90 फीसदी पानी और 14 फीसदी मिठास ने बढ़ाई जैविक तरबूज की डिमांड, विशेषज्ञों ने बताया खास
Organic watermelon demand rises: राजस्थान के जयपुर समेत अन्य जिलों और इलाकों में जैविक तरीके से उगाए गए तरबूज की डिमांड में इजाफा देखा जा रहा है. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि जैविक तरबूज की स्वास्थ्यवर्धक खूबियों के चलते इसे खूब पसंद किया जा रहा है और ऊंचा दाम मिल रहा है.
केंद्र सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है ताकि लोगों को स्वास्थ्य वर्धक कृषि उत्पाद मिल सकें. इसी के तहत किसानों ने जैविक विधि से खेती कर रहे हैं और उत्पादों को बाजार में बढ़ी हुई कीमत पर बेच पा रहे हैं. इन दिनों राजस्थान के जयपुर समेत अन्य जिलों और इलाकों में जैविक तरीके से उगाए गए तरबूज की डिमांड में इजाफा देखा जा रहा है. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि जैविक तरबूज में 90 फीसदी पानी की मात्रा और 14 फीसदी तक मिठास होने से यह स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है. गर्मी में इसके सेवन से शरीर में पानी की पूर्ति और शर्करा की पूर्ति तुरंत होती है.
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में जैविक तरबूज की जमकर खेती
राजस्थान के जयपुर में इन दिनों जैविक तरीके से जायद सीजन की फसलों को खूब किया गया है. इनमें तरबूज की खेती में किसानों ने दिलचस्पी दिखाई है. जयपुर ग्रामीण के चौंमू, गोविन्दगढ, जोबनेर क्षेत्र के किसान इन दिनों बडी तादाद में जैविक तरबूज की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. ऑर्गेनिक तरबूज बेहद रसीले और मीठे हैं, जिसकी वजह से यह बाजार में हाथोंहाथ बिक रहे हैं. गर्मी में इनकी मांग तेजी से देखी गई है.
जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय ने दिए बीज और तकनीक
जोबनेर स्थित श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. पुष्पा उज्जैनिया ने मीडिया को बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में जैविक विधि से तरबूज उगाया जा रहा है. इसमें किसी तरह का रासायनिक खाद या कीटनाशक उपयोग नहीं किया गया. गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और नीम-आधारित जैविक दवाओं से फसल तैयार की गई है. विश्वविद्यालय के उन्नत बीजों और तकनीक से किसान तरबूज की बंपर उपज हासिल कर रहे हैं.
मिठास और पानी की मात्रा भरपूर
डॉ. उज्जैनिया ने कहा कि ऑर्गेनिक तरबूज में टीएसएस यानी मिठास 12 से 14 फीसदी तक है, जो सामान्य तरबूज से ज्यादा है. तरबूज में पानी की मात्रा 90 फीसदी से ज्यादा होने से यह लू मे काफी फायदेमंद होता है. जैविक तरबूज गर्मी में शरीर को तुरंत ठंडक देता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है. केमिकल फ्री होने के कारण सेहत के लिए भी फायदेमंद है. सिर्फ गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और नीम आधारित दवाएं काम में ली जाती हैं. साथ ही डायबिटीज, बीपी और किडनी के मरीज भी इसे खा सकते हैं.
जैविख तरबूज का खेत और नीचे किसान नानू राम.
किसानों को 35 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा
विश्वविद्यालय में तैयार तरबूज को देखने के लिए आसपास के किसान और व्यापारी पहुंच रहे हैं. बाजार में 30-35 रुपये किलो बिकने से किसानों को भी जैविक खेती की प्रेरणा मिल रही है. जैविक तरीके से तरबूज उगाने वाले किसान नानू राम ने कहा कि खेत से ही व्यापारी हाथोंहाथ तरबूज की उपज खरीदकर ले जा रहे हैं. इससे किसानों को अतिरिक्त कमाई हो रही है और बाजार जाकर बेचने का झंझट और परिवहन खर्च भी नहीं झेलना पड़ रहा है.