खरीफ बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, 967 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा रकबा.. गन्ने में यूपी का दबदबा

देश में खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा 7 अगस्त तक 967.92 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है. यह पिछले साल के मुकाबले 1.8 फीसदी कम है. वहीं, गन्ने की बुवाई 58.31 लाख हेक्टेयर रही। उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा बढ़ा है, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तमिलनाडु और पंजाब में पिछले साल के मुकाबले बुवाई कम हुई है.

नोएडा | Published: 11 Aug, 2026 | 09:44 AM

देश में खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार में सुधार हुआ है. 7 अगस्त तक सभी खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र सामान्य क्षेत्र के करीब 88 फीसदी तक पहुंच गया है. वहीं, पिछले साल के मुकाबले बुवाई का अंतर घटकर 2 फीसदी से भी कम रह गया है. 1 से 7 अगस्त के बीच किसानों ने करीब 74 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 65.17 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी. इससे कुल बुवाई क्षेत्र में सुधार आया है. 31 जुलाई तक पिछले साल के मुकाबले बुवाई का अंतर करीब 3 फीसदी था.

कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 7 अगस्त तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई  967.92 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है. पिछले साल इसी अवधि में 985.89 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी. यानी इस साल रकबा 1.8 फीसदी कम है. अब तक खरीफ फसलों की बुवाई सामान्य क्षेत्र के 87.6 फीसदी हिस्से में हो चुकी है.

गन्ने की बुवाई में यूपी आगे, महाराष्ट्र-कर्नाटक में रकबा घटा

सरकार ने कई हफ्तों बाद गन्ने के बुवाई आंकड़ों में संशोधन किया है. अब 7 अगस्त तक गन्ने का रकबा 58.31 लाख हेक्टेयर बताया गया है, जबकि पिछले साल यह 58.62 लाख हेक्टेयर था. उत्तर प्रदेश में गन्ने की बुवाई बढ़कर 28.97 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल 28.61 लाख हेक्टेयर थी. वहीं, महाराष्ट्र में गन्ने का रकबा 11.82 लाख हेक्टेयर और कर्नाटक में 7.33 लाख हेक्टेयर रहा. गुजरात में यह 1.90 लाख, बिहार में 1.89 लाख, तमिलनाडु में 1.34 लाख और पंजाब में 0.81 लाख हेक्टेयर रहा. इन राज्यों में पिछले साल के मुकाबले गन्ने का रकबा कम है.

फसल 2025 (लाख हेक्टेयर) 2026 (लाख हेक्टेयर) बदलाव (%)
धान 360.67 344.78 -4.4%
दलहन 105.73 103.78 1.8
श्री अन्न/मोटे अनाज 173.21 168.50 -2.7%
तिलहन 175.01 180.20 +3.0%
गन्ना 58.62 58.31 -0.5%
कपास 106.42 106.01 -0.4%
सभी खरीफ फसलें 985.89 967.92 -1.8%

नोट: आंकड़े 7 अगस्त 2026 तक के हैं. स्रोत: कृषि मंत्रालय

खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की बुवाई 7 अगस्त तक 344.78 लाख हेक्टेयर में हुई है. पिछले साल इसी अवधि में 360.67 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई थी. इस तरह धान का रकबा 4.2 फीसदी कम है. 31 जुलाई तक यह अंतर 2.2 फीसदी था, यानी पिछले एक हफ्ते में धान की रोपाई की रफ्तार धीमी रही है. हालांकि, प्रमुख उत्पादक राज्यों में ज्यादा रकबा होने से सरकार को खरीफ 2026 में 1231.5 लाख टन चावल उत्पादन लक्ष्य में बड़ी कमी की आशंका नहीं है.

दलहन की बुवाई में सुधार, तिलहन का रकबा बढ़ा

दलहन की बुवाई 103.78 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 105.73 लाख हेक्टेयर थी. हालांकि, दलहन की बुवाई में कमी अब घटकर 1.8 फीसदी रह गई है, जो पिछले सप्ताह 6.3 फीसदी थी. वहीं, तिलहन का रकबा बढ़कर 180.20 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल 175.01 लाख हेक्टेयर था. सोयाबीन, मूंगफली और तिल की बुवाई बढ़ने से तिलहन का रकबा पिछले साल से आगे निकल गया है. सरकार ने खरीफ 2026 के लिए कुल 289.2 लाख टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है.

अरहर-मूंग की बुवाई घटी, उड़द और मूंगफली का रकबा बढ़ा

खरीफ सीजन में दलहन की प्रमुख फसलों में अरहर और मूंग की बुवाई पिछले साल के मुकाबले कम हुई है. अरहर का रकबा 37.53 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल 40.14 लाख हेक्टेयर था. इसी तरह मूंग की बुवाई 33.21 लाख से घटकर 31.37 लाख हेक्टेयर रह गई. वहीं, उड़द का रकबा बढ़कर 22.86 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि पिछले साल यह 20.29 लाख हेक्टेयर था. तिलहन में सोयाबीन का रकबा मामूली बढ़कर 119.92 लाख हेक्टेयर हो गया है. मूंगफली की बुवाई भी बढ़कर 46.82 लाख हेक्टेयर पहुंच गई, जो पिछले साल 43.11 लाख हेक्टेयर थी. वहीं, कपास का रकबा थोड़ा घटकर 106.01 लाख हेक्टेयर रहा. वहीं, जूट और मेस्टा की बुवाई बढ़कर 6.34 लाख हेक्टेयर हो गई.

मोटे अनाज की बुवाई 7.5 फीसदी कम

मोटे और पोषक अनाजों का कुल रकबा 7.5 फीसदी घटकर 157.77 लाख हेक्टेयर रह गया है. पिछले साल यह 170.60 लाख हेक्टेयर था. ज्वार की बुवाई 12.16 लाख हेक्टेयर, बाजरा 57.44 लाख हेक्टेयर, रागी 1.87 लाख हेक्टेयर और मक्का 83.56 लाख हेक्टेयर में हुई है. इन सभी फसलों का रकबा  पिछले साल से कम है.आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 10 अगस्त के बीच देश में मानसूनी बारिश सामान्य से 12 फीसदी कम रही है. इस दौरान 741 में से 345 जिलों में बारिश की कमी 20 फीसदी या उससे ज्यादा रही.

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