बिहार में कितना है दलहन का रकबा, MSP पर मसूर खरीदी से किन जिलों को फायदा.. सरकार की क्या है स्कीम

बिहार अपनी जरूरत का सिर्फ 33 फीसदी ही दाल उत्पादन कर पा रहा है. राज्य में लगभग 4.48 लाख हेक्टेयर में दालों की खेती होती है, जिससे करीब 3.93 लाख मीट्रिक टन उत्पादन मिलता है. दाल को महत्वपूर्ण फसल मानते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाई जा रही है.

नोएडा | Updated On: 25 Mar, 2026 | 10:10 PM

Bihar News: बेमौसम बारिश से फसल बर्बादी के बीच दलहन किसानों के लिए राहतभरी खबर है. नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) प्रदेश में पहली न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मसूर की खरीदी करेगा. इसके लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है. राज्य सरकार ने इस बार 32,000 मीट्रिक टन मसूर खरीदने का लक्ष्य रखा है. सरकार को उम्मीद है कि इससे दलहन किसानों को उनकी उपज का बेहतर रेट मिलेगा. खासकर मोकामा टाल क्षेत्र के किसानों को इससे ज्यादा फायदा मिलेगा. क्योंकि यह क्षेत्र मसूर की खेती के लिए पूरे बिहार में फेमस है. यहां पर किसान बड़े स्तर पर मसूर उगाते हैं.

फिलहाल, बिहार अपनी जरूरत का सिर्फ 33 फीसदी ही दाल उत्पादन कर पा रहा है. राज्य में लगभग 4.48 लाख हेक्टेयर में दालों की खेती होती है, जिससे करीब 3.93 लाख मीट्रिक टन उत्पादन मिलता है. दाल को महत्वपूर्ण फसल मानते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाई जा रही है. सरकार मसूर की खेती को बढ़ावा देने के लिए उन्नत बीजों पर 80 फीसदी तक सब्सिडी देती है. जबकि मूंग को हरित फसल के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है. बेहतर बीजों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है.

बिहार में दलहन का कुल रकबा

मोकामा टाल क्षेत्र दाल उत्पादन का प्रमुख केंद्र है. मौजूदा समय में सरकार ने दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ रुपये के साथ आत्मनिर्भर मिशन शुरू किया है, जिसका लक्ष्य अगले 5 साल में दाल का उत्पादन  दोगुना करना है. वहीं, दाल की खेती में गिरावट के कारण बिहार में हर व्यक्ति के लिए दाल की उपलब्धता केवल 8.25 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि आवश्यक मात्रा 25 ग्राम है. 2023-24 में दाल का उत्पादन लगभग 2.85 लाख मीट्रिक टन रह गया, जिसे अब बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं. मुख्य दाल उत्पादन वाले क्षेत्र पटना, नालंदा, लखीसराय, मुंगेर और भागलपुर के टाल-दियारा इलाके हैं.

वहीं, कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के ‘मसूर’ की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्यपर खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इससे पहले राज्य सरकार धान और गेहूं  को उनके MSP पर खरीदती थी. उन्होंने कहा कि प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत, अगर किसी फसल का बाजार भाव कम होता है, तो केंद्र MSP पर खरीद की अनुमति देता है.

32,000 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य

यादव ने कहा कि मसूर राज्य में MSP के तहत आने वाली तीसरी फसल है और इस फसल के 32,000 मीट्रिक टन खरीदे जाएंगे. केंद्र ने 2025- 26 रबी सीजन के लिए मसूर की खरीद का MSP 7000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान का धन्यवाद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कदम उठा रही है. उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर लाभ देने के लिए राज्य सरकार खरीद केंद्र बनाएगी, किसानों का पंजीकरण आसान करेगी, मसूर के भंडारण की व्यवस्था करेगी और किसानों को खरीदी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत प्रणाली तैयार करेगी.

60 दिन में पूरी होगी खरीदी

यादव ने कहा कि मसूर की खरीद और प्रोक्योरमेंट सरकार द्वारा तय तारीख से शुरू होगी और इसे पूरा करने की समय सीमा 60 दिन होगी. किसानों को भुगतान तीन दिन के अंदर कर दिया जाएगा. पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और उनके आधार नंबर पर आधारित होगी. उन्होंने किसानों से अपील की कि इस योजना का लाभ लेने के लिए अपना पंजीकरण जरूर कराएं.

 

Published: 26 Mar, 2026 | 06:45 AM

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