पॉलीहाउस ने बदलेगी किसानों की तस्वीर! दीदी बगिया योजना से नर्सरी और सब्जी खेती में बढ़ेगी कमाई

पलामू में दीदी बगिया योजना और पॉलीहाउस खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है. नर्सरी, फलदार पौधे और ऑफ-सीजन सब्जियों के उत्पादन से ग्रामीणों को अतिरिक्त आय मिल रही है. सरकारी मदद से आधुनिक खेती अपनाकर किसान आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.

नोएडा | Updated On: 16 Aug, 2026 | 09:40 AM

Didi Bagiya Yojana: झारखंड के पलामू जिले में आधुनिक खेती की नई तस्वीर देखने को मिल रही है. किसान अब पारंपरिक खेती के साथ पॉलीहाउस तकनीक, पौध उत्पादन और नर्सरी व्यवसाय को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. सरकार की दीदी बगिया योजना और बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक कृषि से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. इससे कम लागत में बेहतर उत्पादन और अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं. पॉलीहाउस तकनीक किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. इसमें मौसम की मार से फसलों को बचाकर सालभर सब्जियों और पौधों का उत्पादन किया जा सकता है. पलामू के खनवा गांव सहित जिले के कई क्षेत्रों में इस योजना के माध्यम से नर्सरी और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है.

दीदी बगिया योजना से तैयार हो रहे हजारों पौधे

दीदी बगिया योजना  के तहत पलामू में पॉलीहाउस के अंदर बड़े स्तर पर पौध तैयार किए जा रहे हैं. योजना के माध्यम से फलदार, इमारती और सब्जियों के पौधों की नर्सरी विकसित की जा रही है. पिछले वर्ष यहां करीब 12 हजार पौधे तैयार किए गए थे, जबकि इस साल करीब 20 हजार पौधे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि शुरुआती निवेश का दबाव लाभुकों पर नहीं पड़ता है. नर्सरी तैयार करने के लिए जरूरी बीज झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की ओर से उपलब्ध कराए जाते हैं. इससे महिला समूहों और किसानों को नर्सरी व्यवसाय शुरू करने में आसानी हो रही है.

पॉलीहाउस में सब्जी खेती से बढ़ रही आय

पॉलीहाउस तकनीक के जरिए किसान टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, फूलगोभी, पत्तागोभी जैसी कई सब्जियों  का उत्पादन कर सकते हैं. नियंत्रित तापमान, नमी और सिंचाई व्यवस्था के कारण पॉलीहाउस में फसल की गुणवत्ता बेहतर रहती है और उत्पादन भी बढ़ता है. ऑफ-सीजन सब्जियों की खेती से किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है. इसके अलावा पॉलीहाउस में तैयार पौधों की बिक्री भी आय का अतिरिक्त माध्यम बन रही है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं.

फलदार और इमारती पौधों की बिक्री से मिलेगा लाभ

दीदी बगिया योजना के तहत तैयार नर्सरी में सागवान, शीशम, महोगनी, आम सहित कई फलदार और इमारती पौधे तैयार किए जा रहे हैं. इन पौधों की जल्द बिक्री शुरू की जाएगी. स्थानीय स्तर पर किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे. नर्सरी व्यवसाय से जुड़ी महिलाओं को करीब 80 से 90 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय होने की संभावना है. इससे महिला समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी.

ऐसे मिलेगा दीदी बगिया योजना का लाभ

दीदी बगिया योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक किसान और ग्रामीण महिलाएं अपने क्षेत्र के स्वयं सहायता समूह, जेएसएलपीएस कार्यालय या संबंधित प्रखंड कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं. योजना के तहत पात्र लाभुकों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है. आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता, निवास प्रमाण पत्र सहित जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है. कृषि विभाग और ग्रामीण विकास विभाग  की ओर से समय-समय पर योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पॉलीहाउस और नर्सरी व्यवसाय अपनाकर किसान सीमित जमीन में भी अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं. सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक खेती की ओर बढ़ना किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प साबित हो सकता है.

Published: 16 Aug, 2026 | 09:41 AM

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