कपास की फसल में खरपतवार का बढ़ा खतरा, 20-25 दिन के अंदर करें यह काम, नहीं तो आधी जाएगी पैदावार

Cotton Farming: कपास की फसल में इन दिनों खरपतवार तेजी से फैल रही है, जिससे पौधों की बढ़वार और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकती हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर निराई-गुड़ाई या सही खरपतवार नाशक का इस्तेमाल करके इस समस्या से बचा जा सकता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 2 Jul, 2026 | 06:00 AM

Cotton Cultivation Tips: मध्य प्रदेश का खरगोन जिला कपास उत्पादन के लिए पूरे प्रदेश में खास पहचान रखता है. यहां हर साल खरीफ सीजन में दो लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में बीटी कॉटन की खेती होती है. कपास को ‘सफेद सोना’ भी कहा जाता है, क्योंकि इससे किसानों को अच्छी आमदनी होती है. लेकिन इन दिनों कपास की फसल के साथ-साथ खेतों में खरपतवार भी तेजी से फैल रही है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर शुरुआत में ही इन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो फसल की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन में अच्छी-खासी गिरावट आ सकती है.

क्यों खतरनाक है खरपतवार?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खरपतवार कपास की फसल के लिए सबसे बड़ी शुरुआती समस्याओं में से एक है. ये मिट्टी से नमी, खाद और जरूरी पोषक तत्व पहले ही खींच लेते हैं. इसका सीधा असर कपास के पौधों की बढ़वार पर पड़ता है. पौधे कमजोर रह जाते हैं और बाद में पैदावार भी कम हो जाती है. इतना ही नहीं, खेत में ज्यादा खरपतवार होने पर किसानों को बार-बार मजदूर लगाकर सफाई करानी पड़ती है, जिससे खेती की लागत भी बढ़ जाती है.

सबसे सस्ता और असरदार तरीका

खरपतवार नियंत्रण का सबसे आसान और कम खर्च वाला तरीका समय-समय पर कुल्पा चलाना या निराई-गुड़ाई करना है. इससे खरपतवार खत्म हो जाती है और मिट्टी भी भुरभुरी बनी रहती है. भुरभुरी मिट्टी में जड़ों को पर्याप्त हवा मिलती है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं. जिन किसानों के पास यह सुविधा उपलब्ध है, उन्हें सबसे पहले इसी तरीके को अपनाना चाहिए.

कुल्पा न हो तो अपनाएं यह उपाय

कई किसानों के पास मजदूरों की कमी या संसाधनों की दिक्कत होती है. ऐसे में खेत में खरपतवार तेजी से फैल जाती है. ऐसी स्थिति में खरपतवार नाशक दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि कपास में चौड़ी और संकरी दोनों तरह की खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए पाइरीथियोबैक सोडियम 4 फीसदी के साथ क्विजालोफॉप एथिल 6 फीसदी वाला मिश्रित खरपतवार नाशक काफी प्रभावी माना जाता है. यह बाजार में आसानी से उपलब्ध है और दोनों प्रकार की खरपतवार पर अच्छा असर करता है. हालांकि, इसे हमेशा कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही खरीदें और उपयोग करें.

दवा डालने का सही समय और तरीका

इस दवा की 500 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़ पर्याप्त होती है. इसे करीब 200 लीटर साफ पानी में अच्छी तरह मिलाकर पूरे खेत में समान रूप से छिड़काव करना चाहिए. दवा का सबसे अच्छा असर तब मिलता है, जब कपास की फसल 20 से 25 दिन की हो या खरपतवार 2 से 4 पत्ती की अवस्था में हो. यदि खरपतवार बहुत बड़ी हो जाए, तो दवा का असर कम हो सकता है. इसलिए समय पर छिड़काव करना बेहद जरूरी है.

इन बातों का रखें खास ध्यान

दवा का छिड़काव हमेशा साफ मौसम में करें. तेज हवा, बारिश या बारिश की संभावना होने पर स्प्रे करने से बचें. छिड़काव के दौरान दस्ताने, मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरण जरूर पहनें. अपनी तरफ से दवा की मात्रा बढ़ाने या दूसरी दवाओं के साथ मिलाने की गलती न करें. किसी भी रसायन का उपयोग करने से पहले कृषि विभाग या कृषि वैज्ञानिक से सलाह लेना सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प है.

समय पर नियंत्रण से बढ़ेगा मुनाफा

कपास की अच्छी पैदावार के लिए शुरुआत से ही खरपतवार पर नियंत्रण रखना जरूरी है. सही समय पर निराई-गुड़ाई या उचित खरपतवार नाशक का इस्तेमाल करके किसान फसल को मजबूत बना सकते हैं. इससे उत्पादन बढ़ेगा, खेती की लागत कम होगी और किसानों को बेहतर मुनाफा भी मिलेगा.

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Published: 2 Jul, 2026 | 06:00 AM

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