गन्ना किसानों के लिए अलर्ट! जुलाई के तीसरे हफ्ते में न भूलें ये 5 काम, नहीं तो होगा भारी नुकसान
Sugarcane Farming: मॉनसून के दौरान जुलाई का तीसरा सप्ताह गन्ने की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय किसानों को जड़ों पर मिट्टी चढ़ाने, खेतों से जलभराव हटाने, खरपतवार नियंत्रण, अंतिम उर्वरक देने और रोग-कीटों की नियमित निगरानी जैसे जरूरी काम पूरे कर लेने चाहिए.
Sugarcane Crop Management: मॉनसून का मौसम गन्ने की फसल के लिए जितना फायदेमंद होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी होता है. जुलाई का तीसरा सप्ताह गन्ने की खेती के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इस समय पौधों की बढ़वार सबसे तेज होती है. अगर इस दौरान खेत की सही देखभाल नहीं की गई, तो तेज हवा, लगातार बारिश और जलभराव की वजह से फसल को भारी नुकसान हो सकता है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, इस समय किसानों को कुछ जरूरी कृषि कार्य समय पर पूरे कर लेने चाहिए.
खासकर गन्ने की जड़ों पर मिट्टी चढ़ाना, खेत से अतिरिक्त पानी निकालना, खरपतवार हटाना और रोग-कीटों पर नजर रखना बेहद जरूरी है. सही समय पर किए गए ये काम न सिर्फ फसल को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि उत्पादन और कमाई बढ़ाने में भी मदद करते हैं.
जड़ों पर मिट्टी चढ़ाना क्यों है जरूरी?
जुलाई के तीसरे सप्ताह तक गन्ने के पौधे तेजी से लंबे और भारी होने लगते हैं. ऐसे में तेज हवा या बारिश के दौरान उनके गिरने का खतरा बढ़ जाता है. अगर पौधों की जड़ों के पास मिट्टी चढ़ा दी जाए, तो उन्हें मजबूत सहारा मिलता है. इससे पौधे आसानी से खड़े रहते हैं, जड़ों का विकास बेहतर होता है और नए कल्ले भी मजबूत बनते हैं. यही वजह है कि, इस समय मिट्टी चढ़ाने का काम सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.
जलभराव से बचाना भी है जरूरी
मॉनसून के दौरान कई बार खेतों में लंबे समय तक पानी भर जाता है. लगातार जलभराव रहने से मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे जड़ें ठीक से काम नहीं कर पातीं. इसका असर सीधे पौधों की बढ़वार पर पड़ता है और पत्तियां पीली होने लगती हैं. इतना ही नहीं, ज्यादा नमी के कारण रेड रॉट (लाल सड़न) जैसी फफूंद जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए किसानों को खेतों के चारों ओर नालियां बनाकर अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करनी चाहिए.
खरपतवार हटाकर दें अंतिम खाद
बारिश के मौसम में खेतों में खरपतवार बहुत तेजी से बढ़ते हैं. ये गन्ने के पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्व और नमी को सोख लेते हैं, जिससे फसल कमजोर होने लगती है. इसलिए मिट्टी चढ़ाने के साथ ही खेत की निराई-गुड़ाई कर खरपतवार साफ कर दें. इसी समय यूरिया या अन्य अनुशंसित उर्वरकों की अंतिम खुराक देने से पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है और उनकी लंबाई व मोटाई तेजी से बढ़ती है.
रोग और कीटों पर रखें नजर
जुलाई की गर्मी और उमस में गन्ने की फसल पर कई रोग और कीट हमला कर सकते हैं. इस दौरान पायरिला, टॉप बोरर (चोटी बेधक) और लाल सड़न जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं. किसानों को नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करना चाहिए. यदि किसी पौधे में बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत हटाकर नष्ट कर दें. जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव करें. जुलाई के तीसरे सप्ताह में थोड़ी-सी सावधानी किसानों को बड़े नुकसान से बचा सकती है. जड़ों पर मिट्टी चढ़ाना, खेत से पानी निकालना, खरपतवार नियंत्रण, संतुलित खाद प्रबंधन और कीटों की समय पर रोकथाम से गन्ने की फसल मजबूत होगी और बेहतर उत्पादन मिलेगा.