जिससे छोटे किसान भी इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं.
6 महीने में फल, तेजी से बढ़ती आमदनी
पपीते की रेड लेडी किस्म की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता. रोपाई के करीब 6 महीने बाद ही फल आना शुरू हो जाता है. इससे किसानों को जल्दी कमाई मिलती है और उन्हें लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता. बाजार में पपीते की मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे अच्छे दाम मिलने की संभावना भी रहती है. कुल मिलाकर, सही तरीके से खेती करने पर यह फसल कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली साबित हो रही है. यही कारण है कि अब ज्यादा से ज्यादा किसान इस ओर रुख कर रहे हैं और खेती को नए तरीके से अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं.