धान में बंपर पैदावार का सीक्रेट! 30वें दिन की एक गलती घटा सकती है पूरी उपज
धान की रोपाई के 30 दिन पूरे होते ही फसल सबसे अहम ग्रोथ स्टेज में पहुंच जाती है. इसी समय यूरिया की दूसरी खुराक, जिंक सल्फेट, 2-3 सेमी पानी और खरपतवार नियंत्रण अपनाने से मजबूत कल्ले निकलते हैं और बेहतर पैदावार की नींव तैयार होती है.
Paddy Farming: धान की फसल में रोपाई के बाद का पहला महीना सबसे अहम माना जाता है. यही वह समय होता है जब पौधे तेजी से कल्ले निकालते हैं और उन्हें पर्याप्त पोषण, संतुलित पानी तथा खरपतवार नियंत्रण की आवश्यकता होती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, 30वें दिन सही उर्वरक प्रबंधन अपनाने से पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और आगे चलकर दानों का भराव भी अच्छा मिलता है.
30वें दिन दें यूरिया की दूसरी खुराक
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार बताते हैं कि रोपाई के लगभग 30 दिन बाद धान वानस्पतिक विकास की अवस्था में पहुंच जाता है. इस समय प्रति एकड़ 30 से 40 किलोग्राम यूरिया का भुरकाव करना चाहिए. यूरिया देने से पहले खेत का अतिरिक्त पानी निकाल दें और मिट्टी में केवल हल्की नमी रहने दें. इससे नाइट्रोजन का अधिकतम अवशोषण होता है और पौधे तेजी से नए कल्ले निकालते हैं. यूरिया के साथ 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति एकड़ मिलाने से जिंक की कमी दूर होती है और खैरा रोग का खतरा कम हो सकता है.
क्यों जरूरी है नाइट्रोजन और जिंक?
नाइट्रोजन पौधों में क्लोरोफिल बनने की प्रक्रिया को बढ़ाता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण तेज होता है और पौधों का रंग गहरा हरा बना रहता है. संतुलित मात्रा में यूरिया मिलने से पौधों को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है, जो बाद में मजबूत तनों और बेहतर दाना बनने में मदद करती है. वहीं जिंक सल्फेट जड़ों के विकास, पत्तियों की मजबूती और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जिन खेतों में जिंक की कमी होती है, वहां पत्तियां पीली पड़ने और पौधों की बढ़वार रुकने की समस्या अधिक देखी जाती है.
खरपतवार और पानी का रखें विशेष ध्यान
30 दिन की अवस्था में खरपतवार सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं, क्योंकि वे मिट्टी से खाद और नमी का बड़ा हिस्सा खुद सोख लेते हैं. इसलिए समय पर निराई-गुड़ाई या उचित खरपतवार नियंत्रण अपनाना जरूरी है. खेत में पानी का स्तर 2 से 3 सेंटीमीटर बनाए रखना बेहतर माना जाता है. बहुत अधिक पानी भरने से जड़ों तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है, जबकि पूरी तरह सूखा खेत भी पौधों की बढ़वार को प्रभावित कर सकता है. संतुलित नमी कल्ले फूटने के लिए सबसे उपयुक्त रहती है.
सही समय पर करें खाद का भुरकाव
यूरिया का छिड़काव कभी भी दोपहर की तेज धूप में नहीं करना चाहिए. अधिक तापमान में नाइट्रोजन गैस के रूप में उड़ सकती है, जिससे खाद का नुकसान होता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, यूरिया का भुरकाव सुबह या देर शाम शांत मौसम में करना सबसे लाभदायक रहता है. खाद डालने के अगले दिन खेत में हल्की सिंचाई कर दें, ताकि यूरिया घुलकर जड़ों तक आसानी से पहुंच सके. साथ ही इस अवधि में तना छेदक और पत्ती लपेटक जैसे कीटों की नियमित निगरानी भी करें. समय पर पोषण, पानी और कीट प्रबंधन अपनाने से धान की फसल मजबूत होती है और अधिक पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है.