असम राइफल्स को दूध सप्लाई करेगा राष्ट्रीय सहकारी डेयरी महासंघ.. 44 करोड़ की होगी अतिरिक्त कमाई

एनसीडीएफआई और असम राइफल्स के बीच हुए नए समझौते से पूर्वोत्तर भारत में तैनात सैन्य इकाइयों तक दूध और डेयरी उत्पादों की आपूर्ति बढ़ेगी. इस पहल से डेयरी सहकारी समितियों को सालाना करीब 44 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है, जबकि क्षेत्र के डेयरी किसानों और सहकारी संस्थाओं को भी लाभ होगा.

नोएडा | Updated On: 3 Jun, 2026 | 07:52 AM

Milk production: राष्ट्रीय सहकारी डेयरी महासंघ (NCDFI) और असम राइफल्स के बीच मंगलवार को एक समझौता हुआ है, जिसके तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र में तैनात असम राइफल्स की इकाइयों को दूध और डेयरी उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी. इस पहल से देश की डेयरी सहकारी समितियों को सालाना करीब 44 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है.

अभी तक अमूल, नंदिनी और वारणा जैसी सहकारी डेयरियां असम राइफल्स की इकाइयों को यूएचटी दूध और दूध पाउडर की आपूर्ति कर रही थीं. नई सहमति के बाद अधिक डेयरी सहकारी समितियां इस व्यवस्था में शामिल हो सकेंगी और पूर्वोत्तर के ज्यादा सैन्य ठिकानों तक दूध एवं डेयरी उत्पाद  पहुंचाए जाएंगे. पूर्वोत्तर राज्यों में स्थानीय स्तर पर दूध उत्पादन सीमित होने के कारण वहां के लोग लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले यूएचटी दूध और दूध पाउडर का अधिक उपयोग करते हैं.

दूध और मक्खन की आपूर्ति की जाएगी

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के विस्तार के बाद अब पूर्वोत्तर के सात राज्यों में स्थित असम राइफल्स के 72 सैन्य प्रतिष्ठानों तक ताजा दूध और मक्खन की आपूर्ति की जाएगी. इसके अलावा अमूल इन इकाइयों को पनीर और माल्ट आधारित खाद्य उत्पाद  भी उपलब्ध कराएगा. एनसीडीएफआई के अध्यक्ष और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन मीनेश शाह ने कहा कि महासंघ पिछले 40 वर्षों से भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस को डेयरी उत्पादों की आपूर्ति करता रहा है. उन्होंने कहा कि असम राइफल्स के साथ यह नया समझौता इस लंबे सहयोग को और मजबूत बनाएगा.

जवानों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण दूध

एनसीडीएफआई के अध्यक्ष मीनेश शाह ने कहा कि इस तरह की पहलें दिखाती हैं कि देश की डेयरी सहकारी समितियां रक्षा और अर्धसैनिक बलों की जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम हैं. वहीं, असम राइफल्स के महानिदेशक विकास लखेरा लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा ने कहा कि दूरदराज के इलाकों में तैनात जवानों के लिए समय पर गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों के मित्र के रूप में पहचान रखने वाली असम राइफल्स इस पहल को क्षेत्रीय सहकारी समितियों के जरिए डेयरी किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें मजबूत बनाने का एक अवसर भी मानती है.

सालाना दूध उत्पादन करीब 16 लाख टन

बता दें कि असम उत्तर-पूर्व भारत का सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य है और क्षेत्र के कुल दूध उत्पादन  में इसकी हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है. राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य रखा है और दुग्ध किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 5 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी योजना भी शुरू की है. हालांकि राज्य का सालाना दूध उत्पादन करीब 16 लाख टन है, फिर भी प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता केवल 73 ग्राम प्रतिदिन है, जो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा सुझाए गए 300 ग्राम प्रतिदिन के मानक से काफी कम है.

Published: 3 Jun, 2026 | 07:52 AM

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