धान की खेती में अजोला का कमाल, 25-30 फीसदी तक घटेगा खाद खर्च और बढ़ेगा उत्पादन

धान की खेती में अजोला किसानों के लिए एक उपयोगी और कम खर्च वाला विकल्प बनकर उभर रहा है. यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, रासायनिक खाद की जरूरत घटाने और फसल की बेहतर बढ़वार में मदद करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका उपयोग खेती को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बना सकता है.

नोएडा | Updated On: 7 Jun, 2026 | 08:39 PM

Azolla Farming: धान की खेती में लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान अब प्राकृतिक विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं. ऐसे ही एक उपयोगी विकल्प का नाम है अजोला. शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST), जम्मू के अनुसार अजोला एक जलजीव फर्न है, जो पानी की सतह पर तेजी से बढ़ता है. यह प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिर करता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करता है. इसके उपयोग से रासायनिक खाद पर निर्भरता कम की जा सकती है, जिससे खेती की लागत घटती है और किसानों को अधिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ती है.

अजोला क्या है और क्यों है खास?

अजोला एक छोटा जलीय पौधा है, जो तालाब, टैंक और धान के खेतों  में आसानी से उगाया जा सकता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह वातावरण से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में पहुंचाने का काम करता है. इससे फसलों को प्राकृतिक पोषण मिलता है. विशेषज्ञों के अनुसार अजोला मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने में भी मदद करता है. यही कारण है कि इसे टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. धान की खेती में इसका उपयोग किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

रासायनिक खाद की बचत और मिट्टी की उर्वरता में सुधार

विश्वविद्यालय के अनुसार, अजोला के उपयोग से यूरिया और अन्य रासायनिक खादों  की जरूरत 25 से 30 प्रतिशत तक कम की जा सकती है. इससे खेती की लागत घटती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है. अजोला को हरी खाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. जब इसे खेत में मिलाया जाता है, तो यह धीरे-धीरे सड़कर मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाता है. इससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन में सुधार देखने को मिलता है.

ऐसे तैयार करें अजोला

अजोला की खेती बहुत आसान और कम खर्च वाली मानी जाती है. इसके लिए 4×2×1 फीट का टैंक तैयार किया जाता है. टैंक में साफ पानी और थोड़ी मिट्टी डाली जाती है. इसके बाद 1 से 2 किलोग्राम अजोला डालकर पानी की गहराई 5 से 7 सेंटीमीटर तक रखी जाती है. अजोला की अच्छी वृद्धि के लिए सप्ताह में एक बार गोबर का घोल या अन्य पोषक तत्व डाले  जाते हैं. लगभग 7 से 10 दिनों के भीतर अजोला कटाई के लिए तैयार हो जाता है. नियमित कटाई से इसका उत्पादन लगातार जारी रहता है.

धान की खेती और पशुपालन दोनों में फायदेमंद

धान की रोपाई  के बाद खेत में अजोला डालने से यह पानी की सतह पर फैल जाता है और धीरे-धीरे नाइट्रोजन छोड़ता रहता है. इससे फसल को लगातार पोषण मिलता है. इसके अलावा अजोला पानी की सतह को ढक लेता है, जिससे खरपतवार की वृद्धि भी कम हो जाती है. अजोला पशुओं के लिए भी एक पौष्टिक चारा माना जाता है. इसमें 20 से 30 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है, जो दूध और मांस उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकता है. साथ ही यह पानी में मौजूद कुछ हानिकारक तत्वों को अवशोषित कर जल की गुणवत्ता सुधारने में भी सहायक है.

किसानों के लिए उपयोगी विकल्प

शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू का मानना है कि अजोला खेती और पशुपालन दोनों क्षेत्रों में किसानों  के लिए लाभकारी साबित हो सकता है. कम लागत, बेहतर मिट्टी, रासायनिक खाद की बचत और अतिरिक्त पशु आहार जैसी खूबियों के कारण अजोला भविष्य की टिकाऊ कृषि का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है. किसानों के लिए यह एक ऐसा विकल्प है, जो कम खर्च में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफे का रास्ता खोल सकता है.

Published: 7 Jun, 2026 | 10:32 PM

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