फरवरी की गर्मी ने बिगाड़ी फूलगोभी की सूरत! ‘फजीनेस’ से किसान परेशान, ऐसे बचाएं अपनी फसल

Fuzziness In Cauliflower: फरवरी की बढ़ती गर्मी की वजह से फूलगोभी की फसल प्रभावित हो रही है. तापमान बढ़ने के कारण फसल में ‘फजीनेस’ की समस्या सामने आ रही है, जिससे फूल बिखर रहे हैं और बाजार में सही दाम नहीं मिल पा रहा. विशेषज्ञों के मुताबिक, समय पर रोपाई और उचित फसल प्रबंधन से इस नुकसान से बचा जा सकता है.

नोएडा | Published: 25 Feb, 2026 | 11:47 AM

Phool Gobhi Ki Kheti: भारत के कई हिस्सों में इन दिनों मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. कभी ठंड तो कभी अचानक बढ़ती गर्मी, इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर रबी फसलों पर पड़ रहा है. खासतौर पर फूलगोभी की खेती करने वाले किसानों को फरवरी में बढ़ते तापमान के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि, खेतों में गोभी के फूल छोटे रह जा रहे हैं साथ ही उनका आकार भी बिखरा हुआ दिख रहा है. इस वजह से बाजार में उनकी कीमत भी कम हो रही है.

‘फजीनेस’ क्या है और क्यों होती है समस्या?

डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, फूलगोभी का सही विकास तापमान और रोपाई के समय पर निर्भर करता है. जब तापमान अनुकूल सीमा से अधिक हो जाता है, तो गोभी का ‘कर्ड’ यानी फूल सही तरह से विकसित नहीं हो पाता. इसके दाने ढीले और बिखरे हुए दिखाई देते हैं. इस स्थिति को तकनीकी भाषा में ‘फजीनेस’ कहा जाता है. फजीनेस की समस्या आने पर फूल ठोस नहीं बनता और उसका वजन भी घट जाता है. इससे न केवल क्वालिटी प्रभावित होती है, बल्कि किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है.

बढ़ता तापमान बना बड़ी चुनौती

फूलगोभी एक संवेदनशील फसल है, जिसे मध्यम ठंडा मौसम चाहिए. फरवरी में अचानक तापमान बढ़ने से फूल बनने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है. जो किसान देर से रोपाई करते हैं, उनकी फसल पर इसका ज्यादा असर देखने को मिलता है.

विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि फसल तैयार होने के समय गर्मी बढ़ जाए, तो कर्ड का गठन सही से नहीं हो पाता. इससे फूल का रंग, आकार और कसावट सभी प्रभावित होते हैं. इस वजह से मंडियों में ऐसी उपज की मांग कम हो जाती है और दाम गिर जाते हैं.

रोपाई का सही समय क्यों जरूरी?

डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता और बेहतर पैदावार के लिए रोपाई का समय सबसे अहम भूमिका निभाता है. कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर अक्टूबर के पहले पखवाड़े तक रोपाई कर लेनी चाहिए. इस समय बोई गई फसल को फूल बनने के दौरान पर्याप्त ठंडक मिलती है, जिससे कर्ड बड़ा, सफेद और ठोस बनता है.

यदि किसान निर्धारित समय के बाद रोपाई करते हैं, तो फसल के विकास के दौरान तापमान बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे क्वालिटी में गिरावट आ सकती है.

बाजार मूल्य पर सीधा असर

फूलगोभी की कीमत मुख्य रूप से उसके रंग, आकार और कसावट पर निर्भर करती है. आकर्षक और एक समान आकार के फूलों की मांग मंडियों में अधिक रहती है. समय पर रोपाई करने वाले किसानों को बेहतर क्वालिटी की उपज मिलती है, जिससे उन्हें अच्छा बाजार मूल्य प्राप्त होता है.

इसके विपरीत, फजीनेस से प्रभावित फूलों की बिक्री कम दाम पर करनी पड़ती है. इससे उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है.

कैसे करें सही प्रबंधन?

किसानों को खेती के वैज्ञानिक कैलेंडर का पालन करना चाहिए. समय पर रोपाई, संतुलित सिंचाई और तापमान के अनुसार फसल प्रबंधन बेहद जरूरी है. खेत की नियमित निगरानी और उचित पोषक तत्वों का उपयोग भी कर्ड के बेहतर विकास में सहायक होता है.

समय पर की गई योजना और सही तकनीक अपनाकर ‘फजीनेस’ जैसी समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. इससे न केवल उत्पादन बेहतर होगा, बल्कि किसानों को अपनी उपज का अधिकतम मूल्य भी मिल सकेगा.

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