ITC का स्मार्ट ‘क्रॉप डॉक्टर’ तुरंत करेगा 70 तरह की फसलों की बीमारी का इलाज, किसानों को बड़ी राहत
ITCMAARS प्लेटफॉर्म में ‘Krishi Mitra’ नाम का AI आधारित एग्री को-पायलट भी शामिल है, जिसे Microsoft के साथ मिलकर तैयार किया गया है. कंपनी के अनुसार यह अपने तरह का दुनिया का पहला डिजिटल समाधान है. यह फीचर 8 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और किसानों को फसल, खेती के तरीके, मौसम, मंडी भाव और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी आसान भाषा में देता है.
अंतरराष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य दिवस के मौके पर ITC का ITCMAARS ‘फिजिटल’ प्लेटफॉर्म किसानों के लिए आधुनिक तकनीक का बड़ा सहारा बनकर सामने आया है. इस प्लेटफॉर्म में AI और मशीन लर्निंग आधारित ‘क्रॉप डॉक्टर’ फीचर दिया गया है, जो फसलों में बीमारी और कीटों की जल्दी पहचान कर किसानों को तुरंत सही सलाह और समाधान उपलब्ध कराता है. खास बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और इंटरनेशनल प्लांट प्रोटेक्शन कन्वेंशन (IPPC) की ओर से मनाए जा रहे इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य दिवस की थीम ‘फूड सिक्योरिटी के लिए प्लांट बायो सिक्योरिटी’ रखी गई है. इसका उद्देश्य फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाकर खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका और पर्यावरण की रक्षा को मजबूत करना है.
ITCMAARS का ‘क्रॉप डॉक्टर’ फीचर किसानों को AI तकनीक की मदद से फसलों में बीमारी और कीटों की पहचान तुरंत करने में मदद करता है. ITCMAARS सुपरऐप में मौजूद यह सुविधा 70 तरह की फसलों को कवर करती है और कम समय में इसका इस्तेमाल 3 लाख से ज्यादा बार किया जा चुका है. इससे किसानों को समय रहते सही कदम उठाने और फसल नुकसान रोकने में मदद मिल रही है. शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से खेतों में रोग फैलने का खतरा भी कम होता है.क्रॉप डॉक्टर किसानों को रासायनिक, जैविक और मैकेनिकल खेती से जुड़े समाधान भी सुझाता है, जिससे कीटों की पहचान और नियंत्रण के बीच का समय कम हो जाता है. खास बात यह है कि यह सलाह किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में टेक्स्ट और ऑडियो दोनों रूप में मिलती है. इसके अलावा किसान ITC के कृषि विशेषज्ञों से भी सीधे सलाह ले सकते हैं, जहां टोल फ्री नंबर के जरिए क्षेत्रीय भाषाओं में मदद उपलब्ध कराई जाती है.
उत्पादन में 15 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी
2022 में शुरू किया गया ITCMAARS मॉडल आज एक मजबूत Farming as a Service (FaaS) प्लेटफॉर्म बन चुका है, जो किसानों को डिजिटल तकनीक के जरिए खेती से जुड़ी हर तरह की सुविधा देता है. यह प्लेटफॉर्म FPOs के सहयोग से इनपुट और आउटपुट मार्केटप्लेस की तरह काम करता है. ITCMAARS से अब तक 11 राज्यों के करीब 25 लाख किसान और 2180 FPOs जुड़ चुके हैं. पायलट प्रोजेक्ट के अनुसार, इस पहल से खाद के इस्तेमाल में 10 से 15 फीसदी तक कमी आई है, जबकि फसल उत्पादन में 15 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. इससे किसानों की कुल आमदनी लगभग 25 फीसदी तक बढ़ी है. ITC का कहना है कि कंपनी पिछले 100 सालों से किसानों के साथ काम कर रही है और अब ITCMAARS के जरिए 1 करोड़ किसानों तक पहुंचकर ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना चाहती है.
कंपनी के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते कीट रोगों के दौर में पौधों की सेहत और खाद्य सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. ऐसे में मिट्टी की सेहत, कृषि इनपुट, मौसम अलर्ट और बुवाई से कटाई तक सही सलाह बेहद जरूरी है. ITCMAARS का ‘Crop Doctor’ जैसे डिजिटल टूल और विशेषज्ञ सलाह किसानों को समय रहते बीमारी पहचानने और फसल बचाने में मदद कर रहे हैं.
AI आधारित ‘Crop Calendar’ फीचर भी शामिल
आईटीसी लिमिटेड के एग्री बिजनेस डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस गणेश कुमार ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य किसानों को ऐसी वैज्ञानिक और आसान तकनीक उपलब्ध कराना है, जिससे फसल प्रबंधन बेहतर हो, उत्पादन बढ़े और किसानों की आय मजबूत हो सके. ITCMAARS प्लेटफॉर्म पर किसानों को मौसम और इलाके के अनुसार प्रेडिक्टिव और हाइपरलोकल सलाह दी जाती है. इसमें AI आधारित ‘Crop Calendar’ फीचर भी शामिल है, जो 53 अलग-अलग फसलों के लिए सही समय पर खेती से जुड़े काम करने की सलाह देता है, ताकि किसान बेहतर उत्पादन हासिल कर सकें. इसके साथ ही प्लेटफॉर्म पर ‘Fertiliser Calculator’ भी उपलब्ध है, जो मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के आधार पर संतुलित खाद इस्तेमाल की सलाह देता है. इससे किसानों को जरूरत से ज्यादा या कम खाद डालने से बचने में मदद मिलती है, मिट्टी और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और पर्यावरण पर भी कम असर पड़ता है.
यह फीचर 8 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है
ITCMAARS प्लेटफॉर्म में ‘Krishi Mitra’ नाम का AI आधारित एग्री को-पायलट भी शामिल है, जिसे Microsoft के साथ मिलकर तैयार किया गया है. कंपनी के अनुसार यह अपने तरह का दुनिया का पहला डिजिटल समाधान है. यह फीचर 8 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और किसानों को फसल, खेती के तरीके, मौसम, मंडी भाव और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी आसान भाषा में देता है. पिछले दो साल में ‘Krishi Mitra’ ने करीब 2 लाख किसानों के अलग-अलग सवालों का जवाब दिया है. इससे किसानों को सही समय पर फसल बेचने का फैसला लेने, सरकारी सब्सिडी की जानकारी पाने, सटीक खेती अपनाने और खराब मौसम से पहले तैयारी करने में मदद मिली है.
31 लाख एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
फसलों को नुकसान से बचाने के लिए ITCMAARS अब रिमोट सेंसिंग और IoT आधारित तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहा है. इसकी मदद से खेतों में फसल की स्थिति पर नजर रखी जाती है और बीमारी, तनाव या कीटों के खतरे का पता पहले ही लगा लिया जाता है, ताकि नुकसान होने से पहले किसान जरूरी कदम उठा सकें. इसके अलावा ITC ने Climate AI टूल के जरिए देशभर में खेत स्तर पर जलवायु से जुड़े जोखिम और फसलों की कमजोरियों का अध्ययन भी किया है. इन आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए खास माइक्रो-जोन एडाप्टेशन प्लान तैयार किए जा रहे हैं. इन प्रयासों से ITC का क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर प्रोग्राम और मजबूत हुआ है. फिलहाल यह कार्यक्रम 19 राज्यों में 31 लाख एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा दे रहा है, जिससे अब तक 12 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा मिला है.