सफेदा और विलो पेड़ों पर नए कीट का हमला, किसानों ने बाहर से आई पौध सामग्री पर उठाए सवाल

कश्मीर में सफेदा और विलो के पेड़ों पर ड्रोसिचा तुर्किस्थानिका की मौजूदगी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. यह कीट पेड़ों का रस चूसकर उन्हें कमजोर करता है. वैज्ञानिकों ने बाहरी पौध सामग्री की कड़ी जांच और क्वारंटीन व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 21 Aug, 2026 | 05:27 PM

Eucalyptus Tree: कश्मीर घाटी में खेती और कृषि-वानिकी से जुड़े किसानों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है. विलो और सफेदा के पेड़ों पर ड्रोसिचा तुर्किस्थानिका नाम के नए कीट का प्रकोप सामने आने के बाद बागवानों की चिंता बढ़ गई है. यह कीट पेड़ों से रस चूसकर उन्हें धीरे-धीरे कमजोर करता है. वैज्ञानिकों और किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि यह कीट बाहर से घाटी में पहुंची पौध सामग्री के साथ आया है. ऐसे में पौध सामग्री की क्वारंटीन व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

दक्षिण कश्मीर में सामने आए कई मामले

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, माउंटेन रिसर्च सेंटर फॉर फील्ड क्रॉप्स, खुदवानी के प्रोफेसर बशीर अहमद राठेर के अनुसार, घाटी के दक्षिणी हिस्सों से इस नए कीट के कई मामले सामने आए हैं. यह कीट पेड़ों का रस चूसता है, जिससे पौधे धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं. विलो और सफेदा कश्मीर की कृषि-वानिकी व्यवस्था में महत्वपूर्ण पेड़ हैं. बड़ी संख्या में किसान और बागवान इन पेड़ों से अपनी आमदनी जोड़ते हैं. ऐसे में अगर कीट का प्रकोप बड़े क्षेत्र में फैलता है तो इसका असर पेड़ों की सेहत के साथ किसानों की कमाई पर भी पड़ सकता है.

बाहर से आई पौध सामग्री पर उठे सवाल

नए कीट की मौजूदगी ने बाहर से आने वाली पौध सामग्री की जांच व्यवस्था  पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जानकारों का मानना है कि अगर पौध सामग्री को घाटी में प्रवेश से पहले ठीक तरीके से क्वारंटीन और जांच नहीं किया जाए तो उसके साथ नए कीट और रोग भी आसानी से पहुंच सकते हैं. आरोप है कि पौध सामग्री की बिक्री और आवाजाही के दौरान निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है. यही वजह है कि विशेषज्ञ अब पौध सामग्री की आवाजाही पर ज्यादा सख्ती और निगरानी की मांग कर रहे हैं.

पहले भी बाहरी पौध सामग्री से पहुंच चुका है कीट

कश्मीर की बागवानी  पहले भी बाहर से आने वाले कीटों की चुनौती का सामना कर चुकी है. रिपोर्ट के अनुसार, इटली और अमेरिका से आयात की गई सेब की किस्मों के साथ एप्पल लीफ माइनर कीट के घाटी में पहुंचने का मामला सामने आया था. इस तरह के कीटों के कारण किसानों को फसलों और बागों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय करने पड़ते हैं. कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल से खेती की लागत भी बढ़ती है, जबकि कीटों के कारण फलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

वैज्ञानिकों ने सख्त क्वारंटीन की दी सलाह

नए कीट के सामने आने के बाद वैज्ञानिकों ने घाटी में आने वाली प्रत्येक पौध सामग्री  की कड़ी निगरानी की जरूरत बताई है. उनका कहना है कि पौध सामग्री की जांच और क्वारंटीन व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि बाहर से आने वाले कीटों और रोगों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके. कश्मीर में पॉपुलर, विलो और सफेदा जैसे पेड़ों से जुड़े किसानों के लिए यह चुनौती इसलिए अहम है क्योंकि इन पेड़ों की खेती उनकी आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है. समय रहते निगरानी, वैज्ञानिक पहचान और प्रभावी क्वारंटीन व्यवस्था से इस कीट के प्रसार को नियंत्रित करने की कोशिश की जा सकती है.

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