तेलंगाना में 87 करोड़ रुपये का धान घोटाला, तीन राइस मिलों के खिलाफ केस दर्ज
तेलंगाना में सरकारी धान और कस्टम मिल्ड राइस (CMR) से जुड़े बड़े घोटाले सामने आए हैं. जगतियाल, मेडक, निजामाबाद और कामारेड्डी की कई राइस मिलों में करोड़ों रुपये के धान और चावल के स्टॉक में गड़बड़ी मिली है. विजिलेंस जांच के बाद कई मिल मालिकों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच तेज कर दी गई है.
Telangana Paddy Scam: तेलंगाना के जगतियाल जिले में सरकारी योजना के तहत चावल बनाने के लिए दिया गया 87.89 करोड़ रुपये मूल्य का धान गायब मिलने का मामला सामने आया है. इस मामले में तीन राइस मिलों के मालिकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं. विजिलेंस एंड एन्फोर्समेंट विभाग ने ठक्कल्लापल्ली गांव स्थित श्री अभया अंजनेय स्वामी इंडस्ट्रीज, श्री लक्ष्मी गणपति इंडस्ट्रीज और श्री लक्ष्मी बालाजी इंडस्ट्रीज में अचानक जांच की. जांच के दौरान अधिकारियों को 34,388 मीट्रिक टन धान, जिसकी कीमत करीब 87.89 करोड़ रुपये है, का कोई हिसाब नहीं मिला. इसके बाद संबंधित राइस मिलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
विजिलेंस विभाग की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला नागरिक आपूर्ति विभाग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. जिला कलेक्टर के निर्देश पर पुलिस ने तीनों राइस मिलों के मालिकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर लिए हैं. अधिकारियों ने कहा कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि गायब हुआ धान कहां गया, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और क्या इसे अवैध रूप से बेचा या दूसरी जगह भेजा गया.
तीन राइस मिलों पर छापेमारी
इसी तरह मेडक जिले में भी विजिलेंस अधिकारियों ने तीन राइस मिलों पर छापेमारी की. जांच के दौरान आरोप मिले कि सरकार को चावल देने के बजाय कुछ मिल मालिकों ने अनाज पड़ोसी राज्यों में बेच दिया. इस मामले में दो राइस मिल मालिकों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं. अधिकारियों ने कुलचाराम मंडल के कौडीपल्ली, पापनपेट और अल्लादुर्ग क्षेत्र की राइस मिलों का निरीक्षण किया. जांच में सरकार को आपूर्ति के लिए रखे गए चावल के स्टॉक में गड़बड़ी पाई गई, जिसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
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3,029.96 टन सरकारी धान का स्टॉक कम मिला
मेडक जिले के कौडीपल्ली स्थित श्री सत्यसाई राइस मिल में जांच के दौरान अधिकारियों को 3,029.96 मीट्रिक टन (करीब 75,749 बोरी) सरकारी धान का स्टॉक कम मिला. जांच में पता चला कि सरकार को कस्टम मिल्ड राइस (CMR) देने के बजाय धान को खुले बाजार में बेच दिया गया. इसके बाद राइस मिल के मालिक के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act) के तहत मामला दर्ज किया गया. इसी मालिक की पापनपेट स्थित दूसरी राइस मिल में भी स्टॉक में गड़बड़ी मिली, जिसके बाद वहां भी एक और मामला दर्ज किया गया.
जांच के दौरान स्टॉक में गड़बड़ियां मिलीं
वहीं, अल्लादुर्ग मंडल के गडीपेद्दापुरम स्थित साई चिन्नी वेंकटेश्वर राइस मिल और संगारेड्डी जिले की कुछ अन्य राइस मिलों में भी जांच के दौरान स्टॉक में गड़बड़ियां मिलीं. हालांकि, इन मामलों में अधिकारियों ने अभी यह नहीं बताया है कि संबंधित मिलों के खिलाफ कौन-सी कानूनी कार्रवाई की गई है. मेडक जिले में राइस मिलों पर चल रही छापेमारी के बीच खबर है कि कुछ राइस मिल मालिकों ने कार्रवाई रुकवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की. हालांकि, इस पर अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
आपूर्ति नहीं करने का मामला दर्ज किया गया
वहीं, निजामाबाद जिले के बोधन में एक राइस मिल के खिलाफ कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की आपूर्ति नहीं करने का मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि मिल ने दो खरीद सीजन में सरकार से 64,000 क्विंटल धान लिया, लेकिन इसके बदले करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य का चावल सरकार को नहीं दिया. जुर्माने सहित यह देनदारी अब 23 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. जिला नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंधक बी. प्रवीण ने बताया कि विजिलेंस विभाग की जांच में 2022-23 रबी और 2025-26 खरीफ सीजन से जुड़ी अनियमितताएं सामने आईं. जांच के बाद श्री साई लक्ष्मी एग्रो इंडस्ट्रीज के खिलाफ शिकायत दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. विजिलेंस विभाग की रिपोर्ट के आधार पर बोधन ग्रामीण पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.
गुरु राघवेंद्र राइस मिल में भी गड़बड़ी
वहीं, कामारेड्डी में भी गुरु राघवेंद्र राइस मिल में गड़बड़ी सामने आई है. विजिलेंस विभाग के अनुसार, 2025-26 खरीफ सीजन का 31,000 क्विंटल धान, जिसकी कीमत करीब 7.5 करोड़ रुपये है, गायब मिला है. अधिकारियों ने बताया कि राज्यभर में राइस मिलों की जांच जारी है. जांच तेज होने के बाद निजामाबाद जिले के कई राइस मिल मालिक कथित रूप से गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए सरकारी धान की नीलामी राशि सरकार को वापस जमा कराने लगे हैं.