केंद्र ने जारी किया नोटिफिकेशन, इस कीटनाशक के आयात, निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर लगेगा बैन

केंद्र सरकार ने जहरीले खरपतवारनाशक पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध लगाने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. सरकार का कहना है कि यह रसायन इंसानों और जानवरों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है. 70 से अधिक देशों में इस पर प्रतिबंध या कड़ी पाबंदी है. अंतिम मंजूरी मिलने पर भारत में इसका आयात, बिक्री और इस्तेमाल बंद हो जाएगा.

नोएडा | Updated On: 15 Jul, 2026 | 12:47 PM

Paraquat Dichloride: केंद्र सरकार ने देश में सबसे विवादित खरपतवारनाशकों (herbicide) में से एक पैराक्वाट डाइक्लोराइड (Paraquat Dichloride) पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इसका ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. ड्राफ्ट के मुताबिक, इस पैराक्वाट डाइक्लोराइड के आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन, वितरण और इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव है.

मंत्रालय ने बताया कि पैराक्वाट डाइक्लोराइड  के इस्तेमाल की समीक्षा के लिए बनाई गई विशेषज्ञ समिति ने पाया कि दुनिया के 70 से अधिक देशों में इस रसायन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है या इसके इस्तेमाल पर कड़ी पाबंदियां हैं. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर चिंताएं भी जताई हैं. इनमें इस रसायन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान, इसके कारण लगातार सामने आ रहे जहर खाने (पॉइजनिंग) के मामले, उच्च मृत्यु दर और इसका कोई प्रभावी एंटीडोट (विषरोधी दवा) उपलब्ध न होना शामिल है.

पैराक्वाट डाइक्लोराइड हेल्थ के लिए हानिकारक

मंत्रालय द्वारा नोटिफिकेशन के मुताबिक इस साल जनवरी में इस मामले को लेकर एक कमेटी बनाई गई थी. कई बैठकों के बाद मई में प्रतिबंध पर सहमति बन गई. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जून में सौंप दी थी. इन निष्कर्षों के आधार पर केंद्र सरकार का मानना है कि पैराक्वाट डाइक्लोराइड का इस्तेमाल इंसानों और जानवरों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव लाया गया है. यदि ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो देश में इस हर्बीसाइड का इस्तेमाल पूरी तरह बंद हो जाएगा.

पैराक्वाट डाइक्लोराइड का कहां होता है इस्तेमाल

पैराक्वाट डाइक्लोराइड एक खरपतवारनाशक है, जिसका इस्तेमाल खेतों और गैर-कृषि क्षेत्रों में उगने वाले खरपतवार को खत्म करने के लिए किया जाता है. इसका उपयोग खासतौर पर कपास जैसी फसलों की कटाई से पहले पौधों को जल्दी सुखाने (डेसिकेशन) के लिए भी किया जाता है. इससे फसल जल्दी कटाई के लिए तैयार हो जाती है और कटाई का काम आसान हो जाता है.

आयात, निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध की तैयारी

हालांकि, इस रसायन को लेकर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएं सामने आने के बाद अब केंद्र सरकार ने इसके आयात, निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है. विशेषज्ञों के अनुसार, पैराक्वाट बेहद जहरीला रसायन है. इसके संपर्क में आने से व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो सकता है और कई मामलों में कुछ ही घंटों के भीतर मौत भी हो सकती है.

महज कुछ बूंदें शरीर में जाने से बिगड़ जाएगी तबीयत

अगर कोई व्यक्ति गलती से इसे निगल ले, इसकी जहरीली गैस  या बूंदें सांस के साथ शरीर में चली जाएं, या यह त्वचा, आंखों या कपड़ों के संपर्क में आ जाए, तो भी यह गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए इसके इस्तेमाल के दौरान बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है. इन्हीं स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए केंद्र सरकार ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव जारी किया है.

पैराक्वाट के जहर का शरीर पर क्या असर होता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, पैराक्वाट का जहर सबसे पहले पाचन तंत्र और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है. इसके शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं.

अगर समय पर इलाज न मिले, तो पैराक्वाट का जहर दिल, किडनी, लिवर और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है. गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है.

Published: 15 Jul, 2026 | 08:21 AM

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