Punjab News: पंजाब में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से एक लाख एकड़ से ज्यादा रकबे में मक्का, गेहूं, टमाटर और बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचा है. हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फसल नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे कराने का आदेश दे दिया है. लेकिन उनके आदेश के बावजूद जमीन पर सर्वे का काम नहीं दिख रहा है. ये कहना है किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंढेर का. उन्होंने किसान इंडिया से फोन पर बात करते हुए कहा कि मार्च महीने से लगातर हो रही बारिश से पंजाब में फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है. इससे किसानों की स्थिति दयनीय हो गई है. इसलिए सरकार को तुरंत फसल मुआवजा राशि जारी करनी चाहिए. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि प्रदेश के बाढ़ प्रभावित किसानों को पिछले साल का ही अभी तक मुआवजा नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि प्रीमियम फसल बीमा के नाम से किसानों से ठगी हो रही है.
सरवन सिंह पंढेर ने किसान इंडिया से कहा कि पंजाब में बेमौसम बारिश से 1.25 लाख एकड़ फसल बर्बाद हुई है. हालांकि, सीएम मान ने फसल नुकसान का आकलन करने के लिए आदेश दे दिया है, लेकिन गांवों में अभी तक एक भी कर्मचारी या अधिकारी गिरदावरी करने नहीं पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि किसानों का सरकार पर से भरोसा उठ गया है. उनकी कथनी और करनी में आसमान-जमीन का फर्क होता है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले साल बाढ़ प्रभावित किसानों को अभी तक 20 हजार रुपये प्रति एकड़ की मुआवजा राशि नहीं मिली है. जबकि किसान काफी समय से मुआवजे की मांग कर रहे हैं. उनके मुताबिक, राज्य सरकार का कहना है कि मुआवजा देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं. यानी खजाना बिल्कुल खाली है.
प्रीमिय फसल बीमा के नाम पर किसानों से ठगी
किसान नेता पंढेर ने कहा कि सरकार केवल आम किसानों को खुश करने के लिए आश्वासन और मुआवजे का ऐलान करती है. लेकिन बाद में किसानों को कोई आर्थिक मदद नहीं दी जाती है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार सब एक जैसे ही हैं. विपक्ष में रहने पर किसानों की हित की बात करते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही उनका किसान विरोधी चेहरा उजागर हो जाता है. उन्होंने कहा कि प्रीमियम फसल बीमा के नाम पर किसानों को ठगा जा रहा है. फसल बीमा करने के लिए किसानों से मोटी रकम ले ली जाती है, लेकिन नुकसान होने पर मुआवजा नहीं मिलता. बीमा कंपनियां किसानों का सारा पैरा खा जा रही हैं. उन्होंने कहा कि मैंने फसल नुकसान की मार झेल रहे किसानों के लिए सरकार से 70 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग की है.
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इन जिलों में फसल को सबसे अधिक नुकसान
किसान नेता पंढेर ने कहा कि पंजाब के 8 जिलों में फसल का नुकसान सबसे ज्यादा हुआ है. अमृतसर, मोगा, मुक्तसर, फाजिल्का, बठिंडा के साथ-साथ तरनतारन जिले में बारिश से फसल की ज्यादा बर्बादी हुई है. उन्होंने कहा कि अमृतसर के मजीठा में गेहूं, सरसों और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है. उनके मुताबिक, बारिश से 30 फीसदी तक गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है. लेकिन जिस गांव में ज्यादा ओलावृष्टि हुई है, वहां पर 100 फीसद तक नुकसान पहुंच सकता है. साथ ही तेज हवा चलने से 30 फीसदी तक गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई है. ऐसे में किसानों को फसल कटाई करने में परेशानी होगी.
मंडियों में नहीं है कोई व्यवस्था
गेहूं खरीदी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मंडियों में व्यवस्था सही नहीं है. किसानों से नमी के नाम पर एमएसपी में कटौती की जा रही है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है. उन्होंने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि गेहूं किसानों को खरीदी में नमी को लेकर छूट देनी चाहिए. क्योंकि पिछले मार्च महीने से रूक-रूक कर हो रही बारिश से पूरे प्रदेश में गेहूं की फसल प्रभावित हुई है. इससे गेहूं में नमी की मात्रा बढ़ गई है और क्वालिटी पर भी असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि मंडियों के अंदर फसल सुरक्षति रखने की व्यवस्था नहीं है. अगर किसानों को मंडी के अंदर गेहूं को धूप में सूखाने के लिए जगह दी जाए, तो उपज की गुणवता में सुधार होगा. साथ ही नमी की मात्रा भी संतुलित रहेगी.