राजस्थान के बाद पंजाब को भी मिलेगी गेहूं खरीद के मानकों में छूट, जांच के लिए पहुंची 9 सदस्यीय टीम
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपनिदेशक पीके सिंह के नेतृत्व में यह टीम बारिश से प्रभावित जिलों का दौरा करेगी. यह टीम भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर गेहूं के नमूने एकत्र करेगी और स्थिति का आकलन करेगी.
Punjab News: केंद्र सरकार द्वारा राजस्थान को गेहूं खरीद मानकों में छूट देने के बाद अब अन्य राज्यों से भी मांग उठने लगी. हालांकि, केंद्र सरकार राज्यों की मांग पर अमल भी कर रही है, क्योंकि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से कई राज्यों में फसल को नुकसान पहुंचा है. इसी कड़ी में पंजाब सरकार द्वारा गेहूं खरीद में छूट की मांग के बाद केंद्र सरकार ने एक 9 सदस्यीय टीम भेजी है. यह टीम 29 मार्च से 8 अप्रैल के बीच बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं से हुए गेहूं के नुकसान का आकलन करेगी, जिसमें दानों की चमक कम होना, उत्पादन में गिरावट, दानों का सिकुड़ना और नमी अधिक होना जैसी समस्याएं शामिल हैं.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपनिदेशक पीके सिंह के नेतृत्व में यह टीम बारिश से प्रभावित जिलों का दौरा करेगी. यह टीम भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर गेहूं के नमूने एकत्र करेगी और स्थिति का आकलन करेगी. पंजाब सरकार ने केंद्र से अपील की थी कि गेहूं खरीद के नियमों में ढील दी जाए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके और उनकी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल) से कम दाम पर न बिके. राज्य में करीब 1.30 लाख एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल बेमौसम बारिश और मौसम की मार से खराब हो गई है.
गेहूं खरीद के मानकों में छूट दे दी
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने पहले ही राजस्थान में मौसम के असर को देखते हुए गेहूं खरीद के मानकों में छूट दे दी है. लेकिन पंजाब सरकार का कहना है कि उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. उनका आरोप है कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है. दरअसल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी के बीच हाली ही में दिल्ली में हुई बैठक में यह मुद्दा उठाया गया. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सूत्रों के अनुसार, राजस्थान में गेहूं की फसल पंजाब की तुलना में जल्दी पकती है, इसलिए वहां केंद्र सरकार की टीमें पहले ही जाकर नुकसान का आकलन कर चुकी हैं और गुणवत्ता मानकों में छूट भी दे दी गई है.
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गेहूं में नमी की मात्रा अधिक पाई गई
किसानों, आढ़तियों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मंडियों में आ रहा गेहूं तय मानक 12 फीसदी से अधिक नमी वाला है, कुछ इलाकों में यह 15 फीसदी तक पाया गया है. इसके साथ ही दानों की चमक (लस्टर) कम हो गई है. किसानों का यह भी कहना है कि इस बार प्रति एकड़ 4-5 क्विंटल तक पैदावार कम हो सकती है. हाल ही में राज्य सरकार द्वारा भारतीय खाद्य निगम (FCI) की मदद से लिए गए नमूनों में करीब 60 फीसदी दानों में चमक कम होने के साथ-साथ टूटे और सिकुड़े हुए दाने भी पाए गए हैं. रविंदर चीमा ने मांग की है कि केंद्र सरकार को नमी की सीमा में भी ढील देनी चाहिए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके.
सरवन सिंह पंढेर ने उठाई थी मांग
बता दें कि राजस्थान को गेहूं खरीद मानकों में छूट देने पर किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंढेर ने केद्र सरकार के इस फैसले को पक्षपातपूर्ण बताया था. उन्होंने ‘किसान इंडिया’ से कहा था कि पंजाब में भी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से करीब 1.30 लाख एकड़ रबी फसल को नुकसान हुआ है, जिसमें सबसे ज्यादा असर गेहूं किसानों पर पड़ा है. ऐसे में केंद्र सरकार केवल राजस्थान को ही गेहूं खरीद मानकों में छूट क्यों दे रही है. उन्होंने मांग की कि राजस्थान की तरह पंजाब को भी यह छूट मिलनी चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि पंजाब देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य है, जहां सबसे ज्यादा सरकारी खरीद होती है. इसलिए केंद्र सरकार को न सिर्फ खरीद मानकों में ढील देनी चाहिए, बल्कि पंजाब के किसानों के लिए राहत पैकेज भी जारी करना चाहिए.