Sheep Farming: देश में भेड़ पालन को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने बड़ा कदम उठाया है. ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर द्वारा विकसित अविशान भेड़ नस्ल का देशभर में प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं. शुक्रवार को संस्थान के दौरे के दौरान उन्होंने अविशान समेत अविकालीन, पाटनवाड़ी और मालपुरा नस्लों की प्रगति की समीक्षा की. इस दौरान अविशान नस्ल की बेहतर उत्पादन क्षमता और आनुवंशिक सुधारों को विशेष रूप से सराहा गया.
पशुपालकों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही अविशान
CSWRI के अनुसार, अविशान भेड़ नस्ल पशुपालकों की आय बढ़ाने की बड़ी क्षमता रखती है. संस्थान का दावा है कि यह नस्ल पारंपरिक नस्लों की तुलना में लगभग 1.5 गुना अधिक आर्थिक लाभ दिला सकती है. यही कारण है कि ICAR अब इसके व्यापक प्रसार पर जोर दे रहा है ताकि अधिक से अधिक पशुपालक इसका लाभ उठा सकें. विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ने वाली और अधिक मेमने देने वाली नस्लें भेड़ पालन व्यवसाय को नई दिशा दे सकती हैं. अविशान इसी श्रेणी की एक उन्नत नस्ल मानी जा रही है.
तीन नस्लों के गुणों से तैयार हुई है अविशान
अविशान भेड़ गारोल, मालपुरा और पाटनवाड़ी नस्लों के चयनित गुणों को मिलाकर विकसित की गई है. इस नस्ल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रजनन क्षमता है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लगभग 47 प्रतिशत मादा भेड़ एक बार में दो मेमनों को जन्म देती हैं, जबकि करीब 2 प्रतिशत मादा तीन मेमनों तक को जन्म देने में सक्षम हैं. अधिक मेमने पैदा होने से पशुपालकों को कम समय में अधिक संख्या में पशु तैयार करने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है.
तेज विकास दर और बेहतर उत्पादन क्षमता
अविशान नस्ल के मेमनों की वृद्धि दर भी काफी प्रभावशाली है. फार्म परिस्थितियों में जन्म के समय एक मेमने का औसत वजन लगभग 3.30 किलोग्राम होता है. तीन महीने की आयु तक यह बढ़कर 16.80 किलोग्राम और एक वर्ष की उम्र में लगभग 34.70 किलोग्राम तक पहुंच जाता है. संस्थान के आंकड़ों के मुताबिक, यह नस्ल स्थानीय मालपुरा भेड़ की तुलना में मादा भेड़ की कुल उत्पादकता के मामले में लगभग 30 प्रतिशत बेहतर प्रदर्शन करती है. यही वजह है कि इसे व्यावसायिक भेड़ पालन के लिए एक संभावनाशील नस्ल माना जा रहा है.
किसानों और छात्रों को जोड़ा जाएगा नई तकनीक से
दौरे के दौरान डॉ. जाट ने वैज्ञानिकों से शोध कार्यों और फील्ड-रेडी तकनीकों पर चर्चा की. उन्होंने पशु चिकित्सा के छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे वैज्ञानिक उपलब्धियों और पशुपालकों के बीच मजबूत कड़ी बनें. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस नस्ल का व्यापक स्तर पर प्रसार किया गया तो यह देश में भेड़ पालन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.