मार्च में मक्का की फसल पर मंडरा रहा खतरा! किसान जरूर करें ये 5 जरूरी काम, वरना उत्पादन हो सकता है कम

Maize Farming: मार्च का महीना मक्का की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान सही समय पर निराई-गुड़ाई, सिंचाई और कीट नियंत्रण करने से फसल की वृद्धि बेहतर होती है. खासकर तना छेदक जैसे कीटों से बचाव जरूरी है. अगर किसान इन जरूरी कृषि कार्यों पर ध्यान दें, तो उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और नुकसान से बचा जा सकता है.

नोएडा | Published: 21 Mar, 2026 | 10:18 AM

Makka Ki Kheti: मार्च का महीना किसानों के लिए खेती के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है. खासकर बसंत कालीन मक्का की खेती करने वाले किसानों को इस समय फसल की सही देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए. कृषि विभाग, बिहार सरकार के अनुसार, अगर इस दौरान समय पर कृषि कार्य किए जाएं तो फसल की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च में खेत की सफाई, सिंचाई और कीट नियंत्रण जैसे काम समय पर करना बहुत जरूरी होता है.

मक्का की फसल में करें नियमित देखभाल

बसंत कालीन मक्का की खेती में इस समय निराई-गुड़ाई करना बहुत महत्वपूर्ण होता है. इससे खेत में उगने वाले खरपतवार हट जाते हैं और पौधों को पोषण आसानी से मिल पाता है. साथ ही समय-समय पर सिंचाई करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. अगर किसान इन छोटे-छोटे कार्यों पर ध्यान दें, तो मक्का की फसल मजबूत बनती है.

खतरनाक कीटों से फसल को बचाना जरूरी

मक्का की फसल में इस समय कुछ कीटों का खतरा बढ़ जाता है, जो फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. खासकर तना छेदक (स्टेम बोरर) जैसे कीट पौधों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं. इसलिए किसानों को खेत में नियमित निगरानी करनी चाहिए और कीटों के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत उपाय करने चाहिए.

विशेषज्ञों के अनुसार, खेत में बर्ड पर्च यानी पक्षियों के बैठने की व्यवस्था करना भी फायदेमंद होता है. इससे पक्षी कीटों को खाकर उनकी संख्या कम करने में मदद करते हैं, जो एक प्राकृतिक तरीका है.

कीट नियंत्रण के लिए अपनाएं सही उपाय

अगर खेत में कीटों का प्रकोप बढ़ने लगे, तो आवश्यकतानुसार कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. कृषि विभाग की सलाह के अनुसार कार्बोफ्यूरान 3G या कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4G जैसे दानेदार कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे लगभग 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना लाभदायक माना जाता है. हालांकि किसानों को दवा का उपयोग हमेशा विशेषज्ञों की सलाह और सही मात्रा के अनुसार ही करना चाहिए, ताकि फसल और मिट्टी दोनों सुरक्षित रहें.

सही समय पर कृषि कार्य से मिलेगा बेहतर उत्पादन

मार्च के महीने में यदि किसान खेत की साफ-सफाई, सिंचाई और कीट नियंत्रण जैसे जरूरी कामों पर ध्यान दें, तो मक्का की फसल तेजी से बढ़ती है और पौधे स्वस्थ रहते हैं. अच्छी देखभाल से न सिर्फ फसल का विकास बेहतर होता है, बल्कि उत्पादन और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो सकती है.

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