पालना है तो 2 हजार रुपये किलो बिकने वाली मछली पालिए, एक एकड़ तालाब से होगी तगड़ी कमाई

पहले माना जाता था कि हिल्सा सिर्फ नदियों और खारे पानी वाले इलाकों में ही पाई जा सकती है, लेकिन अब यह सोच बदल रही है. वैज्ञानिकों के शोध और प्रयोगों से यह साबित हो चुका है कि नियंत्रित वातावरण में हिल्सा को तालाब में भी पाला जा सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 15 Jan, 2026 | 01:31 PM

Fish farming: आज के समय में खेती के साथ-साथ मछली पालन भी किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए कमाई का मजबूत जरिया बनता जा रहा है. अगर परंपरागत कार्प या रोहू-कटला से हटकर कोई ऐसी मछली पाली जाए जिसकी बाजार में जबरदस्त मांग और ऊंची कीमत हो, तो कम जमीन और सीमित संसाधनों में भी बड़ी कमाई संभव है. ऐसी ही एक महंगी और खास मछली है हिल्सा, जो बाजार में 1200 से लेकर 2000 रुपये प्रति किलो तक बिक जाती है. सही तकनीक और देखभाल के साथ अब इसे तालाब में भी पाला जा सकता है.

क्यों खास है हिल्सा मछली

हिल्सा मछली का नाम आते ही बंगाल, ओडिशा और बांग्लादेश की याद आ जाती है. यह मछली स्वाद में जितनी लाजवाब है, उतनी ही सेहत के लिए फायदेमंद भी मानी जाती है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो दिल और दिमाग दोनों के लिए अच्छा होता है. डॉक्टरों के अनुसार हिल्सा मछली का सेवन ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने, तनाव कम करने और हृदय रोगों के खतरे को घटाने में मदद करता है. यही वजह है कि बड़े होटल, रेस्टोरेंट और निर्यात बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है.

अब तालाब में भी संभव है हिल्सा का पालन

पहले माना जाता था कि हिल्सा सिर्फ नदियों और खारे पानी वाले इलाकों में ही पाई जा सकती है, लेकिन अब यह सोच बदल रही है. वैज्ञानिकों के शोध और प्रयोगों से यह साबित हो चुका है कि नियंत्रित वातावरण में हिल्सा को तालाब में भी पाला जा सकता है. हाल के अध्ययनों में तालाब में पाली गई हिल्सा का वजन करीब 600 से 700 ग्राम तक पहुंचा है, जो एक बड़ी सफलता मानी जा रही है.

तालाब में हिल्सा पालन के लिए पानी की गुणवत्ता सबसे अहम होती है. हल्का खारापन, संतुलित पीएच और पर्याप्त घुली हुई ऑक्सीजन इस मछली के विकास में बड़ी भूमिका निभाते हैं. अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो हिल्सा तालाब में भी अच्छी तरह बढ़ती है और किसान को अच्छा मुनाफा देती है.

हिल्सा मछली को क्या खिलाएं

हिल्सा मछली का भोजन भी इसकी सफलता की कुंजी है. शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि यह मछली प्राकृतिक भोजन को ज्यादा पसंद करती है. जूप्लांकटन और पानी में मौजूद सूक्ष्म जीव इसके लिए उपयुक्त आहार हैं. इसके साथ-साथ संतुलित पोषण वाला विशेष फीड देने से इसकी बढ़वार तेज होती है. साफ पानी, नियमित निगरानी और सही आहार से हिल्सा पालन आसान हो जाता है.

कमाई का सुनहरा मौका

अगर कोई किसान या युवा सही मार्गदर्शन के साथ हिल्सा मछली पालन शुरू करता है, तो यह एक प्रीमियम बिजनेस बन सकता है. सरकारी संस्थानों और मत्स्य विभाग से तकनीकी सहायता लेकर इस मछली का पालन किया जा सकता है. ऊंची कीमत, लगातार मांग और सीमित उत्पादन के कारण हिल्सा मछली सच में किस्मत बदलने वाला विकल्प साबित हो सकती है.

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