Goat Farming: बकरी पालन आज ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ व्यावसायिक स्तर पर भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. कम लागत और बेहतर मुनाफे के कारण बड़ी संख्या में पशुपालक इस व्यवसाय को अपना रहे हैं. हालांकि, कई बार सही जानकारी के अभाव में पशुपालकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता. विशेषज्ञों का मानना है कि बकरियों की अच्छी सेहत और उत्पादन क्षमता के लिए उनके खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. यदि बकरियों को उनकी प्राकृतिक आदतों के अनुसार भोजन दिया जाए तो उनका विकास बेहतर होता है और बीमारी का खतरा भी कम हो जाता है.
हरा चारा और पत्तियां हैं बकरियों की पहली पसंद
पशु विशेषज्ञों के अनुसार बकरियां स्वभाव से ब्राउजर (Browser) पशु होती हैं. इसका मतलब है कि वे जमीन पर पड़े चारे की बजाय पेड़ों की पत्तियां, कोमल टहनियां और ऊंचाई पर मौजूद हरे चारे को कुतर-कुतर कर खाना ज्यादा पसंद करती हैं. यही उनका प्राकृतिक व्यवहार है. जब बकरियों को उनकी पसंद और प्रकृति के अनुरूप भोजन मिलता है, तो वे उसे आसानी से पचा लेती हैं. इससे उनके शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है और वजन बढ़ने के साथ-साथ उनकी उत्पादन क्षमता भी बेहतर होती है.
पाचन बेहतर रहेगा तो बीमारियां भी होंगी कम
केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के डॉ. वाई.के. सोनी के अनुसार, बकरियों को नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण हरा चारा, पेड़ों की पत्तियां और प्राकृतिक चराई उपलब्ध कराने से उनकी पाचन क्रिया मजबूत रहती है. बेहतर पाचन का सीधा असर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है. जिन बकरियों का पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है, उनमें पेट संबंधी समस्याएं, कमजोरी और कई सामान्य बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. इसके अलावा प्राकृतिक चराई से उन्हें विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व भी मिलते हैं, जो उनके संपूर्ण विकास में सहायक होते हैं.
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सही प्रबंधन से बढ़ेगा मुनाफा
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पशुपालकों को बकरियों के चारे में बिना जानकारी के बार-बार बदलाव नहीं करना चाहिए. समय-समय पर पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों की सलाह लेना भी जरूरी है. संतुलित आहार, स्वच्छ पानी और उचित देखभाल से बकरियों की वृद्धि दर बेहतर होती है. जब बकरियां स्वस्थ रहेंगी और उनकी संख्या बढ़ेगी, तब पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी होगी. इसलिए बकरी पालन में सफलता के लिए सबसे जरूरी है कि बकरियों की प्राकृतिक खान-पान की आदतों को समझा जाए और उसी के अनुसार उनका प्रबंधन किया जाए. सही चारे का चुनाव न केवल बकरियों को स्वस्थ रखता है, बल्कि पशुपालकों के लिए बेहतर मुनाफे का रास्ता भी खोलता है.