चीनी ने बिगाड़ा बजट! महाराष्ट्र के इस शहर में 80 रुपये किलो पहुंचा भाव, जानें क्यों बढ़ी कीमत

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच एक्सपर्ट्स ने इसके पीछे कम गन्ना उत्पादन और कारोबारियों की ओर से स्टॉक जमा करने को प्रमुख वजह बताया है. विशेषज्ञों ने इथेनॉल उत्पादन को कीमत बढ़ने का मुख्य कारण मानने से इनकार किया. महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई का सीजन भी घटा है. सरकार और विशेषज्ञों के दावों से चीनी बाजार में नई बहस छिड़ गई है.

नोएडा | Updated On: 24 Aug, 2026 | 09:49 AM

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में चीनी का भाव 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. विशेषज्ञों के मुताबिक, गन्ने के उत्पादन में कमी और कारोबारियों की ओर से ज्यादा स्टॉक रखने से कीमतें बढ़ी हैं. हालांकि, इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को इसकी मुख्य वजह नहीं माना जा रहा है. वहीं, विपक्ष सरकार की इथेनॉल नीति पर सवाल उठा रहा है.

सरकार ने कारोबारियों को बताया जिम्मेदार

सरकार ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज किया है. केंद्र का कहना है कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी का स्टॉक मौजूद है. सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी के लिए उद्योग और कारोबारियों को जिम्मेदार ठहराया है. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में भी चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं. एक सुपरमार्केट संचालक के मुताबिक, रविवार को खुली चीनी की कीमत 75 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई.

गन्ने की पैदावार और उत्पादक राज्यों की संख्या घटी

चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. हालांकि, विशेषज्ञों ने इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्ट किए जाने को कीमत बढ़ने की मुख्य वजह नहीं माना है. महाराष्ट्र के पूर्व चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ ने अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन से कहा कि देश में गन्ने का उत्पादन और प्रति हेक्टेयर पैदावार लगातार घट रही है. इसका सीधा असर चीनी के कुल उत्पादन पर पड़ रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि गन्ना उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों की संख्या भी कम हो रही है.

36 महीने बाद दिखेगा गन्ना उत्पादन बढ़ाने की नीति का असर

शेखर गायकवाड़ के मुताबिक, सरकार अगर गन्ने का उत्पादन  बढ़ाने के लिए नई नीति भी बनाती है, तो उसका असर तुरंत नहीं दिखेगा. इसके नतीजे आने में करीब 30 से 36 महीने लग सकते हैं. उन्होंने सरकार से देश में चीनी के मौजूदा स्टॉक की एक बार फिर जांच करने की जरूरत बताई. नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश दांडेगांवकर ने कहा कि देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई का सीजन भी कम हो गया है. उन्होंने कहा कि पहले चीनी मिलें करीब 150 दिन तक गन्ने की पेराई करती थीं, लेकिन अब यह अवधि घटकर करीब 100 दिन रह गई है.

गन्ना किसानों को 3,650 रुपये FRP

उन्होंने कहा कि कारोबार में मुनाफा कम होने के कारण मिलें ज्यादा दिनों तक पेराई नहीं कर पा रही हैं. किसानों को गन्ने के लिए 3,650 रुपये प्रति टन FRP दिया जा रहा है, जबकि चीनी का MSP 3,100 रुपये है. उनके मुताबिक, FRP और चीनी के MSP के बीच अंतर के कारण चीनी मिलों को नुकसान हो रहा है और इस समस्या का समाधान जरूरी है. वहीं, वेस्ट इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (WISMA) के अध्यक्ष भैरवनाथ थोंबरे ने कहा कि मौजूदा समय में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

 

Published: 24 Aug, 2026 | 09:47 AM

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