बार-बार एक ही कीटनाशक डालना पड़ेगा भारी! भिंडी बचाने का ये है सही तरीका

भिंडी की फसल में फल भेदक कीट किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकता है. इसके प्रकोप से फलों में छेद होने लगते हैं और बाजार भाव गिर सकता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान एक ही कीटनाशक दोहराने के बजाय IPM अपनाएं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 18 Aug, 2026 | 09:36 PM

Okra Farming: भिंडी की खेती करने वाले किसानों के लिए फल भेदक कीट बड़ी परेशानी बन सकता है. इसके प्रकोप से भिंडी के फलों में छेद हो जाते हैं और फसल की गुणवत्ता के साथ बाजार भाव पर भी असर पड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसान कीट नियंत्रण के लिए बार-बार एक ही कीटनाशक का इस्तेमाल न करें. इसके बजाय एकीकृत कीट प्रबंधन यानी IPM, फेरोमोन ट्रैप और नीम आधारित उपायों को अपनाकर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है.

फल भेदक कीट ऐसे करता है फसल को नुकसान

भिंडी की फसल में फल भेदक कीट  का प्रकोप होने पर इसकी इल्ली फलों और कोमल तनों में छेद कर अंदर प्रवेश कर जाती है. इससे फल खराब होने लगते हैं और उनकी गुणवत्ता तेजी से घटती है. प्रभावित भिंडी बाजार में कम कीमत पर बिक सकती है या पूरी तरह अनुपयोगी हो सकती है. शुरुआती स्तर पर इस कीट की पहचान और नियंत्रण करना किसानों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद रहता है. डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी), के अनुसार किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए. खेत में दिखाई देने वाले प्रभावित फलों और तनों को तोड़कर नष्ट करना शुरुआती नियंत्रण का प्रभावी तरीका हो सकता है. इससे कीट के आगे फैलने की संभावना कम होती है.

एक ही कीटनाशक बार-बार डालना क्यों नुकसानदायक?

कई किसान कीट दिखाई देने पर एक ही रासायनिक कीटनाशक  का बार-बार इस्तेमाल करते हैं. इससे समय के साथ कीटों में उस रसायन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है. ऐसे में दवा का असर कम होने लगता है और किसान को बार-बार छिड़काव करना पड़ता है. डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार कीटनाशकों का इस्तेमाल विशेषज्ञों की सलाह और अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिए. अलग-अलग प्रभाव वाले कीटनाशकों का चक्रानुकूल इस्तेमाल करना जरूरी है. इससे कीटों में दवा के प्रति प्रतिरोध विकसित होने की संभावना को कम किया जा सकता है.

फेरोमोन ट्रैप और नीम से करें शुरुआत

भिंडी की फसल में कीट नियंत्रण  के लिए किसान शुरुआत से ही एकीकृत कीट प्रबंधन यानी IPM को अपनाएं. इसके तहत खेत की नियमित निगरानी के साथ प्रभावित हिस्सों को हटाना, फेरोमोन ट्रैप लगाना और जैविक उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है. फेरोमोन ट्रैप वयस्क पतंगों की निगरानी और नियंत्रण में मदद करते हैं. वहीं नीम आधारित कीटनाशकों का उपयोग भी शुरुआती प्रकोप को नियंत्रित करने में उपयोगी हो सकता है. इन उपायों से रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जा सकती है और मित्र कीटों को भी अपेक्षाकृत सुरक्षित रखा जा सकता है.

प्रकोप बढ़े तो विशेषज्ञ की सलाह से करें छिड़काव

यदि फल भेदक कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति की सीमा से ऊपर पहुंच जाता है, तब अनुशंसित रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. जरूरत के अनुसार इमामेक्टिन बेंजोएट या लैम्ब्डा-साइहैलोथ्रिन जैसे कीटनाशकों का प्रयोग विशेषज्ञों की सलाह और लेबल पर दी गई मात्रा के अनुसार किया जाना चाहिए. डॉ. रजनीश मिश्रा का कहना है कि किसान बिना जरूरत के बार-बार रासायनिक छिड़काव से बचें. IPM में निगरानी, भौतिक नियंत्रण, जैविक उपाय और जरूरत पड़ने पर रासायनिक नियंत्रण को संतुलित तरीके से अपनाया जाता है. इससे खेती की लागत कम करने, कीटों में प्रतिरोध रोकने और फसल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

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Published: 18 Aug, 2026 | 09:36 PM

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