कम लागत में ज्यादा कमाई, जैविक केले की खेती बनी किसानों के लिए बड़ा मुनाफे का सौदा

जैविक तरीके से की जा रही केले की खेती किसानों के लिए लाभ का बड़ा स्रोत बनती जा रही है. कम पौधों और प्राकृतिक खाद के इस्तेमाल से उत्पादन बेहतर हो रहा है. एक गुच्छा अधिक कीमत पर बिक रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक लागत घटाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद कर रही है.

नोएडा | Published: 21 Jun, 2026 | 12:23 PM

Banana Cultivation: आजकल कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर जैविक (ऑर्गेनिक) खेती की ओर बढ़ रहे हैं. केले की खेती में भी यह बदलाव साफ देखा जा रहा है. कुछ किसान कम पौधे लगाकर और प्राकृतिक खाद का उपयोग करके बेहतर उत्पादन ले रहे हैं. इस तरीके से केले के पौधे मजबूत होते हैं और फलन (घवद) बड़ा और गुणवत्तापूर्ण बनता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार सही देखभाल और संतुलित पोषण से केले की खेती में लागत कम और मुनाफा ज्यादा हो सकता है.

कम पौधे, ज्यादा पोषण और बड़ा उत्पादन

कई किसान अब एक स्थान पर सीमित पौधे ही रखते हैं, ताकि हर पौधे को पर्याप्त पोषण मिल सके. आमतौर पर एक जगह अधिक पौधे लगाने से उत्पादन कमजोर हो जाता है, लेकिन कम पौधों के कारण पौधे तेजी से बढ़ते हैं और फल मजबूत बनता है. इस तकनीक में पानी और खाद  का सही उपयोग किया जाता है, जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और रोग भी कम लगते हैं. यही कारण है कि केले का एक गुच्छा (घवद) काफी बड़ा और भारी हो जाता है, जिसे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है.

पूरी तरह प्राकृतिक खेती से बढ़ी मांग

इस खेती की खास बात ये है कि इसमें किसी भी तरह की रासायनिक खाद या कीटनाशक  का उपयोग नहीं किया जाता. पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से तैयार होने के कारण यह केला सुरक्षित और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. आज के समय में लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं, इसलिए जैविक फलों की मांग तेजी से बढ़ रही है. यह केला कच्चे रूप में सब्जी, कोफ्ता और भुजिया बनाने में उपयोग किया जाता है. वहीं पकने पर इसका स्वाद और मिठास सामान्य केले से अधिक होती है. शादी और बड़े आयोजनों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है.

कृषि प्रशिक्षण से मिली नई दिशा

कृषि विज्ञान केंद्रों से मिले प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जानकारी ने किसानों की सोच बदल दी है. कई किसान अब नई तकनीक अपनाकर  सब्जियों और फलों के बीज भी खुद तैयार कर रहे हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें और जैविक पद्धति अपनाएं तो कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है. विशेषज्ञ ये भी मानते हैं कि ऐसी खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

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