हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 40-50 फीसदी तक कम हो सकता है. पिछले साल राज्य में करीब 3.5 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ था. बागवानी विभाग ने इस साल करीब 2 करोड़ पेटी उत्पादन का अनुमान जताया है. हालांकि, कई बागवानों का कहना है कि वास्तविक उत्पादन इससे भी कम रह सकता है. ऐसे में सेब किसानों ती चिंता बढ़ गई है. उन्हें आर्थिक नुकसान का भय सता रहा है.
बागवानी विभाग के निदेशक सतीश शर्मा ने द ट्रिब्यून से कहा कि अब तक मंडियों में सेब की आवक पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 50 फीसदी ही रही है. मौजूदा आवक विभाग के 40-50 फीसदी उत्पादन गिरावट के अनुमान के अनुरूप है. उत्पादन में इतनी बड़ी गिरावट से बागवानों को भारी नुकसान हो सकता है. हालांकि, सीजन शुरू होने के बाद से सेब के अच्छे दाम मिलने से निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के बागवानों को कुछ राहत मिली है. ऊंचाई वाले इलाकों में सेब की तुड़ाई अभी शुरू नहीं हुई है.
सेब का औसत भाव 2,000 से 2,500 रुपये प्रति पेटी
हालांकि, हिमाचल प्रदेश में सेब की फसल कम होने के बावजूद बागवानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं. रोहड़ू के बागवान लोकिन्दर बिष्ट के मुताबिक, सेब का औसत भाव 2,000 से 2,500 रुपये प्रति पेटी के बीच चल रहा है. वहीं, अच्छी क्वालिटी के प्रीमियम सेब 3,000 से 3,500 रुपये प्रति पेटी तक बिक रहे हैं. बिष्ट ने कहा कि इस बार फसल काफी कम है, लेकिन अच्छे दाम मिलने से उत्पादन में कमी के कारण होने वाले नुकसान की कुछ भरपाई हो रही है.
निजी कंपनियां सीधे बागवानों से खरीद रहीं सेब
मंडियों के अलावा निजी कंपनियां भी बागवानों से सीधे सेब खरीद रही हैं. रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी और कुछ छोटी कंपनियां किसानों को 130-145 रुपये प्रति किलो तक का भाव दे रही हैं. रोहड़ू की एक छोटी खरीद कंपनी के मालिक ने बताया कि पिछले साल कंपनी ने 92 रुपये प्रति किलो से खरीद शुरू की थी, जबकि इस बार फसल कम होने के कारण 130 रुपये प्रति किलो का भाव दिया जा रहा है.
कम फसल के बीच सेब के अच्छे दाम से बागवानों को राहत
हिमाचल प्रदेश में सेब की कम फसल के बीच अच्छे दाम मिलने से बागवानों को राहत मिली है. रिलायंस इस समय अच्छी क्वालिटी के सेब के लिए 145 रुपये प्रति किलो तक का भाव दे रही है. निजी कंपनियां फिलहाल खरीदा हुआ सेब सीधे बाजार में बेच रही हैं और उसे स्टोर नहीं कर रही हैं. वहीं, अडानी एग्री फ्रेश जैसी कंपनियां सेब को स्टोर करके सीजन खत्म होने के बाद बेचती हैं. ऐसी कंपनियां जल्द ही सेब की खरीद शुरू कर सकती हैं. बागवानों को उम्मीद है कि मौजूदा ऊंची कीमतों को देखते हुए अडानी एग्री फ्रेश भी खरीद के दौरान अच्छा भाव देगी.
25 अगस्त से शुरू होगी सेब खरीद
वहीं, जानकारों का कहना है कि इस साल अडानी एग्री फ्रेश सेब की खरीद में देरी कर सकती है. कंपनी जिस क्वालिटी के सेब को स्टोरेज के लिए खरीदती है, उसकी फसल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है. पिछले कुछ वर्षों में कंपनी करीब 25 अगस्त के आसपास खरीद शुरू करती रही है.