Paddy Scam: आंध्र प्रदेश में सरकारी धान के कथित गबन का बड़ा मामला सामने आया है. सतर्कता एवं प्रवर्तन (V&E) विभाग की जांच में आरोप है कि कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलों को दिया गया करीब 500 करोड़ रुपये का सरकारी धान गायब मिला. जांच में यह भी सामने आया कि कई मिलों ने न तो धान का हिसाब दिया और न ही उसके बदले सरकार को तय मात्रा में चावल लौटाया.
दरअसल, कस्टम मिलिंग व्यवस्था के तहत सरकार किसानों से धान खरीदकर राइस मिलों को देती है. मिलों को तय समय के भीतर चावल तैयार कर सरकार को वापस देना होता है. लेकिन वर्ष 2023 से सरकार को लौटाए गए चावल और मिलों को दिए गए धान के बीच बड़ा अंतर मिलने पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने जांच के आदेश दिए. सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन के आयुक्त स्टीफन रवींद्र ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि जांच में करीब 90,000 मीट्रिक टन सरकारी धान गायब पाया गया है. रवींद्र ने कहा कि शुरुआती जांच में आशंका है कि मिल संचालकों ने इस धान को खुले बाजार में बेच दिया.
कार्रवाई और नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया शुरू
अधिकारियों के अनुसार, यह धान पिछले तीन वर्षों के दौरान कस्टम मिलिंग के लिए मिलों को दिया गया था. जांच में सामने आया है कि नलगोंडा, वारंगल, करीमनगर, संगारेड्डी, निजामाबाद, कामारेड्डी और सूर्यापेट जिलों की कई राइस मिलों ने सरकारी धान को बाजार में बेच दिया. अब सरकार इस मामले में दोषी मिल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई और नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया शुरू कर रही है.
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20 जुलाई से 15 जिलों में चल रही छापेमारी
अधिकारियों ने कहा कि गायब हुए सरकारी धान की कीमत संबंधित राइस मिलों से वसूली जाएगी. 20 जुलाई से 15 जिलों में चल रही छापेमारी के दौरान करीब 50 राइस मिलों में बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं. जांच में पता चला कि इन मिलों के पास सरकार का दिया गया धान नहीं मिला और उन्होंने उसके बदले तय मात्रा में चावल भी सरकार को नहीं लौटाया. प्रारंभिक जांच के अनुसार, राइस मिल संचालकों ने करीब 500 करोड़ रुपये का सरकारी धान खुले बाजार में बेच दिया. सतर्कता एवं प्रवर्तन (V&E) विभाग के डीआईजी अभिषेक मोहंती की निगरानी में यह कार्रवाई की गई.
अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर घोटाले की राशि और बढ़ सकती है. जांच के दौरान जगतियाल जिले में एक ही परिवार की तीन राइस मिलों से करीब 80 करोड़ रुपये का धान गायब मिला. वहीं निजामाबाद में एक राइस मिल से 66 करोड़ रुपये और नलगोंडा में एक अन्य राइस मिल से करीब 80 करोड़ रुपये का सरकारी धान कथित रूप से निजी बाजार में बेचे जाने का मामला सामने आया है.
राइस मिल संचालकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज
सतर्कता एवं प्रवर्तन (V&E) विभाग ने इस मामले में राइस मिल संचालकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने शुरू कर दिए हैं. अधिकारियों ने कहा कि जिन मिलों के पास सरकारी धान नहीं मिला है, उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं. उन्हें या तो गायब धान की कीमत जमा करनी होगी या फिर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आवश्यक वस्तु अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम 10 साल की जेल हो सकती है.
300 करोड़ रुपये की वसूली
अधिकारियों ने कहा कि अब तक करीब 500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में से लगभग 300 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है. कई राइस मिल संचालकों ने गायब धान की कीमत जमा करनी शुरू कर दी है, जबकि कुछ ने कार्रवाई के खिलाफ अदालत का रुख किया है. एक राइस मिल संचालक ने कहा कि पूरे उद्योग को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए. राज्य में करीब 3,000 राइस मिलें हैं और गड़बड़ी केवल करीब 50 मिलों तक सीमित है. उनका यह भी कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी धान की बिक्री स्थानीय सिविल सप्लाई अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव नहीं थी.