भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस पर महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने कहा कि विज्ञान आधारित अनुसंधान और नवाचार समृद्ध किसान, सशक्त कृषि और विकसित भारत की आधारशिला हैं. इस दौरान उन्होंने संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी दी. आईसीएआर ने साल 2025-26 के दौरान 44 फसलों की 386 किस्में विकसित कीं. इसके साथ ही बागवानी फसलों की उन्नत किस्मों को भी विकसित किया है. इसके साथ ही पशुपालन क्षेत्र में 26 देसी पशुधन नस्लों को विकसित किया है और भारत की पहली जीन एडिटेड भेड़ नस्ल को विकसित करने में कामयाबी हासिल की है.
एक साल में 44 फसलों की 386 नई किस्में विकसित कीं
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) ने साल 2025-26 के दौरान कृषि क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 44 फसलों की कुल 386 नई किस्में जारी कीं हैं. इनमें 94 प्रतिशत किस्में जलवायु-रोधी (क्लाइमेट रेजिलिएंट) हैं, जो बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के बीच भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं. इसके अलावा 29 किस्में बायो फोर्टिफाइड हैं, जिनमें पोषण तत्वों की मात्रा अधिक है.
बागवानी फसलों की 117 नई किस्में लाया
बागवानी क्षेत्र में आईसीएआर ने 57 फसलों की 117 उन्नत किस्में विकसित कर जारी की हैं. किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए 1.16 लाख क्विंटल से अधिक ब्रीडर बीज का उत्पादन भी किया गया, जिससे उच्च उत्पादकता वाली किस्मों के प्रसार को बढ़ावा मिला.
पशुधन और मुर्गी पालन के 26 देसी नस्लों का पंजीकरण
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने साल 2025-26 में 26 देसी पशुधन और मुर्गी पालन नस्लों का पंजीकरण किया. इनमें ‘नागामी’ विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो दुनिया की पहली पंजीकृत मिथुन नस्ल बनी है. यह उपलब्धि देश की स्वदेशी आनुवंशिक संपदा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
भारत की पहली जीन एडिटेड भेड़ तैयार की
जीन संपादन (जीन एडिटिंग) के क्षेत्र में आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने भारत की पहली जीन एडिटेड भेड़ विकसित कर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की. यह पशुधन सुधार और भविष्य के अनुसंधान के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. जीन एडिटेड भेड़ (Gene Edited Sheep) एक ऐसी भेड़ है जिसके डीएनए (DNA) में वैज्ञानिक तरीकों से सटीक बदलाव (संशोधन) किए गए हैं. इसका उद्देश्य पशुधन में मांस की गुणवत्ता, वृद्धि और रोगों से लड़ने की क्षमता में सुधार करना है.
मत्स्य पालन क्षेत्र में 6 नई प्रजातियों की खोज
मत्स्य पालन क्षेत्र में आईसीएआर ने 6 नई जलीय प्रजातियों की खोज की. इसके साथ ही ब्रीडिंग, स्मार्ट डायग्नोस्टिक्स, एआई आधारित फिशरीज़ मैनेजमेंट और टिकाऊ तकनीकों में कई नवाचार किए गए हैं. इन प्रयासों के परिणामस्वरूप एक वर्ष में मछली उत्पादन में लगभग 14 लाख टन की बढ़त दर्ज की गई.
पशु स्वास्थ्य में वैक्सीनेशन और टेक्नोलॉजी से कमाल
पशु रोगों की समय रहते पहचान और रोकथाम के लिए आईसीएआर ने 15 प्रमुख पशु बीमारियों की पूर्व चेतावनी देने हेतु करीब 3 करोड़ SMS अलर्ट जारी किए. इसके अलावा 4.92 लाख पशुओं और मुर्गियों की जांच कर रोग निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाया गया. आईसीएआर ने पशुओं में होने वाली गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए एफएमडी (फुट एंड माउथ डिजीज), पीपीआर (पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स) और अफ्रीकन स्वाइन फीवर के लिए स्वदेशी टीके विकसित किए. साथ ही लंपी स्किन डिजीज वैक्सीन का सफल व्यावसायीकरण (कमर्शियलाइज़ेशन) भी किया गया, जिससे पशुपालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.