संसदीय समिति की केंद्र से सिफारिश, कहा- खाद सप्लाई के लिए स्थाई इमरजेंसी प्लान बनाए सरकार

संसदीय समिति ने उर्वरक सप्लाई में रुकावट से निपटने के लिए स्थाई आपात व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है. समिति ने वैकल्पिक स्रोत, बफर स्टॉक और बेहतर लॉजिस्टिक्स की तैयारी पर जोर दिया. साथ ही, नैनो यूरिया की जबरन बिक्री रोकने, DBT व्यवस्था में सुधार और एग्रीस्टैक-सॉइल हेल्थ कार्ड डेटा जोड़ने का सुझाव दिया है.

नोएडा | Updated On: 8 Aug, 2026 | 03:24 PM

एक संसदीय स्थायी समिति ने उर्वरकों की सप्लाई में अचानक आने वाली रुकावटों से निपटने के लिए केंद्र सरकार से स्थाई आपात व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है. समिति ने कहा कि संकट के समय किसानों को खाद की कमी न हो, इसके लिए वैकल्पिक सप्लाई स्रोत, पर्याप्त बफर स्टॉक और बेहतर लॉजिस्टिक्स की पहले से तैयारी जरूरी है. समिति ने गैस आवंटन की भी समय-समय पर समीक्षा करने की बात कही है, ताकि उर्वरक उत्पादन प्रभावित न हो. समिति के मुताबिक, पश्चिम एशिया में हालिया युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने जैसी परिस्थितियों से सबक लेते हुए भविष्य के लिए स्पष्ट आपातकालीन योजना तैयार करना जरूरी है.

दरअसल, पश्चिम एशिया में हालिया तनाव ने भारत की उर्वरक और LNG आयात पर निर्भरता को उजागर किया है. वहीं, रसायन और उर्वरक पर संसदीय स्थाई समिति ने कहा कि ऐसे संकट से निपटने के लिए देश में स्थाई आपात व्यवस्था होनी चाहिए. समिति के मुताबिक, ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य  बंद होने से भारत में यूरिया, DAP और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की सप्लाई पर गंभीर संकट का खतरा पैदा हो गया था. भारत खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में यूरिया और LNG आयात करता है. जलडमरूमध्य अभी पूरी तरह नहीं खुला है, इसलिए उर्वरकों की सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है. समिति ने संकट के दौरान तुरंत कार्रवाई के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाने की सिफारिश की है.

नैनो यूरिया की जबरन बिक्री पर सख्ती

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, संसदीय समिति ने सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ नैनो यूरिया जैसी गैर-सब्सिडी  वाली चीजों की जबरन बिक्री पर नाराजगी जताई है. समिति ने कहा कि सिर्फ एडवाइजरी जारी करने से समस्या का समाधान नहीं हुआ है, इसलिए अब ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है. समिति ने सुझाव दिया कि सब्सिडी वाले उर्वरक के साथ बेचे जाने वाले गैर-सब्सिडी उत्पादों की अलग डिजिटल बिलिंग अनिवार्य की जाए. इसके अलावा, ई-पॉइंट ऑफ सेल और इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम में ऐसी बिक्री की निगरानी की व्यवस्था हो. शिकायतों और कार्रवाई का केंद्रीय डेटा भी तैयार किया जाए.

खाद की सप्लाई और स्टॉक पर निगरानी

समिति ने फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 में बदलाव कर जबरन उत्पादों की बंडल बिक्री को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करने और दोषियों पर जुर्माना लगाने की सिफारिश की. साथ ही, हर फसल सीजन में उर्वरकों की सप्लाई, स्टॉक और आवाजाही की निगरानी के लिए स्थायी संयुक्त कमांड और मॉनिटरिंग सेल बनाने की मांग की.  संसदीय समिति ने देश में बार-बार होने वाली खाद की किल्लत और सप्लाई में रुकावट पर चिंता जताई है।.समिति ने कहा कि पर्याप्त राष्ट्रीय उपलब्धता के बावजूद किसानों तक खाद समय पर नहीं पहुंच रही है. इससे केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल और आखिरी स्तर तक वितरण व्यवस्था में कमियां सामने आई हैं.

व्यापक समीक्षा करने की मांग

समिति ने उर्वरकों पर DBT व्यवस्था की भी व्यापक समीक्षा करने की मांग की है. इसमें एग्रीस्टैक और सॉइल हेल्थ कार्ड के डेटा को जोड़ने जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है, समिति के मुताबिक, मौजूदा सब्सिडी व्यवस्था किसानों की जमीन, फसल और पोषक तत्वों की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त रूप से लक्षित नहीं है.

Published: 8 Aug, 2026 | 03:22 PM

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