बीते कई दिनों से लगातार चीनी के बढ़ते दामों से मचे हाहाकार के बाद केंद्र सरकार ने बयान जारी करते हुए कहा चीनी में उछाल की वजह बताई है. बयान में कहा गया है कि चीनी महंगी होने के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. सरकार ने कहा कि अक्टूबर से शुरू होने वाले नए पेराई सीजन तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए देश के पास चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. इसके साथ ही मंत्रालय स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और उसने उपभोक्ताओं के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं.
सरकार ने माना महंगी हुई है चीनी
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने चीनी की कीमतों में उछाल को लेकर कहा है कि हाल के हफ्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं. 20 जुलाई 2026 को ये 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थीं और 20 अगस्त 2026 को 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं. सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और उसने उपभोक्ताओं के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं.
चीनी महंगी होने के लिए इथेनॉल जिम्मेदार नहीं
मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. हाल ही में चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन (इस्तेमाल) से जोड़ना गलत है. इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12 फीसदी से घटकर 2025-26 में लगभग 9 फीसदी हो गया है. इसके अलावा देश में बनने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज खासकर मक्के से आता है.
सरकार ने चीनी के दाम बढ़ने की ये वजहें बताईं
चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हुई है, जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ी हुई मांग, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की सप्लाई में कमी और इंडस्ट्री के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं.
नए पेराई सीजन तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि अनुमान से कम उत्पादन के बावजूद, अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. चीनी की कीमतें वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रही हैं. चीनी की सप्लाई में कमी एक वैश्विक घटना है और यह सिर्फ़ भारत तक सीमित नहीं है.
चीनी उत्पादन अनुमान से कम होना बनी वजह
मौजूदा सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन होने की उम्मीद है, जबकि गन्ना उगाने वाले राज्यों का शुरुआती अनुमान लगभग 343 लाख मीट्रिक टन था. उत्पादन में गिरावट की वजह गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी के साथ-साथ ज्यादा बारिश से हुए जलभराव से उत्पादन पर असर पड़ा है. अनुमान से कम प्रोडक्शन के बावजूद अक्टूबर में नया क्रशिंग सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में चीनी का काफी स्टॉक मौजूद है.
चीनी की कीमतें दुनिया भर में भी बढ़ रहीं
चीनी की सप्लाई में कमी एक ग्लोबल घटना है और यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. 2026-27 के लिए दुनिया भर में चीनी की कमी लगभग 33 लाख मीट्रिक होने का अनुमान है. मौसम की चिंताओं ने दुनिया भर के नजरिए पर और असर डाला है. इस वजह से इंटरनेशनल चीनी की कीमतें 30 जून 2026 को $474 प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त 2026 को $552 प्रति टन हो गई हैं. यानी दो महीने से भी कम समय में 16 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.