धान पर ‘बौना वायरस’ का खतरा! धीमी पड़ी रोपाई; अब तक सिर्फ 55 फीसदी रकबा कवर

हरियाणा में जून के दौरान सामान्य से कम बारिश और सदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रिक्ड ड्वार्फ वायरस (SRBSDV) के खतरे के कारण धान की रोपाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है. किसानों ने बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए रोपाई 10-15 दिन टाल दी. अब तक लक्ष्य का केवल 55-60 फीसदी क्षेत्र ही रोपाई के दायरे में आ पाया है.

नोएडा | Published: 4 Jul, 2026 | 11:52 AM

Haryana News: हरियाणा में इस बार धान की रोपाई की रफ्तार धीमी है. इसकी मुख्य वजह जून में सामान्य से कम बारिश और धान की फसल में फैलने वाले सदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रिक्ड ड्वार्फ वायरस (SRBSDV) का खतरा है. इस बीमारी को किसान फिजी या बौना वायरस के नाम से भी जानते हैं. वायरस के प्रकोप से बचने के लिए कई किसानों ने धान की रोपाई 10 से 15 दिन तक टाल दी. वहीं, बारिश कम होने से खेतों की तैयारी भी प्रभावित हुई, जिससे रोपाई का काम समय पर शुरू नहीं हो सका.

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, अब तक निर्धारित लक्ष्य का केवल 55 से 60 फीसदी क्षेत्र ही धान की रोपाई  के दायरे में आ पाया है. जबकि पिछले वर्षों में इसी अवधि तक करीब 70 फीसदी रोपाई का काम पूरा हो जाता था. हरियाणा सरकार ने वर्ष 2026 में 15.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और वायरस के प्रभाव को देखते हुए रोपाई की गति में बदलाव आ सकता है.

करनाल में 1.85 लाख हेक्टेयर है धान का रकबा

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा सरकार ने वर्ष 2026 में धान की खेती के लिए कई जिलों में लक्ष्य तय किए हैं. करनाल को सबसे अधिक 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य दिया गया है. इसके बाद कैथल (1.65 लाख हेक्टेयर), जींद (1.50 लाख हेक्टेयर), सिरसा (1.45 लाख हेक्टेयर), फतेहाबाद (1.35 लाख हेक्टेयर), कुरुक्षेत्र (1.20 लाख हेक्टेयर) और हिसार (1.05 लाख हेक्टेयर) का स्थान है. वहीं, यमुनानगर, अंबाला और सोनीपत में भी 90-90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है.

किसानों ने 25 जून के बाद ही रोपाई शुरू की

किसानों का कहना है कि पिछले साल जल्दी रोपी गई धान की फसल बौना वायरस  (ड्वार्फ वायरस) से काफी प्रभावित हुई थी. इसी वजह से इस बार किसान सतर्क हैं. हालांकि धान की रोपाई की आधिकारिक शुरुआत 15 जून से हुई थी, लेकिन कई किसानों ने बीमारी के खतरे को कम करने के लिए 25 जून के बाद ही रोपाई शुरू की. इससे इस सीजन में धान की रोपाई की रफ्तार धीमी रही है.

पर्याप्त वर्षा नहीं होने से कई खेतों में पानी की कमी

किसानों का कहना है कि उन्होंने बौना वायरस (ड्वार्फ वायरस) के खतरे को कम करने के लिए जानबूझकर धान की रोपाई 10 से 15 दिन देर से शुरू की है. किसान राजिंदर कुमार ने कहा कि पिछले साल जल्दी रोपी गई धान की फसल इस बीमारी से बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. कैथल के किसान ने कहा कि जून में कम बारिश होने के कारण भी रोपाई में देरी हुई. पर्याप्त वर्षा नहीं होने से कई खेतों में पानी की कमी रही, जिससे किसान समय पर रोपाई नहीं कर सके और उन्हें मौसम अनुकूल होने का इंतजार करना पड़ा.

इस वजह से किसानों ने देरी से शुरू की रोपाई

उप कृषि निदेशक (DDA) डॉ. वजीर सिंह ने माना कि बारिश की कमी  और बौना वायरस का डर, दोनों ही धान की रोपाई में देरी के प्रमुख कारण हैं. उन्होंने कहा कि कृषि विभाग किसानों को वायरस और अन्य फसल रोगों के प्रति जागरूक करने के लिए पहले ही अभियान चला चुका है. डॉ. सिंह ने किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार खेती करने की भी सलाह दी, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे और फसल का विकास बेहतर हो. वहीं, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है, जिससे धान की रोपाई में तेजी आने की उम्मीद है. हालांकि किसान अभी भी फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए सावधानी बरत रहे हैं.

Topics: