सोयाबीन में बंपर कमाई का फॉर्मूला! कृषि वैज्ञानिक के 5 उपाय अपनाकर बढ़ाएं पैदावार
सोयाबीन की शुरुआती बढ़वार के दौरान सही देखभाल बेहद जरूरी है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को 15-20 दिन की फसल में खरपतवार नियंत्रण, गैप फिलिंग और जल निकासी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है. वहीं देर से बुवाई करने वाले किसानों को शीघ्र पकने वाली किस्में और 23 सेंटीमीटर लाइन दूरी अपनाने की सलाह दी गई है.
Soybean Farming: लगातार हो रही बारिश के बीच सोयाबीन की फसल तेजी से बढ़ रही है. ऐसे समय में फसल की शुरुआती देखभाल किसानों के लिए सबसे अहम मानी जाती है. कृषि विज्ञान केंद्र शाहजहांपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस.एस. धाकड़ और कृषि वैज्ञानिक डॉ. बी.के. तिवारी ने किसानों को समय रहते खेत की निगरानी, खरपतवार नियंत्रण, पौधों की संख्या बनाए रखने और जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की सलाह दी है. उनका कहना है कि यदि किसान शुरुआती 15 से 20 दिनों में वैज्ञानिक तरीके अपनाते हैं तो फसल का विकास बेहतर होगा और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी.
15-20 दिन की फसल में करें खरपतवार नियंत्रण और गैप फिलिंग
डॉ. एस.एस. धाकड़ (Dr. S.S. Dhakad) ने बताया कि जिन किसानों की सोयाबीन की फसल 15 से 20 दिन की हो चुकी है, उन्हें खेत में खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए. इसके लिए किसान फसल के बीच कल्टीवेटर (फसल चिलर) या ट्रैक्टर से चलने वाले उपयुक्त कृषि यंत्र का उपयोग करें, ताकि खरपतवार नष्ट हो सकें और पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व मिलें. उन्होंने कहा कि जिन खेतों में बीजों का अंकुरण कम हुआ है या पौधों की संख्या पर्याप्त नहीं है, वहां तुरंत गैप फिलिंग करें. खाली स्थानों पर दोबारा बुवाई करने से खेत में पौधों की संख्या संतुलित बनी रहती है, जिससे उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है.
बारिश के दौरान जल निकासी की रखें पूरी व्यवस्था
डॉ. एस.एस. धाकड़ ने बताया कि वर्तमान में कई क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है. ऐसे में जिन खेतों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होगी, वहां फसल को नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेतों में ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) पद्धति के तहत नालियां बनाएं, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके. जलभराव की स्थिति में पौधों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और कई प्रकार के रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए समय रहते जल निकासी सुनिश्चित करना जरूरी है.
देर से बुवाई करने वाले किसान अपनाएं यह तरीका
कृषि विज्ञान केंद्र शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. बी.के. तिवारी (Dr. B.K. Tiwari) ने कहा कि जो किसान अभी तक सोयाबीन की बुवाई नहीं कर पाए हैं या जिनकी बुवाई जुलाई के पहले सप्ताह के बाद होगी, उन्हें शीघ्र पकने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि बुवाई के समय लाइन से लाइन की दूरी 23 सेंटीमीटर रखें और 90 से 100 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करें. इससे पौधों का विकास बेहतर होगा और देर से बुवाई होने के बावजूद उत्पादन पर अधिक असर नहीं पड़ेगा.
वैज्ञानिक सलाह अपनाकर बढ़ाएं उत्पादन
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि सोयाबीन की खेती में शुरुआती 20 दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. यदि इस दौरान किसान खरपतवार नियंत्रण, पौधों की पर्याप्त संख्या, जल निकासी और वैज्ञानिक बुवाई तकनीकों का पालन करते हैं, तो फसल स्वस्थ रहती है और बेहतर पैदावार मिलती है. उन्होंने किसानों से मौसम के अनुसार कृषि कार्य करने और कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह का पालन करने की अपील की है. समय पर अपनाए गए ये वैज्ञानिक उपाय न केवल फसल को नुकसान से बचाएंगे, बल्कि किसानों की लागत कम कर अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा दिलाने में भी मदद करेंगे.