ईरान-इजरायल जंग से बढ़ी खाद की खरीद, इन उर्वरकों की खपत में 27 फीसदी बढ़ोतरी.. क्या टेंशन में हैं अन्नदाता
ईरान-इजरायल तनाव के बाद मार्च-अप्रैल में बढ़ी खाद खरीदारी मई में सामान्य स्तर पर लौट आई. यूरिया और डीएपी की बिक्री घटी, जबकि एनपीके उर्वरकों की मांग 27 फीसदी बढ़ी. इसी बीच कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताते हुए किसानों को संतुलित और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की.
Fertilizer Consumption: ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते मार्च और अप्रैल में किसानों के बीच खाद की खरीद को लेकर काफी उत्साह देखा गया. इस दौरान उर्वरकों की बिक्री में तेज बढ़ोतरी देखी गई. हालांकि, केंद्र सरकार और राज्यों के प्रयासों के बाद मई महीने में प्रमुख उर्वरकों की खपत को नियंत्रित करने में सफलता मिली है. मई 2026 में यूरिया और डीएपी जैसे प्रमुख उर्वरकों की बिक्री न केवल अनुमानित मांग से कम रही, बल्कि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में भी घट गई. वहीं, एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का मिश्रित उर्वरक) की बिक्री में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि एनपीके की मांग बढ़ी, लेकिन कुल मिलाकर चार प्रमुख उर्वरकों की बिक्री पिछले साल के स्तर के आसपास ही रही.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च और अप्रैल में खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों में आशंका पैदा होने से कई क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा खरीदारी हुई थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने राज्यों से संपर्क कर अनावश्यक खरीदारी पर रोक लगाने और खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों में भरोसा बनाए रखने के लिए कदम उठाने को कहा था. इन प्रयासों का असर मई में दिखाई दिया, जब उर्वरकों की खपत सामान्य स्तर पर लौटती नजर आई.
एमओपी की बिक्री में गिरावट
देश में मई 2026 के दौरान प्रमुख उर्वरकों की कुल खपत लगभग पिछले साल के बराबर रही, लेकिन उर्वरकों की मांग के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला. सरकारी सूत्रों के अनुसार, मई में यूरिया, डीएपी, म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की कुल बिक्री 39.5 लाख टन रही, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 39.4 लाख टन थी. मई में यूरिया की बिक्री घटकर 21.55 लाख टन रह गई, जो पिछले साल 23.6 लाख टन थी. इसी तरह डीएपी की बिक्री 5.69 लाख टन से घटकर 5.51 लाख टन और एमओपी की बिक्री 1.45 लाख टन से मामूली घटकर 1.42 लाख टन रह गई.
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मई में उर्वरकों की कितनी हुई बिक्री (लाख टन में)
| उर्वरक | मई 2025 उर्वरकों की बिक्री (लाख टन में) | मई 2026 उर्वरकों की बिक्री (लाख टन में) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| यूरिया | 23.60 | 21.55 | -2.05 |
| डीएपी | 5.69 | 5.51 | -0.18 |
| एमओपी | 1.45 | 1.42 | -0.03 |
| कॉम्प्लेक्स/एनपीके | 8.66 | 11.02 | +2.36 |
| कुल | 39.40 | 39.50 | +0.10 |
कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की मांग बढ़ गई
इसके विपरीत, कॉम्प्लेक्स या एनपीके उर्वरकों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसकी बिक्री 8.66 लाख टन से बढ़कर 11.02 लाख टन पहुंच गई, जो करीब 27 प्रतिशत अधिक है. विशेषज्ञों का मानना है कि कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बढ़ी हुई मांग के कारण सरकार को यूरिया और डीएपी की कम बिक्री से मिलने वाली सब्सिडी बचत का पूरा लाभ नहीं मिल पाया. ऐसे सरकार ने अभी तक यूरिया और डीएपी की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा है, लेकिन लोकप्रिय एनपीके उर्वरकों की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान 16 से 41 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है. इसके बावजूद किसानों के बीच इन उर्वरकों की मांग बढ़ी है, जिससे उनकी बिक्री में तेजी देखने को मिली.
उर्वरकों की कुल खपत 64 लाख टन
हालांकि, देश में चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई) के दौरान उर्वरकों की खपत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में यूरिया, डीएपी, एमओपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की कुल खपत 64 लाख टन रही. यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 58.32 लाख टन और 2024-25 की इसी अवधि के 51.29 लाख टन से काफी अधिक है.
इस बीच, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के नेताओं को लिखे पत्र में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में रासायनिक उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा और असंतुलित उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है. इससे मिट्टी में कार्बनिक तत्व (ऑर्गेनिक कार्बन) की कमी, पोषक तत्वों का असंतुलन और जल प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं.
क्या बोले कृषि मंत्री
कृषि मंत्री ने कहा कि लंबे समय तक रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता से मिट्टी की जैव विविधता और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधियां प्रभावित होती हैं, जिससे भूमि की प्राकृतिक उर्वरता और उत्पादन क्षमता घट सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत से ज्यादा खाद के इस्तेमाल से किसानों की खेती लागत बढ़ती है और पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. इसलिए किसानों को संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग करने के लिए जागरूक करना जरूरी है.