हाईकोर्ट में किसानों की बड़ी जीत, धान की खेती पर रोक लगाने संबंधी सरकारी आदेश को पलटा गया 

HC Said Farmers free to cultivate crops of their choice: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ऊधम सिंह नगर के किसानों को राहत देते हुए जिला प्रशासन के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें गर्मियों में धान की खेती पर रोक लगाई गई थी. हाईकोर्ट ने कहा कि किसान अपनी पसंद की खेती कर सकते हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 24 Mar, 2026 | 11:32 AM

किसान अपने खेत में क्या उगाएंगे, किस फसल की कब खेती करेंगे यह उनका हक है. अब हाईकोर्ट ने भी कहा है कि किसान अपनी पसंद की फसल उगा सकते हैं. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि ऊधम सिंह नगर जिले के किसान धान की खेती नहीं करेंगे और प्रतिबंध लगा दिया है. राज्य सरकार की ओर से जिलाधिकारी के आदेश जारी किए जाने पर किसानों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्हें न्याय मिला है और उनकी लंबी लड़ाई को जीत हासिल हुई है.

उत्तराखंड HC ने कहा – किसान अपनी पसंद की फसल उगा सकते हैं

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ऊधम सिंह नगर के किसानों को राहत देते हुए जिला प्रशासन के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें गर्मियों में धान की खेती पर रोक लगाई गई थी. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट की एकल पीठ के जस्टिस पंकज पुरोहित ने फैसला सुनाया कि किसानों को बिना किसी कानूनी आधार के अपनी पसंद की फसल उगाने से नहीं रोका जा सकता.

भूजल स्थर गिरने का हवाला देकर प्रशासन ने लगाई थी रोक

राज्य सरकार की ओर से मजिस्ट्रेट ने फरवरी की शुरुआत में आदेश जारी किया था कि जिले के किसान गर्मियों में धान की बुवाई नहीं करेंगे. आदेश में कहा गया था कि गर्मियों में धान की खेती करने से भूजल स्तर में गिरावट आती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है. आदेश में गर्मियों में धान की खेती की अनुमति केवल उन खेतों में दी गई थी जहां पानी भरा रहता है, जबकि अन्य इलाकों में इस पर रोक लगा दी गई थी.

आदेश के खिलाफ 4 फरवरी को हाईकोर्ट पहुंचे किसान

इसके विरोध में किसानों ने 4 फरवरी 2026 के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए यह मामला दायर किया था. नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई की. इस दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि यह फैसला वैज्ञानिक संस्थानों से मिली जानकारियों पर आधारित था, जिनके अनुसार गर्मियों में धान की खेती से भूजल का स्तर गिरता है और मिट्टी की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है.

किसानों के वकीलों ने कहा कि प्रशासन इस तरह की पाबंदियां नहीं लगा सकता

याचिकाकर्ता किसानों की ओर से पेश हुए वकीलों बलविंदर सिंह, हर्षपाल सेखों और संदीप कोठारी ने तर्क दिया कि किसी भी कानूनी प्रावधान के अभाव में प्रशासन इस तरह की पाबंदियां नहीं लगा सकता. उन्होंने आगे यह भी कहा कि राज्य सरकार का हर काम कानून के दायरे में होना चाहिए. दोनों पक्षों की दलीलों को सुनकर हाईकोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया.

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का विवादित आदेश रद्द किया

विवादित आदेश को रद्द करते हुए कोर्ट ने सभी याचिकाओं को स्वीकार कर लिया और किसानों को अपने खेतों में गर्मियों में धान की खेती करने की अनुमति दे दी, चाहे वह जमीन पानी से भरी हो या न हो.  बता दें कि उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जैसे तराई क्षेत्रों में गर्मियों में धान (गरमा धान) की खेती होती है. ऊधमसिंह नगर में गरमा धान की बुवाई का रकबा लगभग 6,000 हेक्टेयर तक दर्ज किया जाता है. अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस साल धान का रकबा बढ़ने की संभावना है.

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Published: 24 Mar, 2026 | 11:32 AM
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