कश्मीर में ओलावृष्टि ने तबाह किए सेब के बाग, किसानों को करोड़ों का नुकसान… फसल बीमा की मांग तेज

श्रीनगर, समेत उत्तर, मध्य और दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में बीते कुछ दिनों से लगातार खराब मौसम बना हुआ है. सबसे ज्यादा नुकसान उत्तर कश्मीर के तंगमार्ग, पट्टन, वागुरा, क्रीरी, रफियाबाद, बारामूला और बांदीपोरा क्षेत्रों में बताया जा रहा है. कई जगह तेज हवाओं के साथ बड़े-बड़े ओले गिरे, जिससे पेड़ों पर लगे फूल और छोटे फल टूटकर गिर गए.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 15 May, 2026 | 10:23 AM

Kashmir apple orchards: कश्मीर घाटी में लगातार हो रही ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने सेब उत्पादकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. घाटी के कई इलाकों में बागानों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे हजारों बागवानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. किसानों का कहना है कि मौसम की मार ने इस बार उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया है.

विशेषज्ञों के मुताबिक सेब के पेड़ों पर इस समय फूल और छोटे फल आने की प्रक्रिया चल रही थी. ऐसे समय में हुई तेज ओलावृष्टि ने बागानों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है.

घाटी के कई इलाके बुरी तरह प्रभावित

कश्मीर विजन की खबर के अनुसार, श्रीनगर, समेत उत्तर, मध्य और दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में बीते कुछ दिनों से लगातार खराब मौसम बना हुआ है. सबसे ज्यादा नुकसान उत्तर कश्मीर के तंगमार्ग, पट्टन, वागुरा, क्रीरी, रफियाबाद, बारामूला और बांदीपोरा क्षेत्रों में बताया जा रहा है. इसके अलावा मध्य कश्मीर के कंगन बेल्ट और दक्षिण कश्मीर के शोपियां और कुलगाम जिलों में भी बागानों को भारी नुकसान पहुंचा है. कई जगह तेज हवाओं के साथ बड़े-बड़े ओले गिरे, जिससे पेड़ों पर लगे फूल और छोटे फल टूटकर गिर गए.

किसानों की उम्मीदों को बड़ा झटका

फल उत्पादकों का कहना है कि कुछ ही मिनटों की ओलावृष्टि ने सालभर की मेहनत खराब कर दी. कई किसानों ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में अच्छी फसल की उम्मीद की थी, लेकिन मौसम ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं.

कश्मीर वैली फ्रूट ग्रोअर्स कम डीलर्स यूनियन के अध्यक्ष बशीर अहमद ने कहा कि नुकसान करोड़ों रुपये में है और इसकी सही गणना अभी करना मुश्किल है. उनका कहना है कि घाटी की अर्थव्यवस्था काफी हद तक बागवानी पर निर्भर करती है और लाखों परिवार इससे जुड़े हुए हैं.

बार-बार बदलता मौसम बना बड़ी चिंता

कश्मीर के बागवानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. कभी बेमौसम बारिश, कभी ओलावृष्टि और कभी तापमान में अचानक बदलाव के कारण बागवानी क्षेत्र लगातार प्रभावित हो रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. इससे सेब उत्पादन की स्थिरता पर खतरा बढ़ रहा है. किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह मौसम खराब होता रहा, तो आने वाले वर्षों में बागवानी करना और मुश्किल हो जाएगा.

फसल बीमा और राहत पैकेज की मांग तेज

फल उत्पादकों के संगठन ने सरकार से तुरंत राहत देने की मांग की है. बागवानों का कहना है कि अब तक फसल बीमा योजना ठीक तरह से लागू नहीं हो पाई है, जिससे प्राकृतिक आपदा के समय किसानों को पर्याप्त मदद नहीं मिलती. संगठन ने विशेष राहत पैकेज घोषित करने की मांग की है. इसके साथ ही मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) को दोबारा शुरू करने और बागवानी क्षेत्र के लिए अलग फसल बीमा व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठाई गई है.

विशेषज्ञों से सर्वे कराने की मांग

फल उत्पादकों ने सरकार से मांग की है कि शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के विशेषज्ञों और बागवानी विभाग की टीमों को तुरंत प्रभावित इलाकों में भेजा जाए. उनका कहना है कि जमीन पर जाकर नुकसान का सही आकलन किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द राहत मिल सके.

घाटी की अर्थव्यवस्था पर भी असर

कश्मीर की पहचान सिर्फ पर्यटन ही नहीं, बल्कि सेब उत्पादन से भी जुड़ी हुई है. घाटी का सेब देशभर के बाजारों में बड़ी मात्रा में भेजा जाता है. ऐसे में लगातार मौसम खराब रहने का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.

बागवानों को अब सरकार से जल्द मदद और राहत पैकेज की उम्मीद है, ताकि वे आने वाले सीजन के लिए खुद को फिर से तैयार कर सकें.

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