ईरान- इजरायल जंग के चलते खाद की किल्लत, सरकार ने लागू की राशनिंग..खरीफ सीजन में बढ़ेगी परेशानी!
मध्य पूर्व संघर्ष के कारण हिमाचल प्रदेश में यूरिया और एनपीके की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. हिमफेड ने राशनिंग लागू की है. वहीं, एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से कहा कि केंद्र सरकार को खरीफ सीजन शुरू होने से पहले खाद की भरपूर उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए.
Himachal Pradesh News: मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का असर अब हिमाचल प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता पर दिखने लगा है. राज्य में यूरिया और एनपीके उर्वरकों की बढ़ती मांग के चलते हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग एंड कंज्यूमर्स फेडरेशन लिमिटेड (हिमफेड) ने राशनिंग लागू कर दी है. हिमफेड के अध्यक्ष महेश्वर चौहान ने कहा है कि हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर किसान को जरूरी उर्वरक मिले. लेकिन इस समय मांग बहुत अधिक है, इसलिए राशनिंग लागू करनी पड़ी.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में यूरिया, एनपीके और एमओपी की मांग सबसे ज्यादा सेब उगाने वाले इलाकों से आ रही है, जहां फूल आने से पहले यूरिया डाला जाता है. ऐसे देश में उर्वरकों के अधिकांश कच्चे माल आयात किए जाते हैं. साथ ही उत्पादन प्लांट्स लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) पर निर्भर हैं, जिसकी आपूर्ति संघर्ष के कारण प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन और उपलब्धता पर असर पड़ा है.
उर्वरक खरीदने के लिए ऋण लिया है
हिमफेड के अध्यक्ष महेश्वर चौहान का कहना है कि उर्वरक की कमी में एक कारण केंद्र द्वारा नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) को उर्वरक आवंटन में देरी भी रही. उन्होंने कहा कि केंद्र ने एनएफएल को उर्वरक देने में देरी की, हम पहले ही इस बारे में पत्र लिख चुके हैं और अब युद्ध के कारण सप्लाई और प्रभावित हुई है. उन्होंने यह भी बताया कि हिमफेड आने वाले महीनों में पर्याप्त उर्वरक सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है. चौहान के अनुसार, हमने नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से लिक्विडिटी बनाए रखने और मई महीने के लिए पर्याप्त उर्वरक खरीदने के लिए ऋण लिया है. हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मध्य पूर्व में संघर्ष जारी रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
हरियाणा पर भी पड़ सकता है असर
खास बात गह है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का असर केवल हिमाचल प्रदेश में ही नहीं है, बल्कि हरियाणा में भी देखने को मिल सकता है. हरियाणा में भी खरीफ सीजन से पहले खाद की सप्लाई प्रभावित हो रही है. दरअसल, भारत यूरिया, डीएपी, पोटाश और प्राकृतिक गैस जैसे उर्वरकों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है. युद्ध के चलते इनकी कीमतें बढ़ गई हैं और सप्लाई भी कम हो रही है. साथ ही, ज्यादातर उर्वरक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते भारत आते हैं, जहां इस समय जहाजों की आवाजाही कम हो गई है. इसका सबसे ज्यादा असर हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर पड़ सकता है, जहां किसान यूरिया और डीएपी जैसे खाद पर काफी निर्भर रहते हैं.
जून में हो सकती है खाद की किल्लत
विशेषज्ञों का कहना है कि अभी स्टॉक होने की वजह से बाजार में खाद की उपलब्धता बनी हुई है, लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो जून में आने वाले खरीफ सीजन तक यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों की भारी कमी हो सकती है. प्रो. राजिंदर चौधरी ने द ट्रिब्यून से कहा कि हरियाणा के ज्यादातर किसान इन खादों पर निर्भर हैं, इसलिए स्थिति चिंता वाली है. हालांकि, उनका मानना है कि यह संकट एक तरह से अच्छा भी साबित हो सकता है, क्योंकि इससे किसान जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ सकते हैं.
क्या बोले किसान नेता
एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से कहा कि केंद्र सरकार को खरीफ सीजन शुरू होने से पहले खाद की भरपूर उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए. अगर किसानों को समय पर खाद नहीं मिलेगी तो खेती पर असर पड़ेगा. ऐसे में पैदावार में भी गिरावट आएगी और किसनों की कमाई प्रभावित होगी. उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन शुरू होने पर केवल हरियाणा में नहीं, बल्कि पूरे देश में खाद खासकर यूरिया की मांग बढ़ जाती है. इसलिए केंद्र सरकार को पहले से ही तैयारी करनी होगी.
क्या होती है राशनिंग
राशनिंग का मतलब है कि किसी चीज की कमी होने पर सरकार उसके वितरण को नियंत्रित कर देती है. इसका मकसद यह होता है कि हर किसी को जरूरी सामान, जैसे खाना या ईंधन, सही मात्रा में मिले. इसे आमतौर पर युद्ध, प्राकृतिक आपदा या आर्थिक संकट के समय लागू किया जाता है. इस दौरान लोग राशन कूपन या कार्ड के जरिए तय मात्रा में सामान प्राप्त करते हैं.