लीची फसल पर फलीभेदक का हमला, किसानों के लिए एडवाइजरी, जानें कौन सी दवा का कब करें छिड़काव
Litchi Farming: राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की एडवाइजरी के अनुसार, मौजूदा मौसम में लीची पर कीटों का खतरा बढ़ जाता है, खासकर फल बेधक कीट का. इससे बचाव के लिए समय पर कीटनाशकों का छिड़काव जरूरी है. सही मात्रा, सही समय और सावधानियों का पालन करके किसान बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता हासिल कर सकते हैं.
Litchi Pest Control Tips: लीची की फसल पर इस समय कीटों का खतरी मंडरा रहा है. अगर आपने समय रहते सही कदम नहीं उठाए, तो मेहनत की पूरी कमाई कीटों के हमले में बर्बाद हो सकती है. मौजूदा मौसम लीची के लिए जितना फायदेमंद है, उतना ही खतरनाक भी. क्योंकि यही समय है जब फल बेधक कीट तेजी से फसल को नुकसान पहुंचाते हैं. बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, इस दौरान किसानों को सतर्क रहते हुए सही समय पर वैज्ञानिक तरीके अपनाने की जरूरत है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके और उत्पादन बेहतर हो सके.
फल बेधक कीट से सावधान
इस समय लीची की शाही किस्म में फल बेधक कीट का खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता है. यह कीट सीधे फल को नुकसान पहुंचाता है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं. इसके नियंत्रण के लिए किसानों को समय पर दवा का छिड़काव करना जरूरी है.
नियंत्रण के लिए ये उपाय अपनाए जा सकते हैं:
- थियाक्लोप्रिड 0.6 मिली प्रति लीटर प्लस लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 0.6 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर
- नोवेल्यूरॉन 5.25 फीसदी प्लस इंडोक्साकार्ब 4.5 फीसदी SC 1.5 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें
ये दवाएं कीटों को नियंत्रित कर फसल को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं.
बोरॉन का छिड़काव क्यों है जरूरी?
फल की गुणवत्ता और सही विकास के लिए बोरॉन एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय घुलनशील बोरॉन (21 फीसदी) का छिड़काव करना बेहद फायदेमंद होता है. इसे पानी में मिलाकर स्प्रे किया जाता है. इससे फलों का आकार बेहतर होता है, गुणवत्ता में सुधार आता है और साथ ही फल गिरने की समस्या भी कम होती है.
किसान चाहें तो इसे कीटनाशक के साथ मिलाकर भी छिड़काव कर सकते हैं.
तुड़ाई से पहले अंतिम छिड़काव
लीची की फसल को अंतिम समय तक सुरक्षित रखने के लिए तुड़ाई से 10-12 दिन पहले एक अंतिम छिड़काव करना जरूरी है. इससे फल बेधक कीट से आखिरी सुरक्षा मिलती है.
इसके लिए किसान इन विकल्पों में से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं:
- इमामेक्टिन बेंजोएट 5 फीसदी SG 0.8 ग्राम प्रति लीटर पानी
- स्पाइनोसैड 45 फीसदी SC 1.6 मिली प्रति 5 लीटर पानी
- स्पिनेटोरम 11.7 फीसदी SC 1.0 मिली प्रति लीटर पानी
सही मात्रा में इनका उपयोग करने से फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है.
रोग नियंत्रण और गुणवत्ता सुधार
फसल को बीमारियों से बचाने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए थायोफेनेट मिथाइल का छिड़काव भी किया जा सकता है. यह दवा फफूंदजनित रोगों को नियंत्रित करने में कारगर होती है.
किसानों के लिए जरूरी सावधानियां
बेहतर परिणाम पाने के लिए सिर्फ दवा का छिड़काव ही काफी नहीं, बल्कि कुछ जरूरी सावधानियों का पालन भी करना चाहिए:
- छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय करें
- दवाओं का इस्तेमाल निर्धारित मात्रा में ही करें
- बाग में हल्की सिंचाई कर नमी बनाए रखें
- छिड़काव के दौरान मास्क और दस्ताने जैसे सुरक्षा उपकरण जरूर पहनें
लीची की खेती में सही समय पर सही कदम उठाना बेहद जरूरी है. यदि किसान इन वैज्ञानिक सलाहों का पालन करते हैं, तो वे न केवल कीटों और बीमारियों से अपनी फसल को बचा सकते हैं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता और ज्यादा उत्पादन भी हासिल कर सकते हैं. यह एडवाइजरी किसानों के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह है, जो उन्हें नुकसान से बचाकर मुनाफे की ओर ले जा सकती है.