मक्का बेचने से पहले जान लें ये जरूरी संकेत, वरना फंगस और कम वजन से घटेगा भाव

मक्का किसानों के लिए सही समय पर कटाई करना बेहद जरूरी माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार जल्दी या देर से कटाई करने पर दानों का वजन और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. फसल पकने के संकेत, सही नमी स्तर और वैज्ञानिक भंडारण तरीकों को अपनाकर किसान फंगस और नुकसान से बचते हुए बेहतर बाजार भाव पा सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 12 Jul, 2026 | 07:46 PM

Maize Harvesting Tips: मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए फसल की सही समय पर कटाई करना बेहद जरूरी माना जाता है. अगर किसान जल्दबाजी में कच्ची फसल काट लेते हैं या कटाई में ज्यादा देरी कर देते हैं, तो इसका सीधा असर दानों की क्वालिटी और बाजार भाव पर पड़ता है. कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, सही समय पर कटाई करने से दानों का वजन, चमक और गुणवत्ता बनी रहती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है.

विशेषज्ञ के अनुसार, फसल पकने के दौरान पौधों में कई बदलाव दिखाई देने लगते हैं. इन्हीं संकेतों को पहचानकर किसान सही समय तय कर सकते हैं. समय पर कटाई करने से फंगस, सड़न और दानों के झड़ने जैसी समस्याओं से भी बचा जा सकता है.

ऐसे पहचानें कि मक्का कटाई के लिए तैयार है

मक्का की फसल  पकने के बाद पौधे की बाहरी पत्तियां धीरे-धीरे हरे रंग से पीली और फिर भूरी होने लगती हैं. जब भुट्टे को ढकने वाली पत्तियां पूरी तरह सूख जाएं, तो यह कटाई का पहला संकेत माना जाता है. फसल की परिपक्वता जांचने का सबसे वैज्ञानिक तरीका ‘ब्लैक लेयर’ टेस्ट बताया गया है. इसके लिए किसान भुट्टे से कुछ दाने निकालकर उनके निचले हिस्से को देखें. अगर वहां काली परत या छोटा काला धब्बा दिखाई देने लगे, तो समझना चाहिए कि दाने पूरी तरह पक चुके हैं और उनमें पोषक तत्वों  का प्रवाह रुक गया है. इसके अलावा दानों को दबाकर भी पहचान की जा सकती है. शुरुआत में दानों के अंदर दूधिया तरल होता है, लेकिन पकने के बाद दाने पूरी तरह सख्त हो जाते हैं. अगर नाखून से दबाने पर दानों में निशान न बने, तो यह कटाई का सही समय माना जाता है.

नमी का सही स्तर और देरी के नुकसान

कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, मक्के की कटाई  तब करनी चाहिए जब दानों में नमी का स्तर लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक रह जाए. ज्यादा नमी वाले दानों की कटाई करने से उनमें फंगस और सड़न का खतरा बढ़ जाता है. वहीं कटाई में ज्यादा देरी करने से भी नुकसान हो सकता है. खेत में लंबे समय तक सूखी फसल खड़ी रहने पर बारिश, तेज हवा और कीटों का खतरा बढ़ जाता है. कई बार भुट्टे झुककर नीचे लटकने लगते हैं और दाने खेत में ही गिरने लगते हैं, जिससे पैदावार कम हो जाती है. समय से पहले कटाई करने पर भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. कच्चे दाने सुखाने के दौरान सिकुड़ जाते हैं, जिससे वजन कम हो जाता है और बाजार में उनकी कीमत घट जाती है.

कटाई के बाद ऐसे करें सुरक्षित भंडारण

मक्का की कटाई के बाद सही तरीके से सुखाना बेहद जरूरी होता है. विशेषज्ञों के अनुसार भुट्टों से दाने निकालने के बाद उन्हें अच्छी धूप में सुखाना चाहिए. दानों में नमी का स्तर 12 से 14 प्रतिशत तक आने के बाद ही उन्हें भंडारण के लिए रखना चाहिए. अगर अधिक नमी वाले  दानों को स्टोर किया जाए तो उनमें फंगस लगने और खराब होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए किसानों को साफ और सूखी जगह पर ही भंडारण करना चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान फसल पकने की सही पहचान कर समय पर कटाई करें और वैज्ञानिक तरीके से भंडारण करें, तो मक्का की क्वालिटी लंबे समय तक बनी रह सकती है और बाजार में बेहतर दाम मिल सकते हैं.

Published: 12 Jul, 2026 | 09:22 PM

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