खरीफ बुवाई में तेजी, 119 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा रकबा.. जानें किस फसल का कितना है क्षेत्र
खरीफ सीजन 2026 में देश की फसल बुवाई 1.7 फीसदी बढ़कर 119.90 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है. धान, दालों और मोटे अनाज में वृद्धि दर्ज हुई, जबकि कपास, सोयाबीन और उड़द में गिरावट आई. मॉनसून की स्थिति आगे तय करेगी कि यह बढ़त टिकाऊ रहेगी या फसल रकबे में बदलाव होगा.
Agriculture News: देश में चल रहे खरीफ सीजन में इस बार फसलों की बुवाई पिछले साल की तुलना में 1.7 प्रतिशत बढ़ी है. कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 19 जून तक कुल बुवाई क्षेत्र 119.90 लाख हेक्टेयर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 117.95 लाख हेक्टेयर था. हालांकि कुछ प्रमुख फसलों जैसे कपास, सोयाबीन और उड़द की बुवाई में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन अगर मॉनसून आगे सामान्य हो जाता है तो आने वाले दिनों में इन फसलों का रकबा अन्य फसलों की ओर भी स्थानांतरित हो सकता है.
गन्ने की बुवाई इस साल 57.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल यह 56.64 लाख हेक्टेयर थी. हालांकि मौसम और खेती के रुझान को देखते हुए इसमें आगे बदलाव संभव है. इसी तरह धान (पैडी), जो खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल है, इस बार 12.36 लाख हेक्टेयर में रोपा गया है, जबकि पिछले साल यह 8.09 लाख हेक्टेयर था. दालों की बुवाई भी बढ़कर 7.21 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल 6.39 लाख हेक्टेयर थी.
किस फसल की कितनी हुई बुवाई
| फसल | 2026 में रकबा (लाख हेक्टेयर) | 2025 में रकबा (लाख हेक्टेयर) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| कुल बुवाई क्षेत्र | 119.90 | 117.95 | +1.7% |
| गन्ना | 57.31 | 56.64 | ↑ |
| धान (पैडी) | 12.36 | 8.09 | ↑ |
| दालें (कुल) | 7.21 | 6.39 | ↑ |
| तिलहन (कुल) | 7.24 | 8.11 | ↓ |
| मोटे/न्यूट्री अनाज | 12.43 | 9.82 | ↑26.5% |
| कपास | 17.13 | 22.82 | ↓ 25% |
| सोयाबीन | 1.30 | 2.50 | ↓ |
| उड़द | 0.62 | 0.98 | ↓ |
तिलहन की बुवाई में गिरावट
इसके उलट तिलहन (ऑयलसीड्स) की बुवाई घटकर 7.24 लाख हेक्टेयर रह गई है, जो पिछले साल 8.11 लाख हेक्टेयर थी. वहीं मोटे अनाज और न्यूट्री अनाज की बुवाई में 26.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 12.43 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल यह 9.82 लाख हेक्टेयर थी. कुल मिलाकर, शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि इस खरीफ सीजन में बुवाई की स्थिति बेहतर है, लेकिन मॉनसून की आगे की चाल ही तय करेगी कि यह बढ़त कितनी टिकाऊ रहती है.
कपास के रकबे में 25 फीसदी कमी
हालांकि, कपास की बुवाई में इस बार बड़ी गिरावट देखने को मिली है. यह 25 प्रतिशत घटकर 17.13 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 22.82 लाख हेक्टेयर थी. सोयाबीन की बुवाई भी घटकर 1.30 लाख हेक्टेयर रह गई है, जो पिछले साल 2.50 लाख हेक्टेयर थी. उड़द (काली मटपे) का क्षेत्र भी कम होकर 0.62 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पहले 0.98 लाख हेक्टेयर था.
तूर का रकबा 1.61 लाख हेक्टेयर
हालांकि दालों में अरहर (तूर) की बुवाई में मामूली बढ़ोतरी हुई है. यह बढ़कर 1.61 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है, जबकि पिछले साल यह 1.59 लाख हेक्टेयर थी. मूंग की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 2.86 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.08 लाख हेक्टेयर हो गई है. मूंगफली का रकबा भी थोड़ा बढ़कर 5.25 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 5.09 लाख हेक्टेयर था.
ज्वार का क्षेत्र 1.74 लाख हेक्टेयर पहुंच गया
मोटे और न्यूट्री अनाजों की बुवाई में भी बढ़ोतरी देखी गई है. ज्वार का क्षेत्र 1.74 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले साल 1.40 लाख हेक्टेयर था. बाजरा की बुवाई भी बढ़कर 4.05 लाख हेक्टेयर हो गई है, जबकि पिछले साल यह 2.14 लाख हेक्टेयर थी. रागी का क्षेत्र 0.31 लाख हेक्टेयर हुआ, जो पिछले साल 0.27 लाख हेक्टेयर था. मक्का की बुवाई भी बढ़कर 5.69 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल 5.34 लाख हेक्टेयर थी. कुल मिलाकर, खरीफ सीजन में कुछ नकदी फसलों में गिरावट दिख रही है, जबकि दालों और मोटे अनाजों की बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.