हरियाणा में 25 फीसदी कम बारिश, धान की खेती प्रभावित.. अभी तक 20 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुवाई

हरियाणा में जुलाई में अब तक 25 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों, खासकर धान की खेती पर संकट गहरा गया है. कम बारिश के कारण बुवाई और रोपाई प्रभावित हुई है. कृषि विशेषज्ञों ने पानी बचाने वाली DSR तकनीक अपनाने और कम पानी वाली फसलों की खेती करने की सलाह दी है.

नोएडा | Updated On: 21 Jul, 2026 | 01:54 PM

Haryana News: हरियाणा में जुलाई महीने में अब तक सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश हुई है, जिससे खरीफ फसलों को लेकर चिंता बढ़ गई है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मॉनसून कमजोर रहा तो राज्य में धान की खेती का रकबा और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, 19 जुलाई तक राज्य में 20.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 23 लाख हेक्टेयर था. इस साल सरकार ने खरीफ बुवाई का लक्ष्य लगभग 31 लाख हेक्टेयर रखा है.

सबसे ज्यादा असर धान की खेती पर पड़ा है. राज्य में 18.53 लाख हेक्टेयर में धान लगाने का लक्ष्य है, लेकिन अब तक करीब 25 फीसदी क्षेत्र में रोपाई नहीं हो पाई है. हालांकि, अंतिम आंकड़ों का सत्यापन अभी बाकी है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई में लंबे समय तक बारिश नहीं होने का सबसे ज्यादा असर धान की खेती  पर पड़ेगा. धान की फसल को रोपाई के समय पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. ऐसे में कम बारिश के कारण किसानों को या तो रोपाई में देरी करनी पड़ रही है या फिर धान का रकबा कम करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन घट सकता है.

DSR तकनीक से किसान करें धान रोपाई

आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि ऐसे हालात में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) जैसी पानी बचाने वाली तकनीक किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है. वहीं, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU), हिसार के कुलपति डॉ. बी.आर. कंबोज ने कहा कि जुलाई में बारिश कम जरूर हुई है, लेकिन इस साल राज्य में DSR के तहत धान का रकबा बढ़ा है और फसल की स्थिति अच्छी है. इससे सिंचाई के लिए पानी की जरूरत कम होती है और उपलब्ध पानी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है.

औसत के मुकाबले सिर्फ 69 मिमी बारिश हुई

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जुलाई में अब तक हरियाणा में 92 मिमी के सामान्य औसत के मुकाबले सिर्फ 69 मिमी बारिश हुई है. वहीं, 1 जून से अब तक राज्य में 143 मिमी के सामान्य औसत के मुकाबले केवल 107 मिमी बारिश दर्ज की गई है. ऐसे राज्य के 22 में से 20 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है. सबसे ज्यादा असर सिरसा, रोहतक और जींद जिलों में देखा गया है, जहां बारिश की कमी सबसे अधिक दर्ज की गई है. हरियाणा के कई जिलों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है. सबसे खराब स्थिति सिरसा, जींद और रोहतक की है. सिरसा में सामान्य 51 मिमी के मुकाबले सिर्फ 6 मिमी बारिश हुई. जींद में 91.5 मिमी की जगह 29.5 मिमी और रोहतक में 108 मिमी के मुकाबले केवल 28 मिमी बारिश दर्ज की गई.

अंबाला में भी सामान्य से कम बारिश

अंबाला में भी सामान्य 185.8 मिमी के मुकाबले सिर्फ 91 मिमी बारिश हुई. वहीं हिसार, भिवानी, नूंह, सोनीपत,  पंचकूला, चरखी दादरी और झज्जर में भी सामान्य से 25 से 30 फीसदी कम बारिश हुई है. हालांकि, कुछ जिलों में अच्छी बारिश भी दर्ज की गई है. कुरुक्षेत्र में सामान्य 88 मिमी के मुकाबले 126 मिमी, फरीदाबाद में 114 मिमी के मुकाबले 140 मिमी और करनाल में 122.9 मिमी के मुकाबले 137.9 मिमी बारिश हुई. यमुनानगर में सबसे ज्यादा 182 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 189 मिमी के करीब है.

 

 

Published: 21 Jul, 2026 | 01:46 PM

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