Maharashtra Crops: महाराष्ट्र में इस खरीफ सीजन सूरजमुखी की खेती तेजी से बढ़ी है. जून में बुवाई के समय पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण कुछ किसानों ने मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलों की जगह सूरजमुखी, सोयाबीन और मक्का की खेती का रुख किया है. राज्य में खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है. धान की रोपाई का काम इस सप्ताह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है. कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सूरजमुखी की बुवाई उसके 1.16 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य का 83 फीसदी क्षेत्र में हो चुकी है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा सिर्फ 37 फीसदी था.
वहीं, मूंग और उड़द की बुवाई काफी पीछे है. मूंग की बुवाई 3.02 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य का 48 फीसदी, जबकि उड़द की बुवाई 3.59 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य का 48 फीसदी क्षेत्र में हुई है. पिछले खरीफ सीजन में उड़द की बुवाई लक्ष्य से दोगुने से ज्यादा क्षेत्र में हुई थी, जबकि मूंग की बुवाई लक्ष्य के 69 फीसदी क्षेत्र में हुई थी. कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मूंग और उड़द की बुवाई जून के मध्य तक करना जरूरी होता है, ताकि बीज अच्छी तरह अंकुरित हों और पैदावार बेहतर मिले. लेकिन जून में बारिश कम होने से कुछ किसानों ने सूरजमुखी, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलों का रुख किया.
जून में कम बारिश से मूंग-उड़द की बुवाई प्रभावित
महाराष्ट्र में इस साल मूंग और उड़द का उत्पादन कम रहने की आशंका है. कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि जून में बुवाई के लिए सही समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण इन दोनों फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मूंग और उड़द की खेती का रकबा तुअर के मुकाबले काफी कम है. वहीं, तुअर की बुवाई अच्छी रही है. राज्य में 12.77 लाख हेक्टेयर से ज्यादा के लक्ष्य में से करीब 93 फीसदी क्षेत्र में तुअर की बुवाई हो चुकी है. कृषि मंत्री के मुताबिक, सोयाबीन और मक्का की बुवाई भी अच्छी रही है. किसानों ने बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में इन फसलों का रकबा बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि अगस्त में हुई अच्छी बारिश से खरीफ सीजन की फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद है.
बुवाई का आंकड़ा 3-4 फीसदी और बढ़ने की उम्मीद
महाराष्ट्र में इस साल खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी होने वाली है. राज्य के 144.36 लाख हेक्टेयर के कुल लक्ष्य में से 93 फीसदी क्षेत्र में अब तक बुवाई हो चुकी है. पिछले साल इसी समय तक 98 फीसदी क्षेत्र में बुवाई पूरी हो गई थी. कृषि विभाग को उम्मीद है कि बाकी धान की रोपाई पूरी होने के बाद बुवाई का आंकड़ा 3-4 फीसदी और बढ़ सकता है. अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने से पिछले साल के मुकाबले खरीफ बुवाई का अंतर काफी कम हुआ है. अगस्त में कई जिलों में हुई अच्छी बारिश से फसलों के अंकुरण में भी मदद मिल रही है. हालांकि, नंदुरबार, गढ़चिरौली, सोलापुर और कोल्हापुर जिलों में पिछले साल की तुलना में इस बार खरीफ फसलों की बुवाई कम हुई है.